कांग्रेस का लक्ष्य सभी गरीबों को 72 हजार रुपये देने का वादा, कांग्रेस ने दिया NYAY का डिटेल
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02 April 2019 Author :  

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का देश के सबसे गरीब 5 करोड़ परिवारों के लिये न्यूनतम आय योजना शुरू करने का वादा सामाजिक सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है लेकिन इसका वित्त पोषण एक मुश्किल कार्य हो सकता है। कुछ प्रमुख अर्थशास्त्रियों तथा समाज विज्ञानियों ने यह कहा है। राहुल गांधी न्यूनतम आय गारंटी योजना और रोजगार के वादे चुनावी रैलियों में पहले ही कर चुके हैं. आज कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में सबकुछ विस्तार से बताया जाएगा. दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी की मौजूदगी में वादों का पिटारा खुलेगा. हर गरीब परिवार को सालाना 72 हजार रुपए देने का वादा कांग्रेस का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है. आखिरी ये 72,000 का फॉर्मूला कैसे तय हुआ ? किस आधार पर 72,000 रुपये सालाना न्याय तय हुआ? इस के पीछे एक कहानी है.राहुल गांधी ने डा मनमोहन सिंह और चिदंबरम को न्याय स्कीम को लागू करने की ज़िम्मेदारी दी थी. मनमोहन सिंह ने इसकी चर्चा अरविंद सुब्रमण्यम, कौशिक बसु और रघुराम राजन से की और कांग्रेस अध्यक्ष से इन तमाम अर्थशास्त्रियों की बात भी करवायी. राहुल गांधी ने चिदंबरम से भी कहा कि मैं कोई ऐसा वादा नहीं करना चाहता जिसको हम पूरा ना कर सकें. इस मीटिंग के बाद राहुल गांधी मीडिया के सामने आए और कहा 20% लोगों को 72000 सालाना देंगे और कांग्रेस ग़रीबी रेखा से बाहर निकालेगी.

 

कांग्रेस के रिसर्च सेल के मुताबिक आजादी के समय देश में 70 फीसदी लोग गरीब थे. लेकिन कांग्रेस सरकारें काफी मेहनत कर इसे 20 फीसदी तक लेकर आई हैं. अब गरीबी पर अंतिम वार करने का वक्त आ गया है. कांग्रेस का लक्ष्य 20 फीसदी गरीबी को हटाकर शून्य तक लाना और देश से गरीबी को पूरी तरह से खत्म करना है. यह योजना आर्थिसक न्याय प्रदान करेगी और गरीबों को गरिमा एवं सम्मान के साथ जीने का मौका देगी. गरीबों के हाथ में पैसा जाने से उपभोग बढ़ेगा और इससे रोजगार बढ़ेगा, कर राजस्व भी बढ़ेगा. देश में आय असमानता तेजी से बढ़ रही है. दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते यह हम सब का नैतिक दायित्व है कि देश से गरीबी को पूरी तरह से खत्म करने का महत्वाकांक्षी काम हाथ में लें. कांग्रेस साल 2030 तक देश से गरीबी को पूरी तरह से खत्म करना चाहती है.इस योजना का लक्ष्य 5 करोड़ सबसे गरीब परिवार हैं जो जनसंख्या का 20 फीसदी हिस्सा हैं. पैसा सीधे परिवार की महिला के खाते में जाएगा. अगर उसके पास बैंक खाता नहीं है तो उसे खुलवाया जाएगा.

योजना को लागू करने के लिए कांग्रेस वित्तीय अनुशासन और विवेकपूर्ण खर्च का तरीका अपनाएगी. इसे केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त योजना के रूप में लागू किया जाएगा. लेकिन लागत का मुख्यत: केंद्र सरकार वहन करेगी. इस योजना को राजस्व के नए स्रोत जुटाने और मौजूदा खर्च को तर्कसंगत बनाकर लागू किया जाएगा. रिसर्च सेल ने कहा कि जब कांग्रेस ने मनरेगा लागू किया था, तब भी बीजेपी और विपक्ष इसे बहुत महत्वाकांक्षी और खर्चीला बता रहे थे. मनरेगा के शुरुआती दौर में इस पर खर्च जीडीपी के 0.6 फीसदी तक था जो बाद में घटकर 0.3 फीसदी तक रह गया. बीजेपी अगर बुलेट ट्रेन के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की व्यवस्था कर सकती है तो आर्थिकक न्याय के लिए कांग्रेस इतनी रकम की व्यवस्था कर सकती है.

आज जो डेटा मौजूद है उससे आसानी से गरीब परिवारों की पहचान हो सकती है. साल 2011 का सामाजिक-आर्थिबक जाति जनगणना और परिवार के आंकड़े से मदद मिल सकती है. पीएम आवास योजना के लिए लाभार्थिजयों की पहचान के लिए भी इस डेटा को आधार बनाया गया था. अंत्योदय अन्न योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला, पीएम आवास योजना, पीएम किसान योजना जैसी स्कीमों से संबंधित डेटा मिल जाएगा.यह योजना कई चरणों में लागू होगी. मनरेगा योजना भरी कई चरणों में लागू की गई थी. कांग्रेस अर्थशास्त्रियों, समाजशास्त्रिगयों और सांख्यकीविदों की एक समिति बनाएगी जो इस योजना की डिजाइन, शुरू करने और इसे लागू करने का पूरा काम देखेंगे. समिति से सब कुछ ठीक होने का संकेत मिलने के बाद ही इसका अगला चरण लागू किया जाएगा.

किसकी सलाह पर बनी योजना-कांग्रेस ने इस योजना के लिए देश और विदेश के कई अर्थशास्त्रियों, विशेषज्ञों की सलाह ली है. उदाहरण के लिए प्रख्यात ग्लोबल इकोनॉमिस्ट रघुराम राजन, थॉमस पिकेट्टी और अभिजीत बैनर्जी ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि उनसे इस योजना के बारे में सलाह ली गई है. इसके लिए गहन आर्थिकक विचार-विमर्श किया गया है. देश भर के परिवारों के आय वितरण आंकड़ों, परिवारों के खपत प्रवृत्ति, वैश्विक सर्वे और राज्य सरकारों तथा निजी क्षेत्र के भी आंकड़ों का अध्ययन किया गया.

 

 

 

 

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