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Saturday, 21 March 2015 09:00

सबको सम्मति दे भगवान

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यह सही है कि लफ्जों में इतनी ताकत होती है कि किसी पुरानी डायरी के पन्नों पर कुछ समय पहले चली हुई कलम आज कोई तूफान लाने की क्षमता रखती है लेकिन किसी डायरी के खाली पन्ने भी आँधियाँ ला सकते हैं ऐसा शायद पहली बार हो रहा है।

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के 2017 के वो कैलेंडर और डायरी आज देश भर में चर्चा में हैं जिनके बारे में तो अधिकतर भारतीयों को शायद इससे पहले पता भी न हो। 

कारण है गाँधी जी की जगह मोदी की तस्वीर।

पूरा देश गाँधी प्रेम में उबल रहा है कि गाँधी की जगह कोई नहीं ले सकता,केवल चरखे के पीछे बैठकर फोटो खिंचाने से कोई गाँधी नहीं बन सकता आदि आदि।

सही भी है आखिर गाँधी जी इस देश के राष्ट्रपिता हैं और पूरा देश उनसे बहुत प्यार करता है और उनकी इज्जत करता है।

लेकिन गाँधी जी को सही मायनों में हममें से कितनों ने समझा है?

गाँधी जी कहते थे कि सबसे महत्वपूर्ण लड़ाई भय और असुरक्षा जैसे तत्वों पर विजय पाना है।

आज जो लोग गाँधी जी के नाम को रो रहे हैं इनमें से कितनों ने अपने भय या असुरक्षा की भावना पर विजय हासिल की है?

यह असुरक्षा की भावना नहीं तो क्या है कि एक तरफ आप चिल्ला रहे हैं कि गांधी की जगह कोई नहीं ले सकता और दूसरी तरफ इसे बेमतलब मुद्दा भी बना रहे हैं! क्योंकि आप केवल इन शब्दों को 'कह' रहे हैं, इनके सहारे जनमानस को बहकाने की असफल कोशिश कर रहे हैं। अगर आप अपने कहे शब्दों को 'समझते' तो इस बात को मुद्दा नहीं बनाते क्योंकि यह तो अटल सत्य है ही कि गाँधी जी की जगह कोई नहीं ले सकता।

गाँधी जी ही हमारे गाँधी हैं और रहेंगे ।

लेकिन जो असली भावना आपको डरा रही है वो यह है कि आप ही की गलतियों के कारण आज मोदी भी उस मुकाम पर पँहुच गए हैं कि कोई उनकी जगह भी नहीं ले सकता।विपक्ष तो क्या सरकार या फिर खुद उनकी ही पार्टी में भी उनकी जगह लेने वाला कोई नहीं है कम से कम आज तो नहीं।

गाँधी जी को आज जो रो रहे हैं और कह रहे हैं कि गाँधी को खादी से और खादी को गाँधी से कोई अलग नहीं कर सकता उन्होंने इतने साल गाँधी के लिए या फिर खादी के लिए क्या किया।

दरअसल वो गाँधी को नहीं उस नाम को रो रहे हैं जिस नाम को उन्होंने अपने कापी राइट से अधिक कभी कुछ नहीं समझा।

इतने सालों गाँधी जी के लिए कुछ किया गया तो यह कि देश भर में लगभग 64 सरकारी स्कीमें उनके नाम पर खोली गईं , 24 खेलों के टूर्नामेंट और ट्रोफी उनके नाम पर रखे गये,15 स्कालरशिप उनके नाम पर दी गई,

19 स्टेडियम उनके नाम पर खोले गए,39 अस्पतालों का नाम उनके नाम पर रखा गया,74 बिल्डिंग और सड़कों के नाम उनके नाम पर रखे गए,5 एयरपोर्ट का नाम उनके नाम पर रखा गया आदि आदि लिस्ट बहुत लम्बी है।

इसके अलावा 2 अक्तूबर को बापू की समाधि पर फूल चढ़ाकर उनके प्रिय भजनों का आयोजन और दूरदर्शन पर 'गाँधी' फ़िल्म का प्रसारण। बस कर लिया बापू को याद!

क्या यहीं तक सीमित है हमारा 'बापू प्रेम '?

हमारे राष्ट्र पिता के प्रति इतनी ही है हमारी भक्ति ?

