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दुनिया में एक अजीब सा ट्रेंड शुरू हो चुका है, जो ना सिर्फ आने वाली पीढ़ी पर असर डाल रहा है, बल्कि हमारे इतिहास में शामिल लोगों के अस्तित्व पर भी सवाल उठा रहा है। दुनिया के जो भी फ्रीडम फाइटर्स हैं, चाहे वो भारत के महात्मा गांधी हों या फिर सोवियत यूनियन के जोसेफ स्टालिन, सभी के अस्तित्व पर, उनके फैसलों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इस फेहरिस्त में चीन के जनक माओ ज़ेदोंग भी शामिल हैं।

आज लोग इनके फैसले और मानसिकता पर सवाल उठा रहे हैं लेकिन क्या ये ज़रूरी नहीं कि इनके फैसलों पर राय बनाने से पहले उस दौर के हालात को भी समझने की कोशिश की जाए। क्यों ना ये समझने की कोशिश की जाए कि क्यों इनकी प्रतिमाएं लगाई गईं, इनके नाम से दिवस मनाए गए और क्यों इन धुरंधरों को इतिहास में ये दर्जा दिया गया। दरअसल इन तमाम कवायदों का एकमात्र मकसद आज की और आगे आने वाली पीढियों तक इन शख्सियतों की विचारधारा को पहुंचाना है, दुनिया को उनके योगदान से रूबरू कराना है।

इंसान के व्यक्तित्व में उसकी जड़ें काफी अहमियत रखती हैं, उसका इतिहास और अनुभव ही मिलकर उसका आने वाला भविष्य तय करता है। इतिहास के अनुभव आपके भविष्य के फैसलों को संवार सकते हैं। ऐसे में ऐसी शख्सियतों के योगदान पर सवाल उठाना इतिहास से बेइमानी करने जैसा है। दुनियाभर के फासिस्ट की सोच मिली-जुली सी ही है, माओ को मानने वाले जोसेफ स्टालिन का विरोध कर सकते हैं। अंबेडकर को जो मानते हैं, वो गांधी पर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन सोच पर सवाल उठाने से समस्या का समाधान मिलना मुश्किल है। आप व्यवस्था को तो हटा सकते हैं लेकिन विकल्प क्या है ? सवाल उठाना आसान होता है लेकिन समाधान देना नहीं, और इन्हीं सवालों की वजह से आजतक मिडिल ईस्ट आग में झुलस रहा है।

जो डेमोक्रेटिक सोच रखते हैं, co-existence में विश्वास रखते है, वो विकल्प की तलाश करते हैं। सवाल सम्राट अशोक और अकबर पर भी उठ चुके हैं, जो तलवार के बूते देश नहीं बल्कि अपने बूते दिल जीतने का माद्दा रखते थे, ऐसे में सिर्फ सवाल उठाना कहां तक लाजिमी है। दरअसल इतिहास की गवाही ही लक्ष्य तक पहुंचने की कुंजी बन सकती है, अगर इतिहास से सबक नहीं लिया गया तो लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। चाहे वो एक इंसान का व्यक्तित्व हो या फिर देश का भविष्य।

(लेखक ज़ी मीडिया समूह के न्यूज चैनल इंडिया 24x7 के संपादक हैं)  

पेशावर: पाकिस्तान के  पेशावर में चूहे के काटने से एक शिशु की मौत के बाद.

प्रशासन ने चूहों का आतंक खत्म करने के लिए एक चूहे को मारने पर 25 रूपए का इनाम देने की घोषणा की.

सरकार ने तय किया है कि इस समस्या से निजात पाने के लिए आम लोगों को शामिल किया जाए.

 और हर चूहे को मारने पर प्रोत्साहन के तौर पर 25 रूपए दिए जाएं.

शहर का पानी एवं सफाई सेवा विभाग चार कस्बों में कुछ ऐसे केंद्र स्थापित करेगा जहां मारे गए.

 चूहे इकट्ठा किये जाएंगे और उन्हें मारने वालों को इनाम दिया जाएगा.

चूहे मारने वालों को उनकी इनाम राशि देने में मदद पहुंचाने के लिए मोबाइल सेवाएं भी शुरू की जाएंगी.

घर घर चूहों को मारने वाली दवा वितरित की जाएगी.

पेशावर के जिला नाजिम मुहम्मद आसिम ने बड़े चूहों के आतंक से निबटने के उपायों.

