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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का देश के सबसे गरीब 5 करोड़ परिवारों के लिये न्यूनतम आय योजना शुरू करने का वादा सामाजिक सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है लेकिन इसका वित्त पोषण एक मुश्किल कार्य हो सकता है। कुछ प्रमुख अर्थशास्त्रियों तथा समाज विज्ञानियों ने यह कहा है। राहुल गांधी न्यूनतम आय गारंटी योजना और रोजगार के वादे चुनावी रैलियों में पहले ही कर चुके हैं. आज कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में सबकुछ विस्तार से बताया जाएगा. दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी की मौजूदगी में वादों का पिटारा खुलेगा. हर गरीब परिवार को सालाना 72 हजार रुपए देने का वादा कांग्रेस का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है. आखिरी ये 72,000 का फॉर्मूला कैसे तय हुआ ? किस आधार पर 72,000 रुपये सालाना न्याय तय हुआ? इस के पीछे एक कहानी है.राहुल गांधी ने डा मनमोहन सिंह और चिदंबरम को न्याय स्कीम को लागू करने की ज़िम्मेदारी दी थी. मनमोहन सिंह ने इसकी चर्चा अरविंद सुब्रमण्यम, कौशिक बसु और रघुराम राजन से की और कांग्रेस अध्यक्ष से इन तमाम अर्थशास्त्रियों की बात भी करवायी. राहुल गांधी ने चिदंबरम से भी कहा कि मैं कोई ऐसा वादा नहीं करना चाहता जिसको हम पूरा ना कर सकें. इस मीटिंग के बाद राहुल गांधी मीडिया के सामने आए और कहा 20% लोगों को 72000 सालाना देंगे और कांग्रेस ग़रीबी रेखा से बाहर निकालेगी.

 

कांग्रेस के रिसर्च सेल के मुताबिक आजादी के समय देश में 70 फीसदी लोग गरीब थे. लेकिन कांग्रेस सरकारें काफी मेहनत कर इसे 20 फीसदी तक लेकर आई हैं. अब गरीबी पर अंतिम वार करने का वक्त आ गया है. कांग्रेस का लक्ष्य 20 फीसदी गरीबी को हटाकर शून्य तक लाना और देश से गरीबी को पूरी तरह से खत्म करना है. यह योजना आर्थिसक न्याय प्रदान करेगी और गरीबों को गरिमा एवं सम्मान के साथ जीने का मौका देगी. गरीबों के हाथ में पैसा जाने से उपभोग बढ़ेगा और इससे रोजगार बढ़ेगा, कर राजस्व भी बढ़ेगा. देश में आय असमानता तेजी से बढ़ रही है. दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते यह हम सब का नैतिक दायित्व है कि देश से गरीबी को पूरी तरह से खत्म करने का महत्वाकांक्षी काम हाथ में लें. कांग्रेस साल 2030 तक देश से गरीबी को पूरी तरह से खत्म करना चाहती है.इस योजना का लक्ष्य 5 करोड़ सबसे गरीब परिवार हैं जो जनसंख्या का 20 फीसदी हिस्सा हैं. पैसा सीधे परिवार की महिला के खाते में जाएगा. अगर उसके पास बैंक खाता नहीं है तो उसे खुलवाया जाएगा.

योजना को लागू करने के लिए कांग्रेस वित्तीय अनुशासन और विवेकपूर्ण खर्च का तरीका अपनाएगी. इसे केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त योजना के रूप में लागू किया जाएगा. लेकिन लागत का मुख्यत: केंद्र सरकार वहन करेगी. इस योजना को राजस्व के नए स्रोत जुटाने और मौजूदा खर्च को तर्कसंगत बनाकर लागू किया जाएगा. रिसर्च सेल ने कहा कि जब कांग्रेस ने मनरेगा लागू किया था, तब भी बीजेपी और विपक्ष इसे बहुत महत्वाकांक्षी और खर्चीला बता रहे थे. मनरेगा के शुरुआती दौर में इस पर खर्च जीडीपी के 0.6 फीसदी तक था जो बाद में घटकर 0.3 फीसदी तक रह गया. बीजेपी अगर बुलेट ट्रेन के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की व्यवस्था कर सकती है तो आर्थिकक न्याय के लिए कांग्रेस इतनी रकम की व्यवस्था कर सकती है.

आज जो डेटा मौजूद है उससे आसानी से गरीब परिवारों की पहचान हो सकती है. साल 2011 का सामाजिक-आर्थिबक जाति जनगणना और परिवार के आंकड़े से मदद मिल सकती है. पीएम आवास योजना के लिए लाभार्थिजयों की पहचान के लिए भी इस डेटा को आधार बनाया गया था. अंत्योदय अन्न योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला, पीएम आवास योजना, पीएम किसान योजना जैसी स्कीमों से संबंधित डेटा मिल जाएगा.यह योजना कई चरणों में लागू होगी. मनरेगा योजना भरी कई चरणों में लागू की गई थी. कांग्रेस अर्थशास्त्रियों, समाजशास्त्रिगयों और सांख्यकीविदों की एक समिति बनाएगी जो इस योजना की डिजाइन, शुरू करने और इसे लागू करने का पूरा काम देखेंगे. समिति से सब कुछ ठीक होने का संकेत मिलने के बाद ही इसका अगला चरण लागू किया जाएगा.