यही सच्ची श्रद्धा है जिसके हकदार हैं हमारे बापू ?

तो फिर वो क्या है जब देश का प्रधानमंत्री जिसके नाम के साथ गाँधी तो नहीं लगा लेकिन आजादी के 70 साल बाद जब देश की बागडोर अपने हाथों में लेता है तो गाँधी जी के सपने को यथार्थ में बदलने के उद्देश्य से 'स्वच्छ भारत ' अभियान की शुरुआत करता है और उसका प्रतीक चिह्न गाँधी जी के चश्मे को रखता है?

वो क्या है जब यही प्रधानमंत्री गाँधी जी की 150 वीं जयन्ति के अवसर पर 2019 तक पूरे देश को खुले में शौच से मुक्त करने का बीड़ा उठाता है?

यहाँ इस प्रश्न पर तो बात ही नहीं की जा रही कि इतने सालों जिस 'गाँधीवादी' पार्टी का शासन था उसने इस दिशा में क्या कदम उठाए या फिर आजादी के इतने सालों बाद भी किसी  प्रधानमंत्री को इस मूलभूत स्तर पर काम क्यों करना पड़ रहा है।वो क्या है जब प्रधानमंत्री 'मन की बात ' में देशवासियों से 'गाँधी की खादी' अपनाने का आह्वान करते हैं तो खादी की बिक्री में 125% की बढोत्तरी दर्ज होती है (इंडिया टुडे की रिपोर्ट) ।

वो क्या है जब मोदी नारा देते हैं  "खादी फार नेशन , खादी फार फैशन " ?

वो क्या है जब प्रधानमंत्री खादी के उन्नयन के लिए पंजाब में 500 महिलाओं को चरखा बाँटने वाले आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बनते हैं?

गाँधी जी अपने बाथरूम की सफाई खुद ही करते थे तो आज जो गाँधी के नाम पर विलाप कर रहे हैं उनमें से कितने उनका अनुसरण करते हैं?

और वो क्या है जब इस देश का प्रधानमंत्री उनका अनुसरण करते हुए न सिर्फ खुद हाथ में झाड़ू पकड़ कर सफाई अभियान की शुरुआत करते हैं बल्कि पूरे देश को प्रेरित करते हैं?

लेकिन यह अजीब सी बात है कि जब प्रधानमंत्री के हाथों में झाड़ू होता है तो कोई सवाल नहीं करता लेकिन उन्हीं हाथों में चरखा आ जाता है तो मुद्दा बन जाता है?

आपको इस तथ्य से कोई फर्क नहीं पड़ता कि खादी की बिक्री जो कि कांग्रेस के शासन काल के 50 सालों में 2 से 7% थी   पिछले दो वर्षों में बढ़कर 34% तक पहुँच गई।

आपको इस बात से भी फर्क नहीं पड़ता कि इससे पहले भी 6 बार जब बापू इस कैलेंडर में नहीं थे वो भी आप ही के शासन काल में 

1996,2002,2005,2011,2012,2013, में तब आपने इसे मुद्दा नहीं बनाया था तो आपके लिए गाँधी जी की ही प्रिय प्रार्थना 'आप सबको सम्मति दे भगवान ' 

गाँधी जी केवल चरखा और खादी तक सीमित नहीं हैं वो एक विचारधारा हैं जीवन जीने की शैली हैं नैतिकता सच्चाई दृढ़ संकल्प और अदम्य साहस के साथ साथ अहिंसा के प्रतीक हैं। वे व्यक्ति नहीं अपने आप में एक संस्था हैं।

इससे बड़ी बात क्या होगी कि वे केवल भारत में नहीं अपितु पूरे विश्व में अहिंसा के पुजारी के रूप में पूजे जाते हैं। जब भारत के गाँधी पर अमेरिका के जान ब्रिले  फिल्म लिखते हैं और रिचर्ड एटनबोरो निर्देशित करते हैं तो वे गाँधी को हमसे छीनते नहीं हैं बल्कि सम्पूर्ण विश्व को उनके व्यक्तित्व एवं विचारधारा से अवगत कराते हैं, उनकी सीमाएं भारत को लाँघ जाती हैं। 