पर चर्चा करने के लिए एक बैठक बुलायी थी. ये बड़े चूहे न केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा करते हैं बल्कि.  लोगों पर हमला कर और उन्हें काटकर नुकसान पहुंचाते हैं. ये बड़े चूहे 22-30 सेंटीमीटर तक के हैं.

दिल्ली: बुराड़ी गांव की वर्तमान समस्याओं पर धूल की मोटी परत जमा हो गई है। यही वजह है कि गांव के लोगों को शिक्षा, चिकित्सा, सड़क, गंदगी व जलभराव जैसी बुनियादी समस्याओं से वर्षो से जूझना पड़ रहा है। समस्याओं का समाधान न होने पर लोगों ने गत नगर निगम चुनाव में जनप्रतिनिधि भी बदल डाले। इसके बावजूद हालत नहीं बदले हैं।

जलभराव है सबसे बड़ी समस्या

जलभराव यहां की सबसे बड़ी समस्या है। हल्की बारिश में भी बुराड़ी मुख्य मार्ग पर कौशिक एंक्लेव के पास इतना पानी जमा हो जाता है कि वाहनों का चलना मुश्किल हो जाता है। यह सड़क पहले नगर निगम के अधीन थी, अब लोक निर्माण विभाग के जिम्मे है। हाल में ही सड़क के किनारे बड़े नाले का निर्माण भी कराया गया है, लेकिन नाला जाम होने से जलभराव की समस्या पैदा हो जाती है। केवल मुख्य सड़क पर ही नहीं, निगम के अधीन गांव की भीतर की सड़कों पर भी जलभराव की समस्या रहती है। गांव में जल निकासी का प्रबंध वर्षो से नहीं है।

भूत बंगला बना बारात घर

बुराड़ी में पांच साल पूर्व सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण विभाग ने बारात घर का निर्माण कराया था, लेकिन अब तक इसका इस्तेमाल नहीं हो सका है। सामाजिक समारोहों के आयोजन के लिए बारात घर की बुकिंग के लिए किस विभाग या अधिकारी के पास अर्जी लगाएं, यहां के लोगों को यह भी पता नहीं है। दरअसल, निर्माण होने के बाद अब तक बारात घर की देखरेख की जिम्मेवारी किसी विभाग को नहीं सौंपी गई है। यही कारण है कि यह बारात घर भूत बंगला में तब्दील हो चुका है। इसके हॉल, कमरों व शौचालयों में गंदगी के अंबार देखे जा सकते हैं तो चोर लोहे के बने दरवाजे व खिड़की तक उखाड़ ले गए हैं। इसमें अब आवारा जानवर डेरा जमाए रहते हैं।

सफाई व्यवस्था लचर

गांव की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से लचर है। सफाईकर्मियों की बड़ी संख्या होने के बाद भी गांव की गलियों की नियमित रूप से सफाई नहीं होती है। ऐसे में जगह-जगह कूड़ों के ढेर देखे जा सकते हैं।

बुराड़ी का सुन्दर विहार इलाका कुछ समय पहले बिहारी कॉलोनी के नाम से जाना जाता था। कुछ सक्रीय लोगों के कारण आज इस बिहारी कॉलोनी में न सिर्फ एक सक्रीय RWA है बल्कि इसका नाम भी सुन्दर विहार के नाम से दर्ज है।

अधिकांश डीटीसी बसों के आखिरी स्टॉप नत्थूपुरा से करीब पांच किमी की दूरी पर स्थित सुन्दर विहार में न कोई ऑटो चलता है न फटफटिया न ही कोई ग्रामीण सेवा है। यहां आने के लिए अपने निजी वाहन की सख्त जरूरत होती है नहीं तो पैदल ही 5 से 7 किमी का सफर तय करना पड़ता है। यहां के निवासी मुखयतः छतीसगढ़, झारखण्ड आदि राज्यों से आए हुए हैं। वैसे तो इन्हें आए हुए 15 साल से ज़्यादा हो गए हैं लेकिन इनके पहचान पत्र अभी कुछ समय पहले बनकर तैयार हुए हैं।

यहां अधिकांश लोग बुराड़ी गांव के स्थानीय लोगों की ज़मीनों पर काम करके अपनी गुजर बसर करते हैं। यहां फूलों की खेती की जाती है। सुन्दर विहार के अधिकांश हिस्से में अभी भी खाली खेती योग्य ज़मीन है। यहां के निवासी बताते हैं कि वह लोग खेती के लिए ही दिल्ली आए थे। यहां कुल मिलाकर 35 से 40 परिवार रहते हैं जिन्होंने आपस में मिलकर एक आरडब्ल्यूए का गठन किया हुआ है।

