विदेश

बीजिंग (7 जुलाई):  सिक्किम में जारी गतिरोध के बीच भारत को डराने के लिए चीन तिब्बत में सैन्याभ्यास कर रहा है। चीनी सेना तिब्बत के ऊंचाई वाले इलाके में युद्ध के वास्तविक हालात के मुताबिक अभ्यास कर रही है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक इस अभ्यास में नए हथियारों का परीक्षण करने के साथ-साथ गोलीबारी भी कराई जा रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अभ्यास में युद्ध अभियान कमान, युद्ध में सहयोग, गोलीबारी का प्रशिक्षण और शस्त्रों की समग्र निगरानी को शामिल किया गया है। पिछले सप्ताह चीनी रक्षा विभाग के प्रवक्ता कर्नल वू किन ने मीडिया से कहा था कि सैन्य अभ्यास के दौरान करीब 35 टन वजन वाले टैंक का परीक्षण किया जा रहा है। शिन्हुआ ने अपनी वेबसाइट पर इस अभ्यास की तस्वीरें भी जारी की है। यह अभ्यास सिक्किम सेक्टर के डोकालाम इलाके में भारत और चीन के बीच तनाव की पृष्ठभूमि में हो रहा है।

जब प्रवक्ता से पूछा गया था कि क्या ये परीक्षण भारत को ध्यान में रखकर किए जा रहे हैं, प्रवक्ता ने जवाब दिया था, 'इस परीक्षण का उद्देश्य उपकरणों को टेस्ट करना है और यह किसी भी देश को निशाना बनाकर नहीं किया जा रहा है।' हालांकि चीन की सरकारी मीडिया ने हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा था कि चीन सिक्किम सेक्टर में भारत को पीछे करने के लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल भी कर सकता है।

नई दिल्ली (12 अप्रैल):  वर्तमान में बीजेपी सांसद और भारत के पूर्व गृह सचिव आरके सिंह का मानना है भारत के पूर्व नौसेनिक अफसर कुलभूषण जाधव की हत्या की जा चुकी होगी। पाकिस्तान के सैनिक न्यायालय कुलभूषण जाधव अब फांसी की सज़ा देने का नाटक कर रही है।

उन्होंने कहा कि ‘पाकिस्तान ने यक़ीनन कुलभूषण का उत्पीड़न करने के बाद उनकी हत्या कर दी होगी और अब अपनी इसी शर्मनाक करतूत को छिपाने के लिए पाक न्यायिक प्रक्रिया की झूठी कहानी रच रहा है। अगर वाकई में ऐसा कुछ नहीं है तो पाकिस्तान को हमें राजनयिक आधार पर भूषण से मिलने देना चाहिए।

इससे पहले भारत की तरफ़ से 13 बार दी गई राजनयिक अर्ज़ियों को खारिज कर दिया गया’। इसके बावजूद उन्होंने भारत सरकार से दोबारा जल्द से जल्द राजनयिक ताक़त का इस्तेमाल करने की मांग रखी। इतना ही नहीं, आरके सिंह के मुताबिक पाक कल यह घोषणा भी कर सकता है कि उसने कुलभूषण को फांसी की सज़ा दे दी है।

नई दिल्ली॥ सीरिया में हुए केमिकल हमले के जवाब में अमेरिका ने बहुत बड़ी जवाबी कार्रवाई की है।  अमेरिका ने सीरियाई एयरबेस पर दर्जनों क्रूज़ मिसाइल दागी हैं। इस हफ्ते के शुरुआत में सीरियाई सरकार द्वारा किए गए हमले में करीब 80 नागरिक मारे गए थे, जिनमें बच्चों की संख्या काफी ज्यादा थी।

अमेरिका के एक सैन्य अधिकारी ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया, 'गुरुवार रात सीरिया के एयरबेस पर दर्जनों टामहॉक मिसाइल हमले किए गए हैं।' यह पहली बार है जब वाइट हाउस ने सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद के करीबी सैन्य दस्तों पर इस तरह की बड़ी कार्रवाई की है।  ट्रंप के इस फैसले को उत्तरी कोरिया, इरान और ऐसी ही उभरती ताकतों के लिए संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका सीधा सा मतलब है कि नई सत्ता जवाबी हमले करने के लिए पूरी तरह तैयार है और कई बार बिना मौका दिए भी। ट्रंप प्रशासन ने जिस तेजी के साथ यह फैसला लिया और उसके बाद अमेरिकी अधिकारियों ने जिस तरह की प्रतिक्रिया दी है, वह चौंकाने वाला है। अधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने सभी विकल्प तलाश लिए थे और अंत में यह कदम उठाना पड़ा।

 

नई दिल्ली॥ ट्रम्प प्रशासन ने साफ किया है कि एच-1बी वीजा फ्रॉड और गलत इस्तेमाल से निपटने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।

हाल ही में जारी पॉलि‍सी मेमोरेंडम में कहा गया है कि कम्प्‍यूटर प्रोग्रामर्स H-1B वीजा के लिए एलिजिबल नहीं होंगे।

यूएससीआईएस ने 31 मार्च को ‘रिसेशन ऑफ द दि‍संबर 22, 2000, गाइडलाइन मेमो ऑन H-1B कम्प्‍यूटर रिलेटेड पोजि‍शन’ नाम से पॉलि‍सी मेमोरेंडम जारी कि‍या था।

खबर के मुताबिक, एच-1बी वीजा देने में सख्ती बरतने का एलान यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस (USCIS) ने कियUSCIS ने कहा, "हमारा मकसद एच-1बी वीजा के गलत इस्तेमाल को रोकना है। इससे अमेरिकी कंपनियों को हाइली स्किल्ड विदेशियों को अप्वाइंट करने में मदद मिलेगी। फिलहाल, यूएस में क्वालिफाइड वर्कर्स की कमी है।"

ये भी कहा गया है कि अगर कोई कंपनी एच-1बी वीजा प्रोग्राम का मिसयूज करती है तो इसका असर अमेरिकी वर्कर्स पर तो पड़ेगा ही, साथ ही सैलरी में कमी आएगी और फॉरेन इम्प्लॉइज को लाने के मौके कम होंगे।

बता दें कि 2015 में डि‍पार्टमेंट ऑफ लेबर द्वारा सर्टि‍फाइड सभी H-1B एप्‍लिकेशन्स में करीब 12 फीसदी हि‍स्‍सा कम्प्‍यूटर प्रोग्रामर्स रहे हैं। इसमें से 41% सबसे कम सैलरी वाली पोजि‍शन पर थे।

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