नई दिल्ली :भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रांची में खेले जा रहे टेस्‍ट मैच के दोनों दिन ऐसी घटनाएं हुईं कि दर्शक और खिलाड़ी अपनी हंसी नहीं रोक पाए।

मैच के पहले दिन उस समय नाटकीय क्षण आए थे जब टीम इंडिया के विकेटकीपर ऋद्धिमान साहा ने ऑस्‍ट्रेलिया के कप्‍तान स्‍टीव स्मिथ के खिलाफ अजीबोगरीब अपील की थी।

यह पूरी घटना इस तरह से हुई थी कि विकेट पर मौजूद दोनों बल्‍लेबाज, टीम इंडिया के खिलाड़ी तो ठीक अम्‍पायर भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए थे।

 मैच के दूसरे दिन ऐसी घटना तब सामने आई जब उमेश यादव की गेंद पर ऑस्‍ट्रेलियाई बल्‍लेबाज ग्‍लेन मैक्‍सवेल का बल्‍ला दो हिस्‍सों में टूट गया।

अपनी तेज गेंदबाजी के इस 'कमाल' को देखकर ने बाजू उठाकर अपनी ताकत का अहसास विपक्षी बल्‍लेबाज को करा दिया।

हालांकि पहली ही गेंद पर बल्‍ला टूटने के बाद भी मैक्‍सवेल के बल्‍ले का कहर जारी रहा और उन्‍होंने शतकीय पारी (104 रन )खेलकर ऑस्‍ट्रेलिया का स्‍कोर 450 रन के पार पहुंचाने में कप्‍तान स्मिथ के साथ अहम योगदान दिया।

स्मिथ ने मैच में नाबाद 178 रन बनाए। टीम इंडिया ने शुक्रवार को पहले दिन के स्‍कोर चार विकेट पर 299 रन से आगे खेलना प्रारंभ किया। 

मैच के दूसरे दिन की शुरुआत टीम इंडिया के तेज गेंदबाज उमेश यादव ने धमाकेदार अंदाज में की और पहली ही गेंद पर ग्लेन मैक्सवेल का बल्ला दो हिस्सों में तोड़ दिया।

 यादव की इस गेंद पर मैक्‍सवेल कुछ देर को ठगे से रह गए। आधा बल्‍ला हाथ में लिए उन्‍हें यह सोचने में कुछ वक्‍त लगा कि आखिर हुआ क्‍या है।

यादव भी इस मौके पर मजाक करने से नहीं चूके। उन्‍होंने अपना हाथ उठाकर अपनी ताकत का अहसास करा दिया। मैक्‍सवेल और टीम इंडिया के सहयोगी भी बाद में इस मौके का मजा लेते नजर आए।

यह वाकया जिस समय हुआ उस समय मैक्‍सवेल 82 रन पर नाबाद थे।दूसरे दिन ही एक मौके पर उमेश यादव गेंद फेंकने के तुरंत पहले संतुलन नहीं बना पाए और गिर गए।

 

नई दिल्ली(17 मार्च):  उत्तर प्रदेश का भाजपा विधायक दल का नेता चुनने के लिए पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक 18 मार्च को होनी है।

 

बैठक में पार्टी महासचिव एवं राज्यसभा सदस्य भूपेन्द्र यादव और केन्द्रीय पर्यवेक्षक के रूप में पार्टी के वरिष्ठ नेता और शहरी विकास मंत्री के. वेंकैया नायडु मौजूद रहेंगे। और इसके साथ ही शपथग्रहण समारोह 19 मार्च को होना है ।

 

इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सहित बड़ी संख्या में देश के प्रमुख नेता एवं गणमान्य लोग भी रहेंगे।

 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम पर अभी सस्पेंस बरकरार है लेकिन सूत्रों के अनुसार गृहमंत्री राजनाथ सिंह और रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा में से कोई एक ही मुख्यमंत्री चुने जाने वाले हैं ।

 

नई दिल्ली: दिल्‍ली के एक उबर ड्राइवर की सोशल मीडिया पर आजकल काफी चर्चा है। अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें  दिल्‍ली में तो बहुत से उबर ड्राइवर हैं क्‍या खास है?

