देश

गाज़ियाबाद।। भारतीय वाणिज्य एंव उद्योग मंडल (द  एसोसिएटेड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) एसोचैम उत्तर प्रदेश के चेयरमैन फाइनेंस कमेटी और ईस्ट इंडिया उद्योग लि. के वरिष्ठ निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार को उद्योग रत्न अलंकरण से सम्मानित किया गया है।

राष्ट्रीय ज्योतिष परिषद ने उनकी सुदीर्घ उद्योग सेवा, सारस्वत साधना, औद्योगिक प्रबंधन के क्षेत्र में उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धियों, माननीय शोध कार्यों और राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा के आधार पर उद्योग रत्न अलंकरण से सम्मानित किया है।

इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. कुमार ने कहा कि कोई भी देश उद्यम से उन्नति पाता है, इसलिए देश के युवाओं को अपनी पूर्ण शक्ति से अपना कर्तव्य निभाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र विकसित होगा तो प्रत्येक नागरिक खुशहाल होगा, इसलिए सरकारों को उद्योगों को सुविधा सम्पन्न करना चाहिए।

अपने सम्बोधन में राष्ट्रीय ज्योतिष परिषद के अध्यक्ष और श्री पीताम्बरा पीठ सीकरीतीर्थ के अधिष्ठाता आचार्य चन्द्रशेखर शास्त्री ने कहा कि डॉ. प्रमोद कुमार ने भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है, उन्होंने उद्योग जगत को नई ऊंचाइयां प्रदान की हैं।

इस अवसर पर भारती शास्त्री, आर्येन्दू शास्त्री, यथार्थ शेखर शास्त्री, शिवम शर्मा, शुभम शर्मा आदि उपस्थित रहे।

 

महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के अष्टम यानी आठवे दीक्षांत समारोह में मध्य प्रदेश के राज्यपाल एवं कुलाधिपति माननीय लालजी टंडन ने शोध छात्रो एवं छात्राओं को शोध उपाधि प्रदान की| इस अवसर पर राज्य के शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी, राष्ट्रीय प्रत्यायन एवं मूल्यांकन परिषद(नैक) बैंगलौर के चेयरमैन पद्मश्री प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह चौहान, विश्वविद्यालय के कुलपति नरेशचन्द्र गौतम, शिक्षकगण और शोधार्थियों के अभिभावक मौजूद थे|

दीक्षांत समारोह में बिजनौर जिले से पत्रकारिता में शोध करने वाले पहली महिला तरूणा एस. गौड़ को पी-एच.डी. में शोध उपाधि प्रदान की गयी| डॉक्टर तरूणा एस. गौड़ ने पत्रकारिता में लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों के प्रबंधन और प्रसार विषय पर शोध किया| डॉक्टर तरूणा एस. गौड़ लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों के लिए काम करने वाली देश एकमात्र एसोसिएशन “लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिएशन- लीपा” की राष्ट्रीय महासचिव हैं| पत्रकारिता में उनका 17 सालो का अनुभव रहा जिसने उन्हें लघु पत्रों की वर्तमान दयनीय दशा पर शोध करने के लिए प्रेरित किया| 

जब डिजिटल न्यूज़ यानी यूट्यूब और वाट्सएप के जमाने में प्रिंट मीडिया अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है ऐसे में डॉक्टर तरूणा एस. गौड़ का यह शोध विषय प्रासंगिक भी है और समाधानपरक भी| शोध विषय “लघु एवं मध्यम समाचारपत्रों के प्रबंधन एवं प्रसार व्यवस्था का एक अध्ययन, बुंदेलखंड के समाचारपत्रों के विशेष संदर्भ में के माध्यम से डॉक्टर तरूणा एस. गौड़ ने लघु पत्रों के लिए आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में सर्वाइव करने का एक मॉडल भी प्रस्तुत किया है जो इस शोध को पत्रकारिता एवं समाज उपयोगी बनाता है|

महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय की स्थापना 12 फरवरी1991 में की गयी थी जिसमे नानाजी देशमुख ने विशेष भूमिका निभाई थी| यह विश्वविद्यालय अपने आप में अनूठा है, जो ग्रामीण अंचल में ग्रामीण छात्रो को उनके परिवेश में शिक्षा के क्षेत्र में कीर्तीमान स्थापित करने के अवसर दे रहा है|

महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय यूजीसी में ए-ग्रेड प्राप्त विश्वविद्यालय है| यहाँ हुए शोध कार्य यूजीसी के कड़े मानक जैसे प्लेजेरिज्म टेस्ट से गुजरते हैं जो शोध कार्यो की मौलिकता प्रमाणित करते हैं| विश्वविद्यालय प्रति दीक्षांत में100 से अधिक छात्रो को शोध उपाधि प्रदान करता है| इस दीक्षांत समारोह में कला, कृषि एवं विज्ञान के 42 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 121 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि एवं स्नातक-परास्नातक स्तर के विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की। समारोह में पूर्व छात्रो, जिन्होंने उल्लेखनीय स्थान बनाया, उन्हें भी प्रशस्तिपत्र प्रदान किये गए इनमे चित्रकूट के वर्तमान विधायक इंजीनियर नीलांशु चतुर्वेदी, यूपीपीएससी की सहायक प्राध्यापक अनामिका दुबे, इतिहास परीक्षा में प्रथम स्थान पाने व इं. शुभम मिश्रा द्वारा सॉफ्टवेयर स्टार्टअप के सफल क्रियांवयन के लिए सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया।   

 

सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ॅ जमीन मिलेगी कही अलग

सरकार को ट्रस्ट बनाकर 3 महीने में देनी होगी जमीन

अपडेट : 11-15 AM 

ना तो हिन्दू साबित कर पा रहे हैं कि विवादित भूमि ही राम जन्म भूमि है और ना ही सुन्नी वक्फ बोर्ड अपना दावा सबित कर पा रहा है: सुप्रीम कोर्ट

अयोध्या मामले मे दो पक्ष सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़ा बाहर

नहीं बटेगी विवादित जमीन

राम लला विराजमान को मिला जमीन का हक

सुन्नी वक्फ बोर्ड अपना दाबा साबित नहीं कर सका: सुप्रीम कोर्ट।

1528 में नवाज पढ़ी गई इसके सबूत नहीं: सुप्रीम कोर्ट

अंग्रेजो ने दी थी वक्फ को जमीन: सुप्रीम कोर्ट

संविधान की महता को ध्यान रखते सभी धर्मों का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी: सुप्रीम कोर्ट

अपडॆट: 11-05

एएमसुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राम अयोध्या में पैदा हुए इस पर कोई सन्देह नहीं यह बात हिन्दू मुस्लिम दोनो मानते हैं। हिन्दू वहां पूजा किया करते थे। अंग्रेजो से पहले वहां सीता रसोई और राम चबूतरा था।

हिन्दू आस्था के गलत होने के प्रमाण नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं कि विवादित भूमि राम जन्म भूमि है या नहीं। साथ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खुदाई में मिला ढांचा गैर-इस्लामिक है।

हिन्दू बाहर पूजा करते रहे है और अन्दर नवाज पढ़ी जाती रही।

आस्थाओ के बल पर फैसला करना मुश्किल: सुप्रीम कोर्ट

 

अपडॆट: 10-40 एएम

सुप्रीम कोर्ट आज अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाने वाला है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच शनिवार को फैसला सुनाएगी। 16  अक्टूबर को इस मामले की सुनवाई पूरी हुई थी सुनवाई 5 जजों की बेंच ने की थी। संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर भी शामिल हैं। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने शुक्रवार को यूपी के मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी और प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओम प्रकाश सिंह को अपने केबिन में बुलाकर उनसे राज्य में सुरक्षा बंदोबस्तों और कानून व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की थी। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने, अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान- के बीच बराबर बराबर बांटने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर, 2010  के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर छह अगस्त से रोजाना 40 दिन तक सुनवाई की थी।

9 नवम्बर को अयोध्या मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ जाएगा। अब तक दोनो पक्षों ने पूरे संयम का परिचय दिया है। लेकिन असल संयम की घड़ी अब आयी है। उत्तर प्रदेश पूरे हाई अलर्ट पर है। कड़े सुरक्षा इंतजाम है। लेकिन यदि दोनो पक्ष आपसी सौहार्द को बनाये रखें तो सुरक्षा की आवश्यकता नहीं। जब फैसला आये तो मुस्लिमों को यह सोचना होगा कि आखिर अयोध्या में राम मन्दिर नहीं होगा तो कहां होगा और हिन्दूओं को सोचना होगा कि विवाद आखिर है किस पर उस मर्यादा पुरूषोत्तम राम के लिये जिनका पूरा जीवन ही त्याग और मर्यादा की प्रतिमूर्ति रहा। जिन्होंने मात्र एक वचन के लिये पूरा राज और सिंहासन त्याग दिया। यहां तक कि लंका को जीत कर भी विभीषण का राज्यभिषेक करवाया।

अगर ये सब भी याद ना रहे तो याद रखना अपने उन करीबी दोस्तों को जिनके साथ हम होली, दिवाली ईद मनाते आये हैं। सुख-दुख में एक साथ खड़े रहें है। दोस्तों ने अपनी दोस्ती के लिये मार खाई है मगर ना धर्म आड़े आया ना समाज। हमें बस उसी मर्यादा का पालन करना है। हमें याद करना है एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महान व्यक्तिवों को जो कुरान के साथ-साथ गीता पढ़ते रहे।

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