इस आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष सुरेन्द्र गुंसाई बताते हैं, "शिक्षा के अभाव में दिल्ली में होते हुए भी यह क्षेत्र पिछड़ता जा रहा है। इसे संभालने के लिए ही हम लोग सक्रिय कदम उठा रहे हैं। नेता वोट मांगने तो इस क्षेत्र में पहुंच जाते हैं लेकिन विकास कार्य यहां अभी तक नहीं हुए। आज भी यहां के लोग खेती में प्रयोग होने वाले बोरिंग के पानी पीने को मजबूर हैं।"

सुरेन्द्र आगे बताते हैं, "यहां के बच्चे पहले स्कूल जाने से घबराते थे क्योंकि नज़दीकी प्राइमरी स्कूल यहां से 5 किमी की दूरी पर है और आने जाने के लिए कोई साधन नहीं हैं। छोटे-छोटे पांच साल से 10 साल तक के बच्चों के लिए 5 किमी चलकर जाना एक मुश्किल काम है। अब क्षेत्र के कुछ पढ़े लिखे नौजवान यहां के बच्चों को पढ़ाने के लिए आगे आए हैं।"

यहां की मुख्य समस्या ट्रांसपोर्ट है, साथ ही शिक्षा, बेसिक चीजों का आभाव जैसी बहुत सी चीजों के लिए यहां के लोग समय-समय पर अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं।

लोगों का कहना है कि यहां पानी की समस्या के बारे में स्थानीय नेताओं से जिक्र किया था तो एक दिन के लिए दिल्ली जल बोर्ड का टैंकर भी यहां लाया गया था लेकिन अब दोबारा वही हाल है।

सुरेन्द्र गुंसाई बताते हैं, "आरडब्ल्यूए का मकसद इस कॉलोनी को दिल्ली की अन्य कॉलोनियों की तरह बनाना है। यहां भी नजदीक में कम से कम ऑटो स्टॉप होना चाहिए जहां ग्रामीण सेवा, आरटीवी या इलेक्ट्रिक रिक्शा चलता हो। बाकी बुराड़ी के अन्य क्षेत्रों की तरह यहां भी मेडिकल पुरानी समस्या है। आसपास में सिर्फ एक पाली क्लीनिक है जिसके लिए भी करीब 15 किमी जाना पड़ता है।"

जैसलमेर: जैसलमेर जिले में एक थाना ऐसा भी है जहां 23 वर्ष में महज 55 मुकदमे दर्ज हुए हैं.

 और जहां पुलिस कर्मियों के पास कोई काम ही नहीं है. कई बार पूरे साल में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं होता.

इस थाने को 23 साल तक हेड कांस्टेबल ही संभालता रहा और अब जा कर इस थाने को थानेदार मिला है.

शाहगढ़ का यह थाना जैसलमेर में पाकिस्तान सीमा से सटा है, जहां 23 वर्ष में महज 55 मुकदमे दर्ज हुए हैं.

 और सबसे बड़ी बात ये है कि इसमें एक भी मुकदमा रेप का नहीं है.

ये खूबी इस थाने को दूसरे थानों से अलग करता है.

थाना वीरान मरुस्थल क्षेत्र में है, जहां आसपास कोई आदमी मुश्किल से ही नजर आता है.

पुलिसकर्मियों का कहना है कि जब वह गश्त पर निकलते हैं, तब इक्का-दुक्का लोग मिलते हैं.

 अब पहली बार थाने की कमान सब इंस्पेक्टर को सौंपी गई है.

पुलिस सूत्रों के अनुसार, साल 1993 में सीमा पार से तस्करी रोकने के लिए शाहगढ़ थाना खोला गया था.

 तारबंदी के बाद तस्करी पर लगाम भी लगी. सीमावर्ती क्षेत्र के इस थाने पर 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का जिम्मा है.

 इस थाने के अन्तर्गत दो पंचायतों की 10 हजार की आबादी आती है.

वर्ष 2016 में अब तक कोई मामला नहीं दर्ज हुआ. 2015 में सिर्फ दो मामले दर्ज हुए, वे भी सड़क दुर्घटना के.

वर्ष 2014 में तीन मामले दर्ज हुए, एक मारपीट का, दूसरा चोरी का और तीसरा सड़क दुर्घटना का.

राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कपिल गर्ग ने बताया .

कि थाने में बिजली सौर ऊर्जा से मिलती है और पानी बाहर से लाया जाता है.

उन्होंने बताया कि कभी साल भर मुकदमा दर्ज न हो लेकिन अंत में अगर एक मुकदमा दर्ज हो जाए.

 और उसका निस्तारण न हो तो भी वर्ष के अंत में पेंडेंसी का प्रतिशत 100 आता है.

पुलिस उपाधीक्षक नरेन्द्र कुमार दवे ने थाने में 23 साल बाद नियुक्ति होने पर कहा,

‘एएसआई स्तर का अधिकारी थाने का प्रभारी रहा है. थाने में दर्ज होने वाले मामले,

इन्स्पेक्टर स्तर के अधिकारी की उपलब्धता और कार्य सम्पादन के आधार पर इन्स्पेक्टर की नियुक्ति की जाती है.’

बुराड़ी :रेप पीड़िता की पहचान सार्वजनिक, स्वाती मालीवाल के खिलाफ FIR दर्जबुराड़ी रेप पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने के मामले में मालीवाल के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर ली है। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालीवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बुराड़ी रेप पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने के मामले में मालीवाल के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर ली है।

 

बुराड़ी की रहने वाली 14 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता ने रविवार को शालीमार बाग स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में दम तोड़ दिया। लगातार हालत बिगड़ने पर दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के निर्देश पर 1 जुलाई को उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

 

पड़ोस वाली महिला बोली छत पर तुम्हारी बहन के साथ हो रहा है रेप...और फिर

इस घटना से क्षुब्ध डीसीडब्ल्यू प्रमुख ने केंद्र और दिल्ली पुलिस पर महिला सुरक्षा के मुद्दे पर जमकर भड़ास निकाली। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने ट्विटर पर लिखा, 'दिल्ली को और कितने निर्भया की जरूरत है? हम अगले निर्भया के मरने का इंतजार करते रहते हैं।' उन्होंने कहा, 'लड़की को जबरन जहरीला पदार्थ खिलाया गया जिससे उसके अंदरूनी अंग पूरी तरह खराब हो गए और उसकी काफी दर्दनाक स्थिति में मौत हो गई।' उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा डीसीपी (उत्तर) को नोटिस जारी करने के बाद खुलेआम घूम रहे आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

मालीवाल ने ट्वीट कर कहा, '14-वर्षीय पीड़ित के अभिभावकों के साथ हूं जो काफी गरीब और शोकाकुल हैं। दिल्ली और कितने निर्भया चाहती है? हम सब अगली निर्भया की मौत का इंतजार करते रहते हैं।' उन्होंने कहा, 'गृह मंत्रालय ने महिला सुरक्षा विशेष कार्यबल को दिल्ली में भंग कर जख्म पर और नमक छिड़क दिया।'

 

सौतेले पिता ने कहा मुंबई में है बेटी, लेकिन सच कुछ और ही था

 

किशोरी को पिलाया गया तेजाब

 किशोरी के परिजनों ने आरोपी शिव शंकर (21) पर शीतल पेय में तेजाब या अन्य घातक रसायन मिलाकर पिलाने का आरोप लगाया है। पीड़ित किशोरी बुराड़ी में माता-पिता व छोटे भाई के साथ रहती थी। उसके पड़ोस में दुष्कर्म का आरोपी शिव शंकर भी रहता है जिससे उसकी दोस्ती हो गई थी।

 पिछले साल 21 दिसंबर को वह शिव शंकर के साथ घर से गायब हो गई थी। 2 दिन तक दोनों साथ रहे थे। उसी दौरान शिव शंकर ने उसके साथ दुष्कर्म किया। 24 दिसंबर को घर लौटने पर पिता ने जब किशोरी से पूछताछ की तो उसने बताया कि जब वह घर आने के लिए स्कूल से निकली थी तभी वहां शिव शंकर आ गया। उसने कहा कि तुम्हारे पिता का एक्सीडेंट हो गया है, जल्दी अस्पताल चलो। रास्ते में उसने रुमाल सुंघाया जिससे वह बेहोश हो गई। जब होश आया तो उसने खुद को किसी कमरे में बंद पाया। इसके बाद परिजनों ने बुराड़ी थाने में शिव शंकर के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज करवा दिया।

 

केंद्र से DCW अध्यक्ष का तीखा सवाल, 'आपको और कितने निर्भया कांड चाहिए?