 

दरअसल ये उबर ड्राइवर एक महिला है। जिनका नाम है शन्‍नो बेगम। शन्‍नो बेगम दिल्‍ली में उबर टैक्‍सी सर्विस की पहली महिला ड्राइवर हैं। शन्‍नो ज्‍यादा पढ़ी-लिखी नहीं हैं, इसलिए अपने पति की मौत के बाद उन्‍होंने ड्राइवरी सीखी  थी इसे अपना पेशा बनाया।

शन्नो बेगम  के तीन बच्‍चे हैं। शन्नो बेगम  का कहना है की जब उन्‍होंने इसे पेशे के तौर पर अपनाया तो उन्‍हें काफी सवालों का सामना करना पड़ रहा था । पर उन्होंने अपने बच्‍चों के पालन-पोषण के लिए वही किया जो उन्‍हें सही लगा।

 

असल जिंदगी में है काफी मददगार

शन्‍नो बताती कहना हैं कि आजाद फाउंडेशन नाम के एक एनजीओ ने उनकी काफी मदद की। उनकी मदद से शन्‍नो ने ड्राइविंग भी सीखी। उन्‍होंने पहले दो साल मेहनत करके 10वीं पास की और फिर ड्राइविंग में करियर बनाया।

 

शन्‍नो की कहानी कराती है कठिनाइयों से रूबरू

पति के गुजरने के बाद उन्होंने सबसे पहले सब्‍जी बेचने का काम किया पर जो आमदनी होती थी उससे बच्‍चों को पालना मुश्किल होने लगा। फिर वो एक अस्‍पताल में काम करने लगी लेकिन वहां से भी आमदनी इतनी नहीं हुई कि वे बच्‍चों को पढ़ा सकें तो उसने घरों में खाना पकाने का काम शुरू किया। जिससे से वे 6 हजार रुपए प्रतिमाह कमा लेती थीं लेकिन यह भी उनके लिए काफी नहीं था।

“लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिएशन” (लीपा) के अध्यक्ष सुभाष सिंह ने मीडिया की विश्वसनीयत पर हो रहे हमलों की घोर निन्दा करते हुए कहा है कि मीडिया की छवि को ध्वस्त करने का काम बड़े सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय मीडिया, क्षेत्रिय मीडिया, टीवी मीडिया एवं वेब मीडिया से इन सुनियोजित हमलों के खिलाफ एकजुट होने की अपील की।

 उन्होंने कहा कि भारत में मीडिया को निशाना बनाने का एक नया चलन शुरू हुआ है। मीडिया पर सीधा प्रहार किया जा रहा है। पत्रकार का काम है जनता के लिये सवाल पूछना। सवालों से बचने के लिये पत्रकारिता को खरीदने और उसके मुंह पर लगाम लगाने के प्रयास नई बात नहीं है। लेकिन वर्तमान में यह नया प्रयोग हो रहा है। मीडिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगाने का प्रयोग।

 हाल ही में आसाराम की प्रवक्ता नीलम दुबे ने टीवी पत्रकार दीपक चौरसिया को दलाल पत्रकार कह दिया और एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा के नेता कैलाश विजयवर्गीय ने संयम खोते हुए टाइम्स नाऊ के टीवी एंकर व एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी को पत्रकारिता की हैसियत समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि तुम्हारी हैसियत नहीं कि मेरे पांच वोट भी काट सको। ये मीडिया की छवि पर सीधा हमला है।

 कुछ लोगों की रणनीति है कि जब मीडिया कोई मामला उठाये तो उसे गम्भीरता से लिया ही ना जाये। कॉर्पोरेट और पॉलीटिशियन वर्ग के कुछ लोग चाहते हैं कि जनता का विश्वास मीडिया से उठ जाये। क्योंकि मीडिया ही ऐसा माध्यम है जहां जनता की आवाज को बल मिलता है।