तो जो लोग आज कैलेंडर की तस्वीर पर बवाल मचा रहे हैं वे अपनी असुरक्षा की भावना से बाहर निकल कर समझें कि गाँधी जी इतने छोटे नहीं कि किसी तस्वीर के पीछे छिपाए जांए।

डॉ नीलम महेंद्र

 

इस्लामाबाद: जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद ने पाकिस्तान सरकार से कहा है कि उसका नाम उस सूची से तत्काल हटाया जाए जो देश से बाहर जाने को लेकर उस पर प्रतिबंध लगाती है। उसने दावा किया कि उससे न तो सुरक्षा को कोई खतरा है और न ही उसका संगठन आतंकवादी गतिविधियों में कभी शामिल रहा है।

वर्ष 2008 में हुए मुंबई आतंकवादी हमले के मास्टरमाइंड ने गृहमंत्री चौधरी निसार अली खान को लिखे पत्र में कहा, ‘‘38 लोगों को सूची में डालने वाले 30 जनवरी 2017 को जारी ज्ञापन पत्र को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।’’ मुंबई में हुए आतंकवादी हमले में 166 लोगों की मौत हो गई थी।

सरकार ने सईद एवं जमात उद दावा के 37 अन्य नेताओं और उसकी फलाह ए इंसानियत चैरिटी को पिछले महीने ‘एग्जिट कंट्रोल लिस्ट’ में डाल दिया था।

शांति एवं सुरक्षा के लिए ‘हानिकारक’ गतिविधियों में शामिल होने के संबंध में सईद और संगठन के चार अन्य नेताओं को 90 दिनों के लिए ‘नजरबंद’ कर दिया गया है। इसके अलावा गृह मंत्रालय ने जमात उद दावा और एफआईएफ को छह महीने के लिए ‘‘निगरानी-सूची’’ में डाल दिया था।

लेकिन सईद ने सरकार के निर्णय का विरोध करते हुए कहा, ‘‘जमात उद दावा संगठन पाकिस्तान में किसी आतंकवादी गतिविधि में कभी शामिल नहीं रहा और संगठन पर आतंकवाद या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने संबंधी किसी घटना का कभी आरोप नहीं लगा।’’ उसने तर्क दिया कि संघीय या प्रांतीय सरकारों ने किसी अदालत में उसके खिलाफ कभी कोई सामग्री पेश नहीं की।

उसने वर्ष 2009 में उसके खिलाफ एक मामले में लाहौर उच्च न्यायालय की एक पूर्ण पीठ की टिप्पणी का हवाला दिया ।अदालत ने कहा था, ‘‘मौजूदा मामले में सरकार के पास इस बात का कोई सबूत नहीं है कि याचिकाकर्ता से पाकिस्तान की सुरक्षा को कोई खतरा है और केवल संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के आधार पर किसी की स्वतंत्रता में अवरोध पैदा नहीं किया जा सकता।

वाशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जानते हैं कि रूस के साथ ‘बेहतर संबंध’ अमेरिका के हित में है और इसलिए वह पूर्ववर्ती प्रशासन से इतर रूस के साथ मित्रवत संबंध चाहते हैं जबकि ओबामा प्रशासन इस तरह के प्रयास में नाकाम रहा था।

व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव सीन स्पाइसर ने कल संवाददाताओं से कहा, ‘मुझे लगता है राष्ट्रपति की उस इच्छा में थोड़ा अंतर है कि वह यह समझते हैं कि रूस के साथ बेहतर संबंध समूची दुनिया में आईएसआईएस और आतंकवाद के खात्मे में हमारी मदद कर सकता है। ओबामा प्रशासन ने रूस के साथ संबंध सुधारने की कोशिश तो की, लेकिन वो नाकाम रहे।’स्पाइसर ने कहा, ‘उन्होंने रूस को बताने की कोशिश की कि क्रीमिया पर आक्रमण नहीं करें, लेकिन नाकाम रहे। मौजूदा राष्ट्रपति यह समझते हैं कि सहज संबंध अमेरिका के राष्ट्रीय और आर्थिक हित में है। अगर पुतिन और रूस के साथ उनके बेहतर रिश्ते हैं तो यह अच्छा है और अगर ऐसा नहीं होता है तो वह इस दिशा में आगे बढ़ेंगे।’ उन्होंने कहा कि लेकिन वह सिर्फ ये बात मानने को तैयार नहीं हैं कि अतीत में ऐसा होना संभव नहीं था।

