×

Warning

JUser: :_load: Unable to load user with ID: 558
Thursday, 16 February 2017 09:00

NASA live stream - Earth From Space LIVE Feed

Written by

दिल्ली: दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र के कौशिक एंक्लेव मे हिन्दू बस्ती के मात्र 10 मीटर की दूरी पर कब्रिस्तान के लिये जमीन प्रस्तावित होने से स्थानीय लोगों में रोष है । रेसीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, ब्लॉक-ए, बुराड़ी, इन्द्रप्रस्थ कालॉनी जनकल्यांण समिति (रजि) ने घनी हिन्दू आबादी वाले इस क्षेत्र में कब्रिस्तान होने पर विरोध जताया है। वेलफेयर एसोसिएशन्स की बैठक में स्थानीय निवासियों ने हिन्दू बस्ती के बीचोबीच कब्रिस्तान बनने पर चिंता व्यक्त की। गौरतलब है कि कब्रिस्तान के लिये प्रस्तावित जमीन के पास पहले से ही घनी हिन्दू आबादी वाली कालॉनी स्थित हैं जिनमें इन्द्रप्रस्थ कॉलॉनी (ब्लॉक A,B,C, ), इन्द्रप्रस्थ कॉलॉनी पार्ट-1, अमृत विहार कॉलॉनी, कौशिक एंक्लेव, सूरत विहार, गुरू नानकदेव शामिल कॉलोनी हैं।

इन क्षेत्रों की सभी वेलफेयर एसोसिएशन्स का कहना है कि ए ब्लॉक कौशिक एंक्लेव में प्रस्तावित कब्रिस्तान बेहद गलत है। इसके कारण यहां पर आवागम और बहुत सी असुविधा होगी उनके मुताबिक इस क्षेत्र में 3 किलोमीटर के दायरे में पहले से ही 5 कब्रिस्तान स्थापित हैं। इनमें सुलेमान माजरा (बुराड़ी गांव), मुकरबा चौक, लिवासपुर, केवल पार्क (आजदपुर), वजीराबाद (जगतपुर) में पहले से ही 5 कब्रिस्तान शामिल हैं।

स्थानीय निवासियों ने कब्रिस्तान के होने पर घोर विरोध जताते हुए कहा कि कब्रिस्तान के लिये प्रस्तावित जमीन से मात्र 100 मीटर की दूरी पर ब्यॉज़ सीनियर सेकेंड्री स्कूल कार्यशील है तथा उस प्रस्तावित कब्रिस्तान स्थल से 150 मीटर दूर गर्ल्स सीनियर सेकेंड्री स्कूल प्रस्तावित है।

गौरतलब है कि घनी आबादी वाले कौशिक एंक्लेव ब्लॉ-ए से मात्र 10 मीटर की दूरी पर कब्रिस्तान के लिये जमीन प्रस्तावित की गई है। यही पर पार्क भी है जहां बड़ी संख्या में बुजुर्ग और बच्चे आते हैं। ऐसे में आबादी के बीचोबीच कब्रिस्तान से बालको के मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।  इसके अलावा यहां काठिया बाबा का आश्रम है, छठ घाट है।

निवासियों ने प्रस्तावित कब्रिस्ता के स्थानांतरण के लिये मांग करते हुए कहा कि हम मुस्लिम भाइयों की धार्मिक रीति का सम्मान करते हुए चाहते हैं कि उन्हे सम्मान के साथ कहीं और जमीन दी जाये।

 

स्थानीय निवासियों ने घोर विरोध के मुख्य कारण यह हैं-

1- किलोमीटर के क्षेत्र में पहले से ही हैं 5 कब्रिस्तान (इनमें सुलेमान माजरा (बुराड़ी गांव), मुकरबा चौक, लिवासपुर, केवल पार्क (आजदपुर), वजीराबाद (जगतपुर) शामिल हैं।