 मीडिया घोटालों को उजागर करने का काम शुरू से ही करता आ रहा है बीते कुछ समय से मीडिया ने भ्रष्टाचार के खिलाफ काफी मुखर प्रतिक्रिया दी है। 2जी, कोयला, कॉमनवेल्थ जैसे जल,थल और नभ में हुए बड़े घोटाले मीडिया की बदौलत ही उजागर हुये।

 श्री सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया पर भी अभिव्यक्ति के नाम पर पत्रकारों को दलाल साबित करने की कोशिश की जा रही है। दीपक चौरसिया हों या अर्णब गोस्वामी हर पत्रकार की अलग-अलग शैली होती है जिसमें वो जनता के लिये सवाल पूछता है उसका मकसद अपने हित को साधना नहीं होता।

 श्री सुभाष सिंह ने कहा कि कभी राजदीप सरदेसाई, कभी आशुतोष, कभी ओम थानवी के खिलाफ सीधे अभद्र शब्दों का प्रयोग किया जाता है कभी पत्रकारों पर जानलेवा हमले होते हैं। उत्तर प्रदेश में हाल ही में कल्पतरू अखबार के पत्रकार पर जानलेवा हमला हुआ।

 17 जुलाई को मध्य प्रदेश के उमेरिया में माईनिंग माफिया के खिलाफ लगातार खबर छापने के लिये पत्रकार चन्द्रिका राय की उनके परिवार समेत हत्या कर दी गई। उन्होंने राष्ट्रीय मीडिया, क्षेत्रिय मीडिया, टीवी मीडिया से इन हमलों के खिलाफ एक मंच पर आने का आह्वान किया।

 सुभाष सिंह ने कहा कि सरकार से मांग करते हुए कहा कि “लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिएशन” चाहती है कि सरकार मीडिया कर्मियों की सुरक्षा के लिये कड़े कानून बनाये। अगर कोई भी मीडिया को उसका उत्तरदायित्व को निभाने से रोकता है या उसे कमजोर करने का प्रयास करता है तो उनके खिलाफ इस तरह कार्यवाई के प्रावधान होने चाहिये जैसे आईपीसी में सरकारी कामकाज में बाधा उत्पन्न करने वालो के खिलाफ होता है।

 श्री सुभाष सिंह ‘लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिएशन’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ’लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिएशन’ (लीपा) मीडिया के हित में काम करने वाली ऐसी संस्था है जो अपनी विश्वसनीयता के लिए प्रसिद्ध है। देश भर के 2200 मीडिया संस्थान सदस्य के रूप में जुड़े है। यह संस्था मूलतः क्षेत्रीय अखबारों का प्रतिनिधित्व करती है।

Thursday, 16 February 2017 09:00

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दिल्ली: दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र के कौशिक एंक्लेव मे हिन्दू बस्ती के मात्र 10 मीटर की दूरी पर कब्रिस्तान के लिये जमीन प्रस्तावित होने से स्थानीय लोगों में रोष है । रेसीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, ब्लॉक-ए, बुराड़ी, इन्द्रप्रस्थ कालॉनी जनकल्यांण समिति (रजि) ने घनी हिन्दू आबादी वाले इस क्षेत्र में कब्रिस्तान होने पर विरोध जताया है। वेलफेयर एसोसिएशन्स की बैठक में स्थानीय निवासियों ने हिन्दू बस्ती के बीचोबीच कब्रिस्तान बनने पर चिंता व्यक्त की। गौरतलब है कि कब्रिस्तान के लिये प्रस्तावित जमीन के पास पहले से ही घनी हिन्दू आबादी वाली कालॉनी स्थित हैं जिनमें इन्द्रप्रस्थ कॉलॉनी (ब्लॉक A,B,C, ), इन्द्रप्रस्थ कॉलॉनी पार्ट-1, अमृत विहार कॉलॉनी, कौशिक एंक्लेव, सूरत विहार, गुरू नानकदेव शामिल कॉलोनी हैं।