स्पाइसर ने दृढ़ता से इस बात का खंडन किया कि ट्रम्प रूस को लेकर नरम हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने यह स्पष्ट किया है कि उन्हें उम्मीद है कि रूस सरकार यूक्रेन में हिंसा कम करेगी और क्रीमिया को वापस लौटायेगी। उन्होंने कहा, ‘दूसरी ओर उन्हें इस बात की भी पूरी उम्मीद है और वह पूर्ववर्ती प्रशासन के विपरीत रूस के साथ बेहतर संबंध चाहते हैं ताकि आईएसआईएस और आतंकवाद जैसी दुनिया की ऐसी कई समस्याओं का मिलकर समाधान किया जा सके।’ बहरहाल, विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने रूस पर कथित रूप से नरम रवैये को लेकर ट्रम्प की आलोचना की है।

बीजिंग: चीन के पश्चिमी शिनजियांग क्षेत्र में तीन संदिग्ध उईगुर आतंकवादियों ने पांच लोगों की चाकू घोंपकर हत्या कर दी और बाद में पुलिस ने इन हमलावरों को मार गिराया। इस मुस्लिम बहुल अशांत प्रांत में हुआ यह सबसे ताजा ‘आतंकी हमला’ है।

यह हमला बीती शाम पिशान प्रांत में हुआ था। हमले में 10 लोग जख्मी हो गये थे जिनमें से पांच को अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया। हांगकांग स्थित ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ ने खबर दी है कि पुलिस ने तीनों हमलावरों को गोली मार दी। अधिकारियों ने इस घटना को ‘आतंकी हमला’ करार दिया। इस हमले के बाद देश में उच्चतम स्तर का सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया। सरकार ने संदिग्धों और पीड़ितों की पहचान नहीं बताई है, लेकिन कुछ निवासियों ने कहा कि हमलावर उईगुर थे। चीन में सड़कों पर 10 से 20 मीटर की दूरी पर सशस्त्र पुलिस बल गश्त लगा रहे हैं।

पाकिस्तान के कब्जे वाला पाकिस्तान (पीओके) और अफगानिस्तान की सीमा से लगता शिनजियांग कई वर्ष से उईगुर प्रदर्शनों के चलते अशांत रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों से बड़े पैमाने पर हान चीनीयों की बस्तियों के खिलाफ उईगुर प्रदर्शन होते रहे हैं। क्षेत्र में होने वाले हमलों के लिये चीन ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ईटीआईएम) से उईगुर अलगाववादियों पर आरोप लगाता है। क्षेत्र में तुर्क मूल के उईगुर मुस्लिमों की एक करोड़ से अधिक की आबादी है। बीते दिसंबर में चार चाकूधारी व्यक्तियों ने दक्षिण शिनजियांग के होतान प्रांत स्थित कम्युनिस्ट पार्टी कार्यालय पर विस्फोट कर हमला किया था। हमले में चार हमलावर भी मारे गये थे।

पेशावर: पाकिस्तान के अशांत उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में हुए दो आत्मघाती हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए।

पहला हमला मोहमंद कबायली क्षेत्र में हुआ जहां दो आत्मघाती हमलावरों ने एक सरकारी परिसर को निशाना बनाया। इस हमले में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई जिनमें चार सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने कहा कि आत्मघाती हमलावरों ने गालनाई में सरकारी परिवार को निशाना बनाया। एक ने खुद को उड़ा लिया और दूसरे को सुरक्षा बलों ने मार गिराया। मीडिया की खबरों के अनुसार पाकिस्तानी तालिबान के धड़े जमात-उल-अहरार ने हमले की जिम्मेदारी ली है।

दूसरा हमला पेशावर के हयाताबाद इलाके में हुआ जहां मोटरसाइकिल सवार आत्मघाती हमलावर ने सरकारी वाहन में टक्कर मार दी। आत्मघाती हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई। यह विस्फोट ऐसे समय में हुआ जब प्रतिष्ठित अखबार ‘डॉन’ की खबर के मुताबिक हायताबाद चिकित्सा परिसर में बाह्य रोगी विभाग के उद्घाटन के लिए प्रांतीय सरकार के अधिकारियों को हिस्सा लेना था। इस कार्यक्रम में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के अध्यक्ष इमरान खान और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के हिस्सा लेने की संभावना थी।