2- प्रस्तावित कब्रिस्तान की जमीन के पास घना हिन्दू आबादी क्षेत्र है जिसमें इन्द्रप्रस्थ कॉलॉनी (ब्लॉक A,B,C, ), इन्द्रप्रस्थ कॉलॉनी पार्ट-1, अमृत विहार कॉलॉनी, कौशिक एंक्लेव, सूरत विहार, गुरू नानकदेव शामिल कॉलोनी शामिल हैं।

3- प्रस्तावित कब्रिस्तान से मात्र 100 मीटर की दूरी पर ब्यॉज़ सीनियर सेकेंड्री स्कूल चल रहा है।

4- प्रस्तावित कब्रिस्तान से मात्र 150 मीटर की दूरी पर गर्ल्स सीनियर सेकेंड्री स्कूल प्रस्तावित है।

5- प्रस्तावित कब्रिस्तान से मात्र 10 मीटर की दूरी पर कौशिक एंक्लेव स्थित है जिसमें काफी संख्या में हिन्दू आबादी रहती है।

6- 100 मीटर की दूरी पर काठिया बाबा का प्रसिद्ध आश्रम है जहां, साल में दो बार संत समागम होता है जिसमे देश ही नहीं विदेश से भी संत महात्मा सम्मिलित होते हैं।

7- 100 मीटर की दूरी पर छठ घाट है जहां पर हिन्दुओं का पवित्र त्योहार मनाया जाता है।

 

8- इसी क्षेत्र में भारत के प्रसिद्ध 10 गुरूद्वारों में से एक गुरूद्वारा भी स्थापित है जहां सिख समुदाय से वर्ष भर तीर्थाटन के लिये आते हैं।

9- निकट ही पार्क है जहां बुजुर्ग और बच्चे आते हैं, इस कब्रिस्तान के होने से उनका मानसिक विकास हतोत्साहित होगा।

हमारा देश तो 15 अगस्त 1947 को ही फिरंगियों से आज़ाद हो गया था लेकिन हम मासूम जनता को क्या पता था की “घर का भेदी लंका ढाए” वाली कहावत हम लोगो पर भी दोहराई जा सकती है |एक ओर जहाँ हम 15 अगस्त यानी भारत की आज़ादी की खुशियाँ मनाते है तिरंगे को शान से फहराते है, तोपों की सलामी देते है और भारत माता की जय बोल कर अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते है वही दूसरी ओर तिरंगे को जलाया जाता है सैनिकों पर पत्थर बरसाये जाते है और भारत मुर्दाबाद , भारत तेरे टुकड़े होंगे इन्शा-अल्लाह इन्शा-अल्लाह और न जाने क्या -क्या नारे लगाये जाते है |लेकिन मजाल की देश के सत्ता -आशिन कुछ कर जाएँ इन आस्तीन के सांपो पर |

अगर सही कहा जाए तो आज हमारा देश पूरी तरह से आतंकवाद , उग्रवाद , नक्सलवाद और सबके पितामाह नेतावाद (राजनीति ) में सुलग रहा है |आप सोच रहे होंगे की मैं ये क्या बोल रहा हूँ ? लेकिन ये सत्य है आए दिन देश में ऐसी -ऐसी घटना घट जाती है जिस से आप अनभिग नहीं होंगे |हरियाणा की ही एक घटना को ले लीजिये जिसमे एक लड़की से तीन साल पहले रेप किया जाता है और फिर तीन साल बाद उसी लड़की से वही रेपिस्ट रेप करता है कितनी दुखद और अविस्वास्निय घटना है !

हरियाणा ही क्यों आप भारत के किसी भी राज्य को ले लीजिये जहाँ आए दिन भयावह और दिल को दहला देने वाली घटना न घटती हों ! क्या हमारे देश में शासन नहीं है , प्रशासन नहीं है , कानून नहीं है ? सब कुछ है तो क्यों घटती हैं घटना ?