इन क्षेत्रों की सभी वेलफेयर एसोसिएशन्स का कहना है कि ए ब्लॉक कौशिक एंक्लेव में प्रस्तावित कब्रिस्तान बेहद गलत है। इसके कारण यहां पर आवागम और बहुत सी असुविधा होगी उनके मुताबिक इस क्षेत्र में 3 किलोमीटर के दायरे में पहले से ही 5 कब्रिस्तान स्थापित हैं। इनमें सुलेमान माजरा (बुराड़ी गांव), मुकरबा चौक, लिवासपुर, केवल पार्क (आजदपुर), वजीराबाद (जगतपुर) में पहले से ही 5 कब्रिस्तान शामिल हैं।

स्थानीय निवासियों ने कब्रिस्तान के होने पर घोर विरोध जताते हुए कहा कि कब्रिस्तान के लिये प्रस्तावित जमीन से मात्र 100 मीटर की दूरी पर ब्यॉज़ सीनियर सेकेंड्री स्कूल कार्यशील है तथा उस प्रस्तावित कब्रिस्तान स्थल से 150 मीटर दूर गर्ल्स सीनियर सेकेंड्री स्कूल प्रस्तावित है।

गौरतलब है कि घनी आबादी वाले कौशिक एंक्लेव ब्लॉ-ए से मात्र 10 मीटर की दूरी पर कब्रिस्तान के लिये जमीन प्रस्तावित की गई है। यही पर पार्क भी है जहां बड़ी संख्या में बुजुर्ग और बच्चे आते हैं। ऐसे में आबादी के बीचोबीच कब्रिस्तान से बालको के मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।  इसके अलावा यहां काठिया बाबा का आश्रम है, छठ घाट है।

निवासियों ने प्रस्तावित कब्रिस्ता के स्थानांतरण के लिये मांग करते हुए कहा कि हम मुस्लिम भाइयों की धार्मिक रीति का सम्मान करते हुए चाहते हैं कि उन्हे सम्मान के साथ कहीं और जमीन दी जाये।

 

स्थानीय निवासियों ने घोर विरोध के मुख्य कारण यह हैं-

1- किलोमीटर के क्षेत्र में पहले से ही हैं 5 कब्रिस्तान (इनमें सुलेमान माजरा (बुराड़ी गांव), मुकरबा चौक, लिवासपुर, केवल पार्क (आजदपुर), वजीराबाद (जगतपुर) शामिल हैं।

2- प्रस्तावित कब्रिस्तान की जमीन के पास घना हिन्दू आबादी क्षेत्र है जिसमें इन्द्रप्रस्थ कॉलॉनी (ब्लॉक A,B,C, ), इन्द्रप्रस्थ कॉलॉनी पार्ट-1, अमृत विहार कॉलॉनी, कौशिक एंक्लेव, सूरत विहार, गुरू नानकदेव शामिल कॉलोनी शामिल हैं।

3- प्रस्तावित कब्रिस्तान से मात्र 100 मीटर की दूरी पर ब्यॉज़ सीनियर सेकेंड्री स्कूल चल रहा है।

4- प्रस्तावित कब्रिस्तान से मात्र 150 मीटर की दूरी पर गर्ल्स सीनियर सेकेंड्री स्कूल प्रस्तावित है।

5- प्रस्तावित कब्रिस्तान से मात्र 10 मीटर की दूरी पर कौशिक एंक्लेव स्थित है जिसमें काफी संख्या में हिन्दू आबादी रहती है।

6- 100 मीटर की दूरी पर काठिया बाबा का प्रसिद्ध आश्रम है जहां, साल में दो बार संत समागम होता है जिसमे देश ही नहीं विदेश से भी संत महात्मा सम्मिलित होते हैं।

7- 100 मीटर की दूरी पर छठ घाट है जहां पर हिन्दुओं का पवित्र त्योहार मनाया जाता है।

 

