अखबार नहीं विज़न है लीड इंडिया

23 March 2017 Author :  

हर एक चीज की शुरूआत एक सपने से होती है और सपना तब सपना नहीं रह जाता जब उसे हकीकत में बदल देने का दृढ विश्वास हो। आज से कई साल पहले एक व्यक्ति ने सपना देखा कि वह हजारों मील दूर बैठे एक व्यक्ति से वैसे ही बात करेगा जैसे वह उस व्यक्ति से सामने बैठ कर बात कर रहा हो। ऐसे ही किसी ने सपना देखा कि एक दिन आसमान में आराम से उड़ेगा, ये सभी सपने थे। इन सपनों को जब उन्होंने अपने आस-पास के लोगो को बताया, तो लोगों ने उनका मजाक उड़ाया, लेकिन वो गलत नहीं थे, उन्होंने खुद को साबित किया। एक ने टेलीफोन का अविष्कार किया तो दूसरे ने हवाई जहाज का।

लीड इंडिया ने भी एक सपना देखा है लेकिन सपने की बात बाद में पहले हकीकत की। जब हमने गाँवों से भी बदतर रोड के हालात देखे, जहाँ बुलेट ट्रेन की बात हो रही हो वहां एक किलोमीटर का सफ़र तय करने में धूल फांकते हुए घंटों लग जाएँ, जहाँ चमचमाती रोशनी के बीच हजारों घर अँधेरे में डूबे रहने को मजबूर हैं, जहाँ पीने के लिए पानी नहीं है, जहाँ बच्चों बुजुर्गों के लिए कोई पार्क नहीं है, जहाँ कोई सरकारी अस्पताल नहीं, जहाँ गरीब की कोई आवाज़ नहीं, अगर है तो सिर्फ मनमानी और अव्यवस्था। क्या ऐसी भयंकर स्थिती देश के किसी कोने में है या किसी नेक्स्लाईट एरिया में जहाँ आज भी बुनियादी सुविधाएँ नहीं पहुंच पायी हैं।

नहीं, ऐसी स्थिति देश की राजधानी दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र की है। ऐसा नहीं है कि केवल बुराड़ी क्षेत्र ही पिछड़ा हुआ है बल्कि दिल्ली में कई ऐसे क्षेत्र है जहाँ रहने वालों की दशा बहुत दयनीय है। परन्तु यहाँ का निवासी होने की वजह से बुराड़ी क्षेत्र से ज्यादा परिचित हूँ। कुछ महीनो पहले जब लीड इंडिया की टीम ने बुराड़ी क्षेत्र का सर्वे किया तो कई ऐसे बुजुर्ग और महिलाएं मिली जो गंभीर बीमारी के शिकार है, उनके घरों के ऊपर से हाई वोल्टेज बिजली के तार गुजर रहे है लेकिन उनके घरों में बिजली नहीं है, बच्चे पढ़ नहीं पाते, महिलाएं काम नहीं कर पातीं क्योंकि बिजली विभाग की मनमानी है और उनकी आवाज़ उठाने का कोई माध्यम नहीं है।

हमारे सर्वे में स्कूल जाने वाली कई बच्चियों और महिलाओं ने कहा इस क्षेत्र की मुख्य सड़कें शाम के वक़्त अँधेरे में डूब जाती क्योंकि सड़कों पर लाईट की व्यवस्था नहीं है जिससे उन्हें शाम के वक्त घर से बाहर जाने में असुरक्षा महसूस होती है। आखिर इस चीज की शिकायत किससे करें, जनप्रतिनिधि बिजली विभाग पर टाल देते हैं, थाना कुछ कर नहीं सकता, इसलिये कोई और रास्ता है नहीं, है सिवाय चुप रहने के। तब खटकता है काश कोई अखबार होता जो इन मुद्दों को उठाता। 

हमें ऐसे कई मुद्दे मिले जहाँ आम आदमी या तो घुट घुट कर संघर्ष कर रहा है या अपनी हार मानकर खामोश है। इसलिये लीड इंडिया टीम ने अपने संरक्षक व मार्गदर्शक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को साक्षी मानकर अपने वीकली एडिशन की शुरुआत बुराड़ी विधान सभा से करने का निश्चय किया है ताकि अब किसी की आवाज़ इस क्षेत्र में न दबे, ताकि इस क्षेत्र में भ्रष्टाचार या मनमानी को रेड कारपेट के नीचे न दबाया जा सके, ताकि आम आदमी के लिए आये हक के पैसे व अवसर को किसी खास को ना पहुंचाया जा सके।

क्योंकि अब लीड इंडिया जरुर बोलेगा और डंके की चोट पर बोलेगा। इसलिए हम कहते है देश दुनिया की खबरें बाद में पहले आप हमारी प्राथमिकता होंगे।

परन्तु कुछ वास्तविकता से भी आपको रूबरू करना जरुरी है। अखबार सशक्त रूप से चले और हमेशा निष्पक्ष रहे, किसी के साथ सांठगांठ न करे, किसी के रहमो करम पर आश्रित ना हो, अखबार सच को सामने लाने से डरे नहीं और किसी भी बाहुबल के आगे झुके नहीं, तभी जाकर ऐसा अखबार आपकी सशक्त आवाज़ बन सकता है और उसमें आपकी सहभागिता बहुत जरूरी है।

परंतु यह होगा कैसे? किसी भी अखबार का मुख्य आय का स्रोत विज्ञापन होता है लेकिन लीड इंडिया ने विज्ञापन की परवाह किये बगैर एक ऐसी जगह से इस एडिशन की शुरूआत की है जो इंडस्ट्रियल एरिया नहीं है। जहाँ विज्ञापन मिलने की कम सम्भावना है। इसलिए इस अखबार को भगवान भरोसे न छोड़ें बल्कि इसे अपना अखबार समझें, अपनी आवाज़ समझे जो किसी के आगे झुके नहीं, दबे नहीं। यदि इस अखबार का आप ज्यादा से ज्यादा वार्षिक सब्सक्रिप्शन करें अथवा खरीद कर पढ़ें तो अखबार की निर्भरता विज्ञापन पर कम होगी। आप से यह भी आग्रह है कि आप हमारी गलतियों के लिये आलोचना करें, अच्छाई के लिये प्रशंसा भी अवश्य करें। 

अंत में आपसे कहना चाहूँगा कि लीड इंडिया की टीम ने यह सपना देखा है कि बुराड़ी का यह लीड इंडिया एडिशन केवल अखबार ना हो बल्कि बुराड़ी के लिए एक विजन हो जिसका मकसद बुराड़ी को श्रेष्ठ विधानसभा में तब्दील करना है, वैसे ही जैसे किसी के प्रयास से कोइ गाँव अत्यंत आधुनिक बन जाता है, और किसी मैट्रिक पास अन्ना की वजह से कोइ गाँव रालेगण सिद्धी बन जाता है। 

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