 27 दिसंबर को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, लेकिन पुलिस ने जब तीस हजारी कोर्ट में किशोरी का बयान कराया तो वह अपने पुराने बयान से पलट गई। उसने कहा कि उसके साथ कोई गलत काम नहीं हुआ है और वह अपनी मर्जी से शिव शंकर के साथ गई थी।

 किशोरी के बयान के बाद आरोपी को जमानत मिल गई थी। हालांकि पुलिस ने तीन महीने बाद इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी। पुलिस का कहना है कि गत 16 मई को मामले में आरोप तय होना था, लेकिन इससे एक दिन पहले किशोरी फिर शिव शंकर के साथ घर से भाग गई। 10 दिन बाद जब वह घर लौटी तब परिजनों ने उसे घर ले जाने से इन्कार कर दिया। किशोरी ने भी घर जाने से मना कर दिया तब पुलिस ने उसे निर्मल छाया में रखवा दिया था।

 

नई दिल्ली(16 फरवरी):आमतौर पर लोग यही मानते हैं कि आईआईटी के छात्र पढने के अलावा और कुछ काम नहीं करते। लेकिन आपकी इस सोच को आईआईटी रुड़की के 4 छात्र कुछ हद तक बदल सकते हैं। 

आईआईटी रुड़की के 4 लड़कों का डांस वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है,

जिसे देखकर उनके बारे में आप भी अपनी सोच बदल देंगे।

वैलेंटाइन डे पर अपलोड किए गए इस वीडियो में 4 लड़के हॉलीवुड सिंगर एड शीरन के लेटेस्ट सॉग 'शेप ऑफ यू' पर डांस कर लड़की को इंप्रेस करने की कोशिश कर रहे हैं। इस गाने को लड़कों ने खुद ही कोरियोग्रॉफ करके डांस किया है। चारों लड़के सिंगल हैं और अपने लिए लड़की को इंप्रेस करने की कोशिश कर रहे हैं।

चारों लड़के एक ही लड़की को इंप्रेस करना चाहते हैं। इस डांस वीडियो को अंकुश राउत डायरेक्ट किया है। 13 फरवरी को इस वीडियो को यूट्यूब म्यूजिक चैनल Cinesec IITR के अकाउंट से अपलोड किया गया है, जिसके बाद अब तक 76000 ने अधिक लोग इसे देख चुके हैं।

 

 

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में एक और शर्मसार करने वाली घटना घटी है। एक शख्स दिल्ली के बुराड़ी में सरेआम लोगों के बीच एक लड़की को चाकू से लगातार गोद रहा है… सारे लोग देख रहे हैं, लेकिन सभी तमाशबीन बने हैं। हमलावर को कई रोक नहीं रहा है और युवक तब तक लड़की पर वार करता है जबतक उसकी जान नहीं ले लेता। मृतक लड़की की उम्र 22 साल बताई जा रही है।

32 साल के सुरेंद्र नाम के इस आरोपी युवक ने करुणा नाम की इस लड़की पर चाकू से 25 से ज्यादा वार किए। घटना सुबह की है, वहीं जिस युवक पर हत्या का आरोप है वो लड़की की जान पहचान का बताया जा रहा है।

घटना में घायल लड़की को आईएसबीटी ट्रामा सेंटर ले जया गया जहां उसकी मौत हो गई। वहीं सरेआम इस वारदात को अंजाम देने वाले युवक को लोगों ने पकड़कर जमकर पीटा और बाद में उसे पुलिस के हवाले कर दिया। फिलहाल पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

 

नई दिल्ली(16 फरवरी):आमतौर पर लोग यही मानते हैं

कि आईआईटी के छात्र पढने के अलावा और कुछ काम नहीं करते।

लेकिन आपकी इस सोच को आईआईटी रुड़की के 4 छात्र कुछ हद तक बदल सकते हैं। 

आईआईटी रुड़की के 4 लड़कों का डांस वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है,

 जिसे देखकर उनके बारे में आप भी अपनी सोच बदल देंगे।

वैलेंटाइन डे पर अपलोड किए गए इस वीडियो में 4 लड़के हॉलीवुड सिंगर एड शीरन के लेटेस्ट सॉग 'शेप ऑफ यू'