8- इसी क्षेत्र में भारत के प्रसिद्ध 10 गुरूद्वारों में से एक गुरूद्वारा भी स्थापित है जहां सिख समुदाय से वर्ष भर तीर्थाटन के लिये आते हैं।

9- निकट ही पार्क है जहां बुजुर्ग और बच्चे आते हैं, इस कब्रिस्तान के होने से उनका मानसिक विकास हतोत्साहित होगा।

हमारा देश तो 15 अगस्त 1947 को ही फिरंगियों से आज़ाद हो गया था लेकिन हम मासूम जनता को क्या पता था की “घर का भेदी लंका ढाए” वाली कहावत हम लोगो पर भी दोहराई जा सकती है |एक ओर जहाँ हम 15 अगस्त यानी भारत की आज़ादी की खुशियाँ मनाते है तिरंगे को शान से फहराते है, तोपों की सलामी देते है और भारत माता की जय बोल कर अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते है वही दूसरी ओर तिरंगे को जलाया जाता है सैनिकों पर पत्थर बरसाये जाते है और भारत मुर्दाबाद , भारत तेरे टुकड़े होंगे इन्शा-अल्लाह इन्शा-अल्लाह और न जाने क्या -क्या नारे लगाये जाते है |लेकिन मजाल की देश के सत्ता -आशिन कुछ कर जाएँ इन आस्तीन के सांपो पर |

अगर सही कहा जाए तो आज हमारा देश पूरी तरह से आतंकवाद , उग्रवाद , नक्सलवाद और सबके पितामाह नेतावाद (राजनीति ) में सुलग रहा है |आप सोच रहे होंगे की मैं ये क्या बोल रहा हूँ ? लेकिन ये सत्य है आए दिन देश में ऐसी -ऐसी घटना घट जाती है जिस से आप अनभिग नहीं होंगे |हरियाणा की ही एक घटना को ले लीजिये जिसमे एक लड़की से तीन साल पहले रेप किया जाता है और फिर तीन साल बाद उसी लड़की से वही रेपिस्ट रेप करता है कितनी दुखद और अविस्वास्निय घटना है !

हरियाणा ही क्यों आप भारत के किसी भी राज्य को ले लीजिये जहाँ आए दिन भयावह और दिल को दहला देने वाली घटना न घटती हों ! क्या हमारे देश में शासन नहीं है , प्रशासन नहीं है , कानून नहीं है ? सब कुछ है तो क्यों घटती हैं घटना ?

क्योकि इस के पीछे भी कारण है आज – कल सभी बिकाऊ हो गये है आप कितना भी जघन्य अपराध कर के क्यों न आये हो टेबल के नीचे से प्रशाद बढ़ा दीजिये और घर पे मज़े लिजिए | इसे छोड़िये ये तो अब आम बात हो गई है लेकिन अब तो सीधे जड़ पे ही वार किया जाता है जिसे देश का भविष्य कहा जाता है अब तो उसे भी नहीं छोड़ा जाता उसकी जिन्दगी से भी खिलवाड़ किया जाने लगा हैं |

आज एक ओर शिक्षा और एक ओर इस शिक्षा को पाकर देश को उन्नती की राह पर ले जाने वाले दोनों का संबंध-विच्छेद किया जा रहा है वह भी उनके हाथों जिसे हमारे यहाँ भगवान् से भी ऊँचा दर्जा दिया गया है अगर कुम्हार घड़ा बनाने में ही छल करना शुरु कर दे , तो क्या कुम्हार द्वारा बनाए गए घड़े से हम काम ले सकते है नहीं ना ! आज बिहार की घटना को लीजिये जिस छात्रा को पोलिटिकल साइंस की स्पेलिंग नहीं आती उसे बिहार का टॉपर बना दिया जाता है यानी अब शिक्षा भी पैसों की मोहताज़ हो गया |

