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विदेश

नई दिल्ली॥ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प फ्लोरिडा में छह और सात अप्रैल को आधिकारिक रूप से राष्ट्रपति की ओर से आयोजित होने वाले मार-ए-लागो रिट्रीट में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे।  ट्रम्प के इस वर्ष 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद संभालने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली मुलाकात होगी। पिछले माह ट्रम्प ने फ्लोरिडा के पॉम बीच पर जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे का मार-ए-लागो रिट्रीट में स्वागत किया था।

नई दिल्ली (25 दिसंबर): वेस्टमिंस्टर के डिस्ट्रिक्ट जज ने अगर विजय माल्या के खिलाफ वारंट जारी कर दिया तो स्कॉटलैण़्ड यार्ड पुलिस 9 हजार करोड़ हड़प कर भागे विजय माल्या को गिरफ्तार कर भारतीय एजेंसियों के हवाले कर देगी।

माना जा रहा है कि वेस्टमिंस्टर जज भी वारंट जारी कर ही देंगे, क्यों कि ब्रिटिश सरकार ने विजय माल्या को प्रत्यार्पित करने के भारत सरकार के आग्रह को मान लिया है।

भारत सरकार के आग्रह पर ब्रिटिश सरकार 17 फरवरी से विचार कर रही थी, अब जाकर उसने निर्णय ले लिया। अब कहा जा रहा है कि विजय माल्या भारतसे डिपलोमैटिक पासपोर्ट पर भागे थे लेकिन वापसी अपराधियों की तरह होगी।

नई दिल्ली(23 मार्च): पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने कहा है कि पाक कश्मीर समेत सभी मुद्दों पर भारत से बातचीत के लिए तैयार है।

 ममनून हुसैन ने गुरुवार को इस्लामाबाद में रिपब्लिक डे पर अनुअल मिलिट्री परेड की सलामी ली। इस दौरान उन्होंने अपनी स्पीच में भारत को बातचीत का ऑफर दिया।

न्यूज एजेंसी के मुताबिक पाकिस्तान की रिपब्लिक डे परेड में चीन की आर्मी ने भी हिस्सा लिया। इसके जरिए दोनों देशों ने अपनी मजबूत दोस्ती का प्रदर्शन किया।

रिपब्लिक डे परेड में पाकिस्तान ने अपने न्यूक्लियर कैपेबल वेपंस, टैंक, जेट और अन्य हथियारों का प्रदर्शन किया।

राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने इस मौके पर स्टेडियम में मौजूद ऑडियंस के सामने कहा, "चीन की आर्मी ने पहले कभी किसी दूसरे देश के ऐसे किसी इवेंट में हिस्सा नहीं लिया।"

राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने इस मौके पर भारत पर सीजफायर वॉयलेशन का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "भारत ने कश्मीर के विवादित हिमालयी क्षेत्र में सीजफायर वॉयलेशन कर शांति को खतरे में डाला जो दोनों देशों के बीच विभाजित है और 2 युद्धों की वजह भी रहा है।"

शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के मुताबिक ममनून हुसैन ने कहा, "भारत की गैरजिम्मेदाराना हरकत और सीजफायर वॉयलेशन पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए खतरा है।"

 हालांकि हुसैन ने यह भी कहा, " पाकिस्तान कश्मीर विवाद को हल करने के लिए भारत के साथ यूएन रिजोल्यूशंस के तहत बातचीत को तैयार है।"

 ममनून हुसैन ने कहा, "पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए उन्हें मॉरल, पॉलिटिकल और डिप्लोमैटिक सपोर्ट देता रहेगा।" हुसैन ने कश्मीर विवाद के पीसफुली सॉल्युशन के लिए इंटरनेशनल कम्युनिटी से अहम रोल अदा करने की भी अपील की।

उन्होंने कहा, "पाकिस्तान ने किसी देश के खिलाफ कोई आक्रामक रुख नहीं अपनाया है, लेकिन रीजनल पीस और स्टेबिलिटी के लिए कुछ कदम जरूर उठाए हैं।"

 

 

इस्लामाबाद: जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद ने पाकिस्तान सरकार से कहा है कि उसका नाम उस सूची से तत्काल हटाया जाए जो देश से बाहर जाने को लेकर उस पर प्रतिबंध लगाती है। उसने दावा किया कि उससे न तो सुरक्षा को कोई खतरा है और न ही उसका संगठन आतंकवादी गतिविधियों में कभी शामिल रहा है।

वर्ष 2008 में हुए मुंबई आतंकवादी हमले के मास्टरमाइंड ने गृहमंत्री चौधरी निसार अली खान को लिखे पत्र में कहा, ‘‘38 लोगों को सूची में डालने वाले 30 जनवरी 2017 को जारी ज्ञापन पत्र को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।’’ मुंबई में हुए आतंकवादी हमले में 166 लोगों की मौत हो गई थी।

सरकार ने सईद एवं जमात उद दावा के 37 अन्य नेताओं और उसकी फलाह ए इंसानियत चैरिटी को पिछले महीने ‘एग्जिट कंट्रोल लिस्ट’ में डाल दिया था।

शांति एवं सुरक्षा के लिए ‘हानिकारक’ गतिविधियों में शामिल होने के संबंध में सईद और संगठन के चार अन्य नेताओं को 90 दिनों के लिए ‘नजरबंद’ कर दिया गया है। इसके अलावा गृह मंत्रालय ने जमात उद दावा और एफआईएफ को छह महीने के लिए ‘‘निगरानी-सूची’’ में डाल दिया था।

लेकिन सईद ने सरकार के निर्णय का विरोध करते हुए कहा, ‘‘जमात उद दावा संगठन पाकिस्तान में किसी आतंकवादी गतिविधि में कभी शामिल नहीं रहा और संगठन पर आतंकवाद या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने संबंधी किसी घटना का कभी आरोप नहीं लगा।’’ उसने तर्क दिया कि संघीय या प्रांतीय सरकारों ने किसी अदालत में उसके खिलाफ कभी कोई सामग्री पेश नहीं की।

उसने वर्ष 2009 में उसके खिलाफ एक मामले में लाहौर उच्च न्यायालय की एक पूर्ण पीठ की टिप्पणी का हवाला दिया ।अदालत ने कहा था, ‘‘मौजूदा मामले में सरकार के पास इस बात का कोई सबूत नहीं है कि याचिकाकर्ता से पाकिस्तान की सुरक्षा को कोई खतरा है और केवल संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के आधार पर किसी की स्वतंत्रता में अवरोध पैदा नहीं किया जा सकता।

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