क्योकि इस के पीछे भी कारण है आज – कल सभी बिकाऊ हो गये है आप कितना भी जघन्य अपराध कर के क्यों न आये हो टेबल के नीचे से प्रशाद बढ़ा दीजिये और घर पे मज़े लिजिए | इसे छोड़िये ये तो अब आम बात हो गई है लेकिन अब तो सीधे जड़ पे ही वार किया जाता है जिसे देश का भविष्य कहा जाता है अब तो उसे भी नहीं छोड़ा जाता उसकी जिन्दगी से भी खिलवाड़ किया जाने लगा हैं |

आज एक ओर शिक्षा और एक ओर इस शिक्षा को पाकर देश को उन्नती की राह पर ले जाने वाले दोनों का संबंध-विच्छेद किया जा रहा है वह भी उनके हाथों जिसे हमारे यहाँ भगवान् से भी ऊँचा दर्जा दिया गया है अगर कुम्हार घड़ा बनाने में ही छल करना शुरु कर दे , तो क्या कुम्हार द्वारा बनाए गए घड़े से हम काम ले सकते है नहीं ना ! आज बिहार की घटना को लीजिये जिस छात्रा को पोलिटिकल साइंस की स्पेलिंग नहीं आती उसे बिहार का टॉपर बना दिया जाता है यानी अब शिक्षा भी पैसों की मोहताज़ हो गया |

जहाँ एक ओर ( RTE ) राईट टू एजुकेशन है वही शिक्षा माफ़िया इस की आड़ में अपना महल खड़ा कर रहें है शिक्षा के नाम पर बड़े -बड़े ट्रस्ट और NGO खोले जाते है और ज़ाकिर नाइक , आरएसएस , ओवैसी जैसे लोग अनाप -सनाप बोल के कचरमबद्ध करवाने पे तुले हुए होते हैं |

मैं कहता हूँ क्यो हो रहे है ये सब क्योंकि जब बाप ही गलत काम करे तो बेटे ने किया तो क्या हुआ? यही बात हमारे देश पे लागु होती है क्योंकि यहाँ तो नेता ही भ्रष्ट हैं इन नेतओं का कहर तो डेंगू से भी भयावह होती है डेंगू

तो उपचार करने पर ख़त्म हो जातें है लेकिन राजनेताओ का कहर तो ऐसा बरपता है कि लोग न तो जीवित होतें हैं और न ही मृत मानो जीता -जागता , चलता -फिरता , बोलता -बैठता , कठपुतली हो जो नेताओं द्वारा नचाया जाता हो |

ये नेता रूपी कचरा जहाँ देखो वही मुंह मारने के फ़िराक में होता है न जाने कौन -कौन से घोटाले कर लेते हैं | चारा -घोटाला , 2G स्पेक्ट्रम -घोटाला , DCC – घोटाला , आय से अधिक संपत्ति रखने वाले भ्रष्टाचार रूपी बीमारी से पीड़ित है ये नेता जिसका कोई इलाज ही नहीं है डॉक्टर के पास | दुर्भाग्यवश अगर इलाज किया भी जाता है तो बीमारी और बढ़ जाती है |चिंता का विषय ये है कि ये बीमारी दिन-प्रतिदिन बढ़ ही रही है जिसका इलाज सीबीआई , एनआईए और रॉ जैसे जाँच दलों से करवाया जाता है लेकिन इसमे भी कुछ भ्रष्ट डॉक्टर होते है जिसके कारण सही रोगी का पता ही नहीं चल पाता और जो रोगी नहीं है उसका इलाज कर दिया जाता है फिर जो असली रोगी है उसकी बीमारी इतनी भयानक रूप ले लेती है की सभी इस बीमारी की चपेट में आने लगते है और फिर शुरु हो जाता है देश में भ्रष्टाचार , आतंकवाद , नक्सलवाद , उग्रवाद , भूखमरी , बेरोजगारी और न जाने क्या – क्या ?

अगर इन सब से हम छुटकारा पाना चाहते हैं तो सबसे