जहाँ एक ओर ( RTE ) राईट टू एजुकेशन है वही शिक्षा माफ़िया इस की आड़ में अपना महल खड़ा कर रहें है शिक्षा के नाम पर बड़े -बड़े ट्रस्ट और NGO खोले जाते है और ज़ाकिर नाइक , आरएसएस , ओवैसी जैसे लोग अनाप -सनाप बोल के कचरमबद्ध करवाने पे तुले हुए होते हैं |

मैं कहता हूँ क्यो हो रहे है ये सब क्योंकि जब बाप ही गलत काम करे तो बेटे ने किया तो क्या हुआ? यही बात हमारे देश पे लागु होती है क्योंकि यहाँ तो नेता ही भ्रष्ट हैं इन नेतओं का कहर तो डेंगू से भी भयावह होती है डेंगू

तो उपचार करने पर ख़त्म हो जातें है लेकिन राजनेताओ का कहर तो ऐसा बरपता है कि लोग न तो जीवित होतें हैं और न ही मृत मानो जीता -जागता , चलता -फिरता , बोलता -बैठता , कठपुतली हो जो नेताओं द्वारा नचाया जाता हो |

ये नेता रूपी कचरा जहाँ देखो वही मुंह मारने के फ़िराक में होता है न जाने कौन -कौन से घोटाले कर लेते हैं | चारा -घोटाला , 2G स्पेक्ट्रम -घोटाला , DCC – घोटाला , आय से अधिक संपत्ति रखने वाले भ्रष्टाचार रूपी बीमारी से पीड़ित है ये नेता जिसका कोई इलाज ही नहीं है डॉक्टर के पास | दुर्भाग्यवश अगर इलाज किया भी जाता है तो बीमारी और बढ़ जाती है |चिंता का विषय ये है कि ये बीमारी दिन-प्रतिदिन बढ़ ही रही है जिसका इलाज सीबीआई , एनआईए और रॉ जैसे जाँच दलों से करवाया जाता है लेकिन इसमे भी कुछ भ्रष्ट डॉक्टर होते है जिसके कारण सही रोगी का पता ही नहीं चल पाता और जो रोगी नहीं है उसका इलाज कर दिया जाता है फिर जो असली रोगी है उसकी बीमारी इतनी भयानक रूप ले लेती है की सभी इस बीमारी की चपेट में आने लगते है और फिर शुरु हो जाता है देश में भ्रष्टाचार , आतंकवाद , नक्सलवाद , उग्रवाद , भूखमरी , बेरोजगारी और न जाने क्या – क्या ?

अगर इन सब से हम छुटकारा पाना चाहते हैं तो सबसे पहले हमें इन नेताओ की चाल को समझना होगा |जो अपने स्वार्थ के लिए जनता को बहलाने का काम करते हैं और सत्ता-सीन होकर इन बीमारी को बढ़ावा देते है |

हमें इन दल -दल को ख़त्म करना होगा जो स्व-स्वार्थ के लिए जब मन हो एक नया दल बना लेते है और वादे पे वादे करते है अतः हमारे देश के नेता अगर निःस्वार्थ भाव से काम करें और लोकतंत्र की परिभाषा (जनता का जनता के लिए और जनता के द्वारा की गई शासन प्रणाली ) को फॉलो करें तो हमारा देश फिर से सोने की चिड़ियाँ और विश्व गुरु कहलाने लगेगी |

 

जय हिन्द

दिल्ली : बुराड़ी में परिवहन की बड़ी समस्या है। यहां सुबह-शाम बसों में भीड़ के कारण लोगों का बुरा हाल रहता है। क्षेत्र के लोग नौकरी और काम के लिए दूसरे क्षेत्रों में जाते हैं। उनकी परेशानी को खत्म करने और परिवहन की समस्या को दूर करने के लिए योजना तैयार कर रहे हैं। इसमें नए रूट का चयन कर उन पर नई बसों को चलाया जाएगा। यह बात बुराड़ी के विधायक संजीव झा ने कही।