पर डांस कर लड़की को इंप्रेस करने की कोशिश कर रहे हैं।

 इस गाने को लड़कों ने खुद ही कोरियोग्रॉफ करके डांस किया है। चारों लड़के सिंगल हैं।

और अपने लिए लड़की को इंप्रेस करने की कोशिश कर रहे हैं।

चारों लड़के एक ही लड़की को इंप्रेस करना चाहते हैं। इस डांस वीडियो को अंकुश राउत डायरेक्ट किया है।

 13 फरवरी को इस वीडियो को यूट्यूब म्यूजिक चैनल Cinesec IITR के अकाउंट से अपलोड किया गया है,

 जिसके बाद अब तक 76000 ने अधिक लोग इसे देख चुके हैं।

ये दास्तान बिहार के छोटे से गांव मकहर की है. करीब 68 साल पहले एक खेतीहर मजदूर रामजीत राम मांझी भी इसी गांव में रहा करते थे.

मुसहर जाति से संबंध रखने वाले रामजीत मांझी की जिंदगी भी उसके मुसहर समाज से जुदा नहीं थी.

मिट्टी की दीवारों से बनी घास फूस के छप्पर वाली रामजीत की ऐसी ही कोठऱी सुअरों के लिए निवास स्थान का काम भी करती थी.

दरअसल बिहार के मगध इलाके में मुसहर समुदाय की जिंदगी इस कदर बदहाल रही है कि जिसकी कल्पना भी आपके रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है.

खलिहान में मजदूरी करने वाले इस मुसहरों को भुइया कह कर भी पुकारा जाता है.

लेकिन चूहों को उनके बिल से पकड़ कर उनका मांस खाने की वजह से इस समाज का नाम मुसहर पड़ा है.

शराब और ताड़ी की दुर्गंध से महकते ऐसी ही मुसहर टोली में करीब 68 साल पहले एक बंधुआ मजदूर के घर एक बच्चे का जन्म हुआ था.

खेतों में बंधुआ मजदूरी करने वाला वह बच्चा वक्त को जीत कर आज बन गया है.

मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी. लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने जब से पद संभाला है वह अपने बयानों को लेकर अक्सर विवादों में घिरते रहे हैं.

 जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बने सात महीने गुजर चुके हैं लेकिन इन सात महीनों में वो अपने काम की बजाए अपने बयानों को लेकर ज्यादा चर्चा में रहे हैं.

जीतन राम मांझी के ऐसे बयान जहां आए दिन नए विवाद खड़े करते रहे हैं वहीं दूसरी तरफ उनकी और उनके समुदाय की दर्दभऱी कहानी भी बयान करते रहे हैं.

 चूहा मारके खाना खराब बात है क्या..

 बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि झोला छाप डॉ और औझा के चक्कर में न पड़कर डॉक्टर के पास जाओ..हॉस्पिटल में कोई दिक्कत है डॉक्टर नहीं है.

दवा नहीं है उसकी सूचना जिलाधिकारी को दो. नहीं तो सिर्फ एक लेटर लिख दो मुख्यमंत्री के नाम पर जिस डॉक्टर का नाम लिखोगे उसे हम सजा देंगे.

हमने कई लोगों को घर बैठाया है.सजा दी है. जीतन मांझी गरीबों के साथ है. हाथ कटा देंगे.

 पिछले कुछ दिनों से अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की जद में अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आ चुके है.

बुधवार को नरेंद्र मोदी के संसंदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे मांझी ने मोदी के स्वच्छ भारत अभियान पर जम कर कटाक्ष किया.

 अपने विवादित बयानों को लेकर जीतन राम मांझी को विपक्षी दल ही नहीं अपनी ही पार्टी जेडीयू में भी विरोध का सामना करना पड़ा है.

लेकिन वो ना तो रुकने को तैयार है और ना ही किसी के आगे झुकने के लिए तैयार है.

 मुख्यमंत्री ने कहा कि मांझी टूट जाएगा झकेगा नहीं. दरअसल पिछले लोकसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड का बिहार में प्रदर्शन बेहद खराब रहा था.

उसे सिर्फ दो ही लोकसभा सीटें जीतने में कामयाबी मिली थी. जेडीयू की इस हार की जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.

था लेकिन सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए उन्होंने अपने सबसे विश्वस्त और करीबी रहे जीतन राम मांझी को बिहार का मुख्यमंत्री बनवा दिया था.

 जीतन राम मांझी मई 2014 में बिहार के मुख्यमंत्री बनाए गए थे.

