बुराड़ी : समस्याओं पर जम चुकी है धुल की भारी परत

16 February 2017
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दिल्ली: बुराड़ी गांव की वर्तमान समस्याओं पर धूल की मोटी परत जमा हो गई है। यही वजह है कि गांव के लोगों को शिक्षा, चिकित्सा, सड़क, गंदगी व जलभराव जैसी बुनियादी समस्याओं से वर्षो से जूझना पड़ रहा है। समस्याओं का समाधान न होने पर लोगों ने गत नगर निगम चुनाव में जनप्रतिनिधि भी बदल डाले। इसके बावजूद हालत नहीं बदले हैं।

जलभराव है सबसे बड़ी समस्या

जलभराव यहां की सबसे बड़ी समस्या है। हल्की बारिश में भी बुराड़ी मुख्य मार्ग पर कौशिक एंक्लेव के पास इतना पानी जमा हो जाता है कि वाहनों का चलना मुश्किल हो जाता है। यह सड़क पहले नगर निगम के अधीन थी, अब लोक निर्माण विभाग के जिम्मे है। हाल में ही सड़क के किनारे बड़े नाले का निर्माण भी कराया गया है, लेकिन नाला जाम होने से जलभराव की समस्या पैदा हो जाती है। केवल मुख्य सड़क पर ही नहीं, निगम के अधीन गांव की भीतर की सड़कों पर भी जलभराव की समस्या रहती है। गांव में जल निकासी का प्रबंध वर्षो से नहीं है।

भूत बंगला बना बारात घर

बुराड़ी में पांच साल पूर्व सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण विभाग ने बारात घर का निर्माण कराया था, लेकिन अब तक इसका इस्तेमाल नहीं हो सका है। सामाजिक समारोहों के आयोजन के लिए बारात घर की बुकिंग के लिए किस विभाग या अधिकारी के पास अर्जी लगाएं, यहां के लोगों को यह भी पता नहीं है। दरअसल, निर्माण होने के बाद अब तक बारात घर की देखरेख की जिम्मेवारी किसी विभाग को नहीं सौंपी गई है। यही कारण है कि यह बारात घर भूत बंगला में तब्दील हो चुका है। इसके हॉल, कमरों व शौचालयों में गंदगी के अंबार देखे जा सकते हैं तो चोर लोहे के बने दरवाजे व खिड़की तक उखाड़ ले गए हैं। इसमें अब आवारा जानवर डेरा जमाए रहते हैं।

सफाई व्यवस्था लचर

गांव की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से लचर है। सफाईकर्मियों की बड़ी संख्या होने के बाद भी गांव की गलियों की नियमित रूप से सफाई नहीं होती है। ऐसे में जगह-जगह कूड़ों के ढेर देखे जा सकते हैं।

बुराड़ी का सुन्दर विहार इलाका कुछ समय पहले बिहारी कॉलोनी के नाम से जाना जाता था। कुछ सक्रीय लोगों के कारण आज इस बिहारी कॉलोनी में न सिर्फ एक सक्रीय RWA है बल्कि इसका नाम भी सुन्दर विहार के नाम से दर्ज है।

अधिकांश डीटीसी बसों के आखिरी स्टॉप नत्थूपुरा से करीब पांच किमी की दूरी पर स्थित सुन्दर विहार में न कोई ऑटो चलता है न फटफटिया न ही कोई ग्रामीण सेवा है। यहां आने के लिए अपने निजी वाहन की सख्त जरूरत होती है नहीं तो पैदल ही 5 से 7 किमी का सफर तय करना पड़ता है। यहां के निवासी मुखयतः छतीसगढ़, झारखण्ड आदि राज्यों से आए हुए हैं। वैसे तो इन्हें आए हुए 15 साल से ज़्यादा हो गए हैं लेकिन इनके पहचान पत्र अभी कुछ समय पहले बनकर तैयार हुए हैं।

यहां अधिकांश लोग बुराड़ी गांव के स्थानीय लोगों की ज़मीनों पर काम करके अपनी गुजर बसर करते हैं। यहां फूलों की खेती की जाती है। सुन्दर विहार के अधिकांश हिस्से में अभी भी खाली खेती योग्य ज़मीन है। यहां के निवासी बताते हैं कि वह लोग खेती के लिए ही दिल्ली आए थे। यहां कुल मिलाकर 35 से 40 परिवार रहते हैं जिन्होंने आपस में मिलकर एक आरडब्ल्यूए का गठन किया हुआ है।

इस आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष सुरेन्द्र गुंसाई बताते हैं, "शिक्षा के अभाव में दिल्ली में होते हुए भी यह क्षेत्र पिछड़ता जा रहा है। इसे संभालने के लिए ही हम लोग सक्रिय कदम उठा रहे हैं। नेता वोट मांगने तो इस क्षेत्र में पहुंच जाते हैं लेकिन विकास कार्य यहां अभी तक नहीं हुए। आज भी यहां के लोग खेती में प्रयोग होने वाले बोरिंग के पानी पीने को मजबूर हैं।"

सुरेन्द्र आगे बताते हैं, "यहां के बच्चे पहले स्कूल जाने से घबराते थे क्योंकि नज़दीकी प्राइमरी स्कूल यहां से 5 किमी की दूरी पर है और आने जाने के लिए कोई साधन नहीं हैं। छोटे-छोटे पांच साल से 10 साल तक के बच्चों के लिए 5 किमी चलकर जाना एक मुश्किल काम है। अब क्षेत्र के कुछ पढ़े लिखे नौजवान यहां के बच्चों को पढ़ाने के लिए आगे आए हैं।"

यहां की मुख्य समस्या ट्रांसपोर्ट है, साथ ही शिक्षा, बेसिक चीजों का आभाव जैसी बहुत सी चीजों के लिए यहां के लोग समय-समय पर अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं।

लोगों का कहना है कि यहां पानी की समस्या के बारे में स्थानीय नेताओं से जिक्र किया था तो एक दिन के लिए दिल्ली जल बोर्ड का टैंकर भी यहां लाया गया था लेकिन अब दोबारा वही हाल है।

सुरेन्द्र गुंसाई बताते हैं, "आरडब्ल्यूए का मकसद इस कॉलोनी को दिल्ली की अन्य कॉलोनियों की तरह बनाना है। यहां भी नजदीक में कम से कम ऑटो स्टॉप होना चाहिए जहां ग्रामीण सेवा, आरटीवी या इलेक्ट्रिक रिक्शा चलता हो। बाकी बुराड़ी के अन्य क्षेत्रों की तरह यहां भी मेडिकल पुरानी समस्या है। आसपास में सिर्फ एक पाली क्लीनिक है जिसके लिए भी करीब 15 किमी जाना पड़ता है।"

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