उन्होंने बताया कि बुराड़ी में परिवहन की समस्या को दूर करना हमारी प्राथमिकता है। इससे पहले सड़क एक बड़ी समस्या थी। सड़क निर्माण के बाद अब ट्रांसपोर्ट की समस्या को दूर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें भलस्वा के लिए स्वरूप नगर होते हुए बस सेवा, केशवपुरम से इब्राहिमपुर तक बसों की संख्या बढ़ाना और कादीपुर तक बस सेवा शुरू करना प्राथमिकता में है। साथ ही झड़ौदा और बाबा कॉलोनी तक भी बसों की पहुंच बनाने पर काम किया जा रहा है। अभी जगतपुर से विश्वविद्यालय के लिए मेट्रो फीडर शुरू हो चुकी है। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को दूर करना हमारी प्राथमिकता है।

 

दुनिया में एक अजीब सा ट्रेंड शुरू हो चुका है, जो ना सिर्फ आने वाली पीढ़ी पर असर डाल रहा है, बल्कि हमारे इतिहास में शामिल लोगों के अस्तित्व पर भी सवाल उठा रहा है। दुनिया के जो भी फ्रीडम फाइटर्स हैं, चाहे वो भारत के महात्मा गांधी हों या फिर सोवियत यूनियन के जोसेफ स्टालिन, सभी के अस्तित्व पर, उनके फैसलों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इस फेहरिस्त में चीन के जनक माओ ज़ेदोंग भी शामिल हैं।

आज लोग इनके फैसले और मानसिकता पर सवाल उठा रहे हैं लेकिन क्या ये ज़रूरी नहीं कि इनके फैसलों पर राय बनाने से पहले उस दौर के हालात को भी समझने की कोशिश की जाए। क्यों ना ये समझने की कोशिश की जाए कि क्यों इनकी प्रतिमाएं लगाई गईं, इनके नाम से दिवस मनाए गए और क्यों इन धुरंधरों को इतिहास में ये दर्जा दिया गया। दरअसल इन तमाम कवायदों का एकमात्र मकसद आज की और आगे आने वाली पीढियों तक इन शख्सियतों की विचारधारा को पहुंचाना है, दुनिया को उनके योगदान से रूबरू कराना है।

इंसान के व्यक्तित्व में उसकी जड़ें काफी अहमियत रखती हैं, उसका इतिहास और अनुभव ही मिलकर उसका आने वाला भविष्य तय करता है। इतिहास के अनुभव आपके भविष्य के फैसलों को संवार सकते हैं। ऐसे में ऐसी शख्सियतों के योगदान पर सवाल उठाना इतिहास से बेइमानी करने जैसा है। दुनियाभर के फासिस्ट की सोच मिली-जुली सी ही है, माओ को मानने वाले जोसेफ स्टालिन का विरोध कर सकते हैं। अंबेडकर को जो मानते हैं, वो गांधी पर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन सोच पर सवाल उठाने से समस्या का समाधान मिलना मुश्किल है। आप व्यवस्था को तो हटा सकते हैं लेकिन विकल्प क्या है ? सवाल उठाना आसान होता है लेकिन समाधान देना नहीं, और इन्हीं सवालों की वजह से आजतक मिडिल ईस्ट आग में झुलस रहा है।

जो डेमोक्रेटिक सोच रखते हैं, co-existence में विश्वास रखते है, वो विकल्प की तलाश करते हैं। सवाल सम्राट अशोक और अकबर पर भी उठ चुके हैं, जो तलवार के बूते देश नहीं बल्कि अपने बूते दिल जीतने का माद्दा रखते थे, ऐसे में सिर्फ सवाल उठाना कहां तक लाजिमी है। दरअसल इतिहास की गवाही ही लक्ष्य तक पहुंचने की कुंजी बन सकती है, अगर इतिहास से सबक नहीं लिया गया तो लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। चाहे वो एक इंसान का व्यक्तित्व हो या फिर देश का भविष्य।

(लेखक ज़ी मीडिया समूह के न्यूज चैनल इंडिया 24x7 के संपादक हैं)  

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