लेकिन एक मुख्यमंत्री के तौर पर वह अपने काम से ज्यादा अपने बयानों को लेकर ज्यादा चर्चा में रहे हैं.

जीतन राम मांझी अपने विवादित बयानों की वजह से कई बार नीतीश कुमार के लिए भी मुसीबत बनते नजर आए हैं.

और यही वजह है कि विपक्षी दल ही नहीं बल्कि खुद उनकी पार्टी जेडीयू में भी मांझी के खिलाफ विरोध की तलवारें खिंचती रही हैं.

 जीतन राम मांझी ने कहा कि भ्रष्टाचार बहुत बढ़ गया है नीतीश कुमार ने काम किया लेकिन करप्शन दूर नही हुआ. शरद यादव ने कहा कि वह खुद भी जिम्मेदार है.

 वह खुद मंत्रीमंडल में थे तो उनकी जिम्मेदारी बराबर की है उनको उस समय इस बात को कैबिनेट के भीतर उठाना चाहिए था.

मैं सोचता हूं कि ये मर्यादा के भीतर की बात नहीं है.

 मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि अगर आप हमे विशेष राज्य का दर्जा दे देते है तो जीतन मांझी आपका(मोदी) समर्थक हो जाएगा.

 विवादित बयानों पर जेडीयू विधायक ने कहा कि पागल है. उसको सीएम बनाकर गलती कर दी. जबसे बना है कैसे बयान देता है.

बयान का जनता पर कुछ असर नही होता है लोग बोलते है पागल है इसे जल्दी से हटा दो.

 जेडीयू की तरफ से अस्थायी इंतजाम के तौर पर मुख्यमंत्री बनाए गए.

मांझी की बयानबाजी को दरअसल उनकी खास रणनीति और राजनीतिक महत्वकांक्षा के तौर पर देखा जा रहा है. माना जा रहा है.

कि जीतन राम मांझी अपने बयानों से ना सिर्फ विवाद खड़ा करना चाहते हैं बल्कि उन विवादों को हवा देना भी चाहते हैं.

ताकि बिहार में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में इसका राजनीतिक लाभ उठाया सके.

 जीतन राम मांझी के विवादित बयानों को लेकर राजनीति के जानकार ये भी वजह मानते है.

कि वह एक कमजोर मुख्यमंत्री की छवि से बाहर निकलना चाहते है और साथ ही अपनी पार्टी जेडीयू के लिए आने वाले वक्त में भी एक मजबूरी बने रहना चाहते हैं.

 राजनीतिक विश्लेषक अरविंद मोहन ने कहा कि  कुलमिलाकर उनके बयान उनकी राजनीति को पीते गए है.

वो खुद को मजबूत करना चाहते है जितना वो कमजोर होकर सीएम बने है वह स्थिति हटाना चाहते है.

वह एक मजबूरी बनाना चाहते है कि कल को नितीश कुमार और लालू एक पार्टी में आते है तो वही कनसेस बनके रहे.

दो तीन तरह की राजनीति है एक तो यही कि इन दोनों के बीच कोई कॉमन आदमी आना चाहिए. जो वह खुद बनना चाहते हैं.

दोनो आपस में एक-दूसरे को नेता माने न माने वह खुद नेता बन जाना चाहते है. तीसरा टॉरगेट भी लोग बोल रहे हैं.

लेकिन मुझे भरोसा नहीं हो रहा है कि अगर वह वोट को अपने साथ कर पाते है तो कलको बीजेपी में कोई अच्छा सौदा करके वह उस तरफ भी जा सकते हैं.

 आखिर कौन है जीतन राम मांझी और क्यों लगातार विवाद पैदा करने वाले बयान दे रहे हैं. मांझी के बयानों के पीछे छिपे असल मकसद क्या है.

 साफ है कि मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी पहले बयान देते हैं और जब उनके बयान पर हंगामा खड़ा होता है तो वह फौरन ही उस पर अपनी सफाई भी पेश कर देते हैं.

मुख्यमंत्री मांझी की क्या है ये बयाननीति? क्या इसमें छुपी है चुनाव से जुड़ी कोई रणनीति.

मांझी के इस चुनावी गणित की गहराई में भी हम उतरेंगे लेकिन पहले कहानी उस मुसहर समुदाय की जिससे मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की जड़े जुड़ी हुई हैं.

 बिहार के मगध इलाके में मुसहरों की एक बस्ती हैं. जाहिर है मुसहर समुदाय आज भी अभिशप्त जिंदगी जीने को मजबूर है.