किसकी सलाह पर बनी योजना-कांग्रेस ने इस योजना के लिए देश और विदेश के कई अर्थशास्त्रियों, विशेषज्ञों की सलाह ली है. उदाहरण के लिए प्रख्यात ग्लोबल इकोनॉमिस्ट रघुराम राजन, थॉमस पिकेट्टी और अभिजीत बैनर्जी ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि उनसे इस योजना के बारे में सलाह ली गई है. इसके लिए गहन आर्थिकक विचार-विमर्श किया गया है. देश भर के परिवारों के आय वितरण आंकड़ों, परिवारों के खपत प्रवृत्ति, वैश्विक सर्वे और राज्य सरकारों तथा निजी क्षेत्र के भी आंकड़ों का अध्ययन किया गया.

 

 

 

 

कांग्रेस का घोषणापत्र जारी होने जा रहा है. रोजगार देने में फेल होने का आरोप लगाते हुए नरेंद्र मोदी के वादे की आलोचना करने वाले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अब लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इस संबंध में बड़ा ऐलान किया है. मोदी सरकार को रोजगार के मुद्दे पर घेरने वाले राहुल गांधी ने यह वादा लोकसभा चुनाव के लिए होने वाले पहले चरण के मतदान से दस दिन पहले किया है, जो काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. रविवार रात राहुल गांधी ने यह वादा एक ट्वीट के जरिए किया. राहुल ने अपने ट्वीट में लिखा है कि मौजूदा वक्त में करीब 22 लाख सरकारी नौकरियों के लिए पद खाली हैं. राहुल ने कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई तो 31 मार्च 2020 तक इन सभी पदों को भरा जाएगा.


पिछले दिनों ही राहुल ने वादा किया था कि अगर सरकार बनी तो गरीबों के अकाउंट में 72 हजार रुपये सालाना डाले जाएंगे. 72 हजार रुपये महीने की योजना को लेकर आंध्र प्रदेश के विजयवाडा में कल राहुल ने कहा, 'मैं मोदी नहीं हूं. मैं झूठ नहीं बोलता हूं. उन्होंने कहा कि वह आपको 15 लाख रुपये देंगे. यह एक झूठ था. उनकी सरकार आपके बैंक अकाउंट में 15 लाख रुपये नहीं दे सकती लेकिन हमारी सरकार आई तो देश के सबसे गरीब लोगों को हर साल 72 हजार रुपये दिए जा सकेंगे.' इसके साथ ही राहुल गांधी ने वादा किया कि आगामी लोकसभा चुनावों में अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देंगे.

 

इससे पहले विजयवाड़ा में रविवार को एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर करारा हमला बोला. राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अंतिम लक्ष्य भारत के संविधान को नष्ट करना है, क्योंकि उन्हें आरएसएस का सपना पूरा करने में यह संविधान रोड़ा लगता है. राहुल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ऐसा कभी नहीं होने देगी. आंध्र प्रदेश में राहुल गांधी ने रविवार को दो चुनावी रैलियों को संबोधित किया. दोनों जगह उन्होंने दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों को लेकर नरेंद्र मोदी को निशाने पर रखा.

 

 

PM मोदी की तस्वीर छापने को लेकर चुनाव आयोग ने एयर इंडिया और भारतीय रेल को दोबारा नोटिस भेज कर जवाब मांगा है. एयर इंडिया ने बोर्डिंग पास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात के मख्यमंत्री विजय रूपाणी की तस्वीरों का फिर इस्तेमाल किया था. मदुरै से एयर इंडिया की 5:45 बजे की फ़्लाइट के एक यात्री ने ट्वीट कर यह जानकारी दी कि उसके बोर्डिंग पास में वाइब्रेंट गुजरात 2019 के विज्ञापन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर भी छपी है जो कि आचार संहिता का उल्लंघन है. एयर इंडिया ऐसा पहले भी कर फिर चुकी है. इस मामले में एयर इंडिया ने अपनी गलती को स्वीकारा और कहा कि मानवीय चूक हो गई.