वॉशिंगटन: अमेरिका के एक वरिष्ठ सीनेटर ने उम्मीद जताई है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप H1B वीजा योजना को कमजोर नहीं करेंगे। इस वीजा योजना से सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम करने वाले भारतीयों के हित जुड़े हुए हैं।

सीनेट की वित्त समिति के प्रमुख सीनेटर ओरियन हैच ने कहा कि ट्रंप के साथ कई मुलाकातों में उन्होंने  H1B वीजा कार्यक्रम को जारी रखने और इसका विस्तार करने के आर्थिक फायदों के बारे में चर्चा की। हैच ने मीडिया टेक्नोलॉजी कंपनी ‘मॉर्निंग कंसल्ट’ से कहा कि ट्रंप के साथ मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति ने उनको आश्वस्त किया कि वह H1B वीजा को लेकर व्यावहारिक रूख अपनाएंगे।

उन्होंने कहा, ‘इससे नौकरियां पैदा होती हैं, अर्थव्यवस्था आगे की ओर बढ़ती है। मेरा मानना है कि राष्ट्रपति राजनीतिक भावनाओं को अलग रख सकते हैं।’

 

लाहौर : पाकिस्तान के एक न्यायाधीश ने कहा कि भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह की हत्या के बहुचर्चित मामले में ‘बहुत कम’ प्रगति हुई है। न्यायाधीश ने अदालत के साथ सहयोग न करने के लिए पुलिस को फटकार लगाई और जेल के एक अधिकारी को गिरफ्तार करने के आदेश भी दिए। लाहौर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कल लाहौर पुलिस प्रमुख को आदेश दिया कि वह कोट लखपत जेल के उपाधीक्षक की 17 फरवरी को अदालत में पेशी सुनिश्चित करें।

लाहौर में कोट लखपत सेंट्रल जेल में करीब चार साल पहले सरबजीत की हत्या कर दी गई थी। न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में ‘बहुत कम’ प्रगति हुई है। सुनवाई के दौरान न्यायधीश ने अदालत के साथ सहयोग नहीं करने को लेकर जेल प्राधिकारियों को फटकार लगाई और बार बार समन जारी किए जाने के बावजूद अदालत में पेश नहीं होने वाले उप अधीक्षक को जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

मौत की सजा काट रहे दो कैदी आमिर तंबा और मुदस्सर ने मई 2013 में कोट लखपत जेल में सरबजीत पर कथित तौर पर हमला करके उसकी हत्या कर दी थी। लाहौर उच्च न्यायालय के एक सदस्यीय न्यायिक आयोग के न्यायाधीश मजहर अली अकबर नकवी ने सत्र अदालत में मामला शुरू होने से पहले सरबजीत हत्या मामले की जांच की थी।

नकवी ने मामले में 40 गवाहों के बयान दर्ज किए थे और इसकी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। इसे अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। एक सदस्यीय न्यायिक आयोग ने विदेश मंत्रालय के जरिए सरबजीत के रिश्तेदारों को भी नोटिस जारी किया है ताकि उनके बयान दर्ज किए जा सकें और अगर उनके पास हत्या से संबंधित कोई सबूत है तो उन्हें भी पेश किया जा सकें। अधिकारियों ने बताया कि बहरहाल सरबजीत के परिवार ने अपने बयान दर्ज नहीं करवाए। आयोग को दिए अपने बयान में आमिर और मुदस्सर ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए कहा था कि वह सरबजीत की हत्या करके लाहौर और फैसलाबाद बम विस्फोटों में मारे गए लोगों की हत्या का बदला लेना चाहते थे।

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश लाहौर की अदालत में आमिर और मुदस्सर दोनों ही हत्‍या मामले में दोषी पाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी।

बीजिंग: चीन के आधिकारिक मीडिया ने ‘ताइवान कार्ड’ खेलने को लेकर भारत को आगाह करते हुए कहा कि इस संवेदनशील मुद्दे पर बीजिंग को चुनौती देने का नयी दिल्ली को खामियाजा भुगतना पड़ेगा। ताइवान के महिला सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के भारत दौरे के बाद मीडिया ने नयी दिल्ली को आगाह किया है।

सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स में ‘नयी दिल्ली को ताइवान कार्ड खेलने का खामियाजा भुगतना पड़ेगा’ शीर्षक से प्रकाशित एक आलेख में कहा है, ‘ताइवान के मुद्दे पर चीन को चुनौती देकर भारत आग के साथ खेल रहा है।’ अखबार में प्रकाशित आलेख में कहा गया है, ‘ऐसे समय में जब अमेरिका के नये राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान के मुद्दे पर चीन को चुनौती नहीं देकर ‘एक चीन’ की नीति पर सहमत होने और इसका सम्मान करने का फैसला किया है, भारत ने मुश्किल खड़ी की है।’

ताइवान के सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के संदर्भ में आलेख में सवाल उठाया गया है। इसमें कहा गया है, ‘भारत और ताइवान के बीच आम तौर पर उच्चस्तरीय यात्राएं नहीं होती हैं, ऐसे में भारत ने इस समय में यात्रा के लिए ताइवान के प्रतिनिधिमंडल को क्यों आमंत्रित किया।

बीजिंग: चीन में अगले दशकों में करीब तीन करोड़ पुरूषों को अपने लिए चीन से बाहर पत्नियां खोजनी होगी या फिर अविवाहित ही रहना पड़ेगा। चीन के समाजिक विज्ञान अकादमी के एक अनुसंधानकर्ता ने आज चेतावनी दी है कि देश में 35 से 59 वर्ष आयु वर्ग में अविवाहित पुरूषों की संख्या 2020 में 1.5 करोड़ होगी जो 2050 तक बढ़कर तीन करोड़ हो सकती है।

उन्होंने सरकारी अखबार पीपुल्स डेली को बताया कि कम शिक्षित निचले तबके के पुरूषों के अविवाहित रहने की आशंका ज्यादा है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि सिर्फ प्राथमिक शिक्षा या उससे कम शिक्षा पाने वाले पुरूषों की संख्या में 2010 में 15 प्रतिशत वृद्धि हुई है।

नानकाई विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और परिवार नियोजन नीति विशेषज्ञ युआन शिन ने सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स को बताया कि वर्ष 2050 इनकी संख्या बढ़कर तीन करोड़ होने की संभावना है। चीन में लिंगानुपात पुरूषों के पक्ष में है क्योंकि अभी भी लड़कों का जन्म दर ज्यादा है।

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया के हालिया बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण की सर्वसम्मति से निंदा की है और प्योंगयांग के खिलाफ ‘और अहम कदम’ उठाए जाने की धमकी दी है। प्योंगयांग के अहम सहयोगी चीन समेत परिषद के सदस्यों ने अमेरिका द्वारा तैयार उस बयान पर सहमति जताई है, जिसमें मिसाइल प्रक्षेपण को संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का ‘घोर उल्लंघन’ बताया गया है।

उत्तर कोरिया ने घोषणा की थी कि उसने गत रविवार को नई मिसाइल का प्रक्षेपण किया जिसके बाद अमेरिका, जापान एवं दक्षिण कोरिया ने कल तत्काल बैठक आयोजित कराए जाने का अनुरोध किया था। उत्तर कोरिया ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यभार संभालने के बाद पहली बार प्रक्षेपण किया है।

अमेरिका की राजदूत निकी हेली ने एक बयान में कहा, ‘हम सुरक्षा परिषद के सभी सदस्यों से अनुरोध करते हैं कि वे उत्तर कोरियाई प्रशासन और उसके समर्थकों को यह स्पष्ट करने के लिए हर उपलब्ध संसाधन का इस्तेमाल करें कि ये प्रक्षेपण अस्वीकार्य हैं।’ उन्होंने कहा, ‘अब समय आ गया है कि उत्तर कोरिया को हम अपनी बातों से ही नहीं, बल्कि अपने कार्यों से भी जवाबदेह ठहराएं।’

परिषद की बैठक से कुछ ही घंटों पहले वाशिंगटन में एक संवाददाता सम्मेलन में ट्रंप ने उत्तर कोरिया को एक ‘बहुत बड़ी समस्या’’ बताया था और संकल्प लिया था, ‘हम इससे बहुत सख्ती से निपटेंगे।’

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