कुछ गज जमीन पर बने जर्जर मकान और गंदगी के बीच सांसे लेती जिंदगी दशकों से मुसहर समुदाय का नसीब रही है.

सितुहा, घोंघा और चूहे पकड़ कर जिंदगी की नैया खेते –खेते थक हार चुका मुसहर समुदाय आज भी समाज के हाशिये पर खड़ा है.

खास बात ये है कि मुसहरों की जिंदगी की बात सुअर, शराब और ताड़ी के बिना अधूरी ही रहती है क्योंकि ये तीनों ही चीजें इनकी जिंदगी में खास अहमियत रखते हैं.

गंदगी में रहने और पलने वाले ये सुअर ही मुसहर समुदाय के लिए विपत्ति के वक्त सबसे बड़ा आर्थिक सहारा बनते हैं.

खेतों में मजदूरी करके पेट पालने वाले मुसहर समुदाय के लिए चूहे भी जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा रहे हैं.

और यही वजह है कि चूहों को पकड़ने औऱ उनके बिलों से अनाज निकालने में मुसहरों को महारत हासिल है.

 राजनीतिक विश्लेषक अरविंद मोहन ने कहा कि  एक बिल में से कम से कम 8-10 चूहे निकलते है. और अलग-2 रास्ता बनाते है.

तो ये लोग एक तरफ बंद करके खुदाई करते है उसमे भी इनको अन्दाजा हो जाता है कि किसमे वो रहते हैं किसमें अनाज है.

तो अगर 15 चूहे मिल गए तो उस दिन का खाना हो गया. और 15 चूहे वाला बिल मिल गए तो 15-20-30 किलो गेहूं का इन्तजाम हो गया.

तो फिर खेद को खोदना ज्यादा हो जाता है काफी गहराई तक जाता है . 5-6-8 फीट तक जाता है. ये चीजें बहुत कॉमन है.

जैसे अनाज कटता है वैसे ही ये लोग लग जाते है. बच्चे खोदने में साथ दे रहे है. 2-3-4 आदमी का ग्रुप होता है.

 

 

 

नई दिल्ली: बहुत से लोग बच्चों से पूछते होंगे कि बड़े होकर क्या बनोगे। इसके बाद आप उनके जवाब का इंतजार करते होंगे। किसी का सपना डॉक्टर, किसी का इंजीनियर तो किसी का पायलट बनने का होता है। लेकिन इन सबके के बीच एक साल की बच्ची ने गूगल में काम करने की इच्छा जताई है।

इंग्लैंड की रहने वाली क्लोइ ने गूगल के बॉस सुंदर पिचाई को लेटर लिख बताया है कि वह क्यों गूगल में काम करना चाहती हैं। हाथ से लिखे लेटर में क्लोइ ने बताया कि उन्हें कंप्यूटर चलाना आता है और वह ऐसी जगह पर काम करना चाहती है जहां बैठने के लिए बीन बैग्स होते हैं और गो-कार्ट (इलेक्ट्रिक गाड़ी) भी। क्यूट बात यह है कि सुंदर पिचाई ने क्लोइ को जवाब भी भेजा।

मेरा नाम क्लोइ है और जब में बड़ी हो जाउंगी तो मैं गूगल में जॉब चाहती हूं। मैं चॉकलेट फैक्टरी और ओलिंपिक में तैराकी भी करना चाहती हूं। मेरे पापा ने बताया कि गूगल में, मैं बीन बैग्स में बैठ सकती हूं और इलेक्ट्रिक गाड़ी में घूम सकती हूं। मुझे कंप्यूटर पसंद है मेरे पास एक टैबलेट भी है। मेरे पापा ने मुझे एक गेम दिया है जिसमें मुझे रोबॉट चलाना होता है। पापा ने कहा कि वह मुझे कंप्यूटर भी देंगे। मैं 7 साल की हूं और मेरे टीचर्स ने ममा से कहा है कि मैं पढ़ने में अच्छी हूं। पापा कहते हैं कि अगर मैं पढ़ने में अच्छी रही तो मुझे एक दिन गूगल में जॉब मिल सकती है। मेरा लेटर पढ़ने के लिए थैंक्यू। मैंने केवल एक बार ही लेटर भेजा है वह भी पापा को क्रिसमस पर।

गुड बाय

क्लोइ ब्रिजवॉटर

 

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