25 मार्च को जारी अपने आदेश में एयर इंडिया ने लगभग 150 एयरपोर्ट्स पर स्थित अपने सभी स्टेशन मैनेजरों को आदेश दिया था कि वाइब्रेंट गुजरात के इस विज्ञापन वाले बोर्डिंग पास तत्काल हटाए जाएं. बावजूद इसके एयर इंडिया के यात्रियों को आज भी आचार संहिता के उल्लंघन वाले ऐसे बोर्डिंग पास दिए गए. फिलहाल एयर इंडिया इस शिकायत की जांच कर रही है.कुछ दिन पहले ही विमानन कंपनी ने आचार संहिता के कथित उल्लंघन को लेकर आलोचना का सामना करने के बाद पास को वापस लेने का फैसला किया था.एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने कहा, "एयर इंडिया ने 25 मार्च को सभी घरेलू स्टेशन को तुरंत प्रभाव के साथ बोर्डिंग कार्ड के पीछे वाइब्रेंट गुजरात के विज्ञापन का इस्तेमाल रोकने को लेकर नोटिस जारी किया था."उन्होंने कहा था, "आज की घटना मानवीय भूल से हुई. इस भूल के लिए मदुरै में एयर इंडिया के एयरपोर्ट प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है." वहीं दूसरी तरफ काठगोदाम शताब्दी ट्रेन में चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन का मामला सामने आया. इस ट्रेन में 'मैं भी चौकीदार' लिखे हुए कप में यात्रियों को चाय दी जा रही थी. शिकायत होते ही रेलवे ने कप हटवा दिए.

बता दें कि चुनाव आयोग की ओर से लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही आचार संहिता लग गई है. आचार संहिता के तहत राजनीतिक पार्टियों और उम्मीदवारों के लिए चुनाव आयोग की ओर से कुछ निर्देश जारी किए जाते हैं और हर पार्टी और उम्मीदवारों को इनका पालन करना होता है. निर्देशों का पालन नहीं करने किए जाने की सूरत में उम्मीदवारों या पार्टियों पर चुनाव आयोग की ओर से कार्रवाई की जा सकती है. किसी भी चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही उस क्षेत्र में आचार संहिता लागू हो जाती है.

 

(BJP) अध्यक्ष अमित शाह गांधीनगर लोकसभा सीट से नामांकन दाखिल करेंगे. इससे ठीक पहले उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि गांधीनगर से लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी सांसद रहे. मेरा सौभाग्य है कि बीजेपी मुझे यहीं से सांसद बनाने जा रही है.जनसभा के बाद अमित शाह (BJP) रोड शो कर रहे हैं. इस रोड शो में राजनाथ सिंह, विजय रुपानी और रामविलास पासवान समेत कई नेता मौजूद हैं. वहीं जनसभा के दौरान नितिन गडकरी, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, अकाली दल प्रमुख प्रकाश सिंह बादल और एलजेपी अध्यक्ष रामविलास पासवान जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद थे. सभी नामांकन दाखिल करने के दौरान भी मौजूद रहेंगे.एनडीए के शीर्ष नेताओं की इस मौजूदगी को शाह के लिए समर्थन और गठबंधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद दूसरे सबसे शक्तिशाली नेता के रूप में उनकी स्वीकार्यता के तौर पर देखा जा रहा है.राज्यसभा सांसद अमित शाह पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं. गांधीनगर सीट से 1998 से लगातार लालकृष्ण आडवाणी (91 साल) जीत दर्ज करते रहे हैं. पार्टी ने इसबार उन्हें टिकट नहीं दिया है.

 

बीजेपी की गुजरात इकाई के प्रमुख जीतू वघानी ने कहा कि चार किमी लंबा रोड शो अहमदाबाद के सरदार पटेल प्रतिमा से शुरू होगा और यह घाटलोडिया इलाके में पाटीदार चौक पर संपन्न होगा. गुजरात में सभी 26 सीटों के लिए 23 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख चार अप्रैल है.

पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के नामांकन के लिए बीजेपी ने खास तैयारियां कर रखी हैं. इसके जरिए एनडीए अपना शक्ति प्रदर्शन करने जा रहा है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह शनिवार को गांधीनगर लोकसभा सीट से नामांकन दाखिल करेंगे. इस दौरान केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, अकाली दल के प्रमुख प्रकाश सिंह बादल और लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद होंगे

 

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह गांधीनगर लोकसभा सीट से नामांकन दाखिल करेंगे. इससे ठीक पहले उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि गांधीनगर से लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी सांसद रहे. मेरा सौभाग्य है कि बीजेपी मुझे यहीं से सांसद बनाने जा रही है.बीजेपी की गुजरात इकाई के प्रमुख जीतू वघानी ने कहा कि चार किमी लंबा रोड शो अहमदाबाद के सरदार पटेल प्रतिमा से शुरू होगा और यह घाटलोडिया इलाके में पाटीदार चौक पर संपन्न होगा. गुजरात में सभी 26 सीटों के लिए 23 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख चार अप्रैल है.

 

जनसभा के बाद अमित शाह रोड शो कर रहे हैं. इस रोड शो में राजनाथ सिंह, विजय रुपानी और रामविलास पासवान समेत कई नेता मौजूद हैं. वहीं जनसभा के दौरान नितिन गडकरी, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, अकाली दल प्रमुख प्रकाश सिंह बादल और एलजेपी अध्यक्ष रामविलास पासवान जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद थे. सभी नामांकन दाखिल करने के दौरान भी मौजूद रहेंगे.एनडीए के शीर्ष नेताओं की इस मौजूदगी को शाह के लिए समर्थन और गठबंधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद दूसरे सबसे शक्तिशाली नेता के रूप में उनकी स्वीकार्यता के तौर पर देखा जा रहा है.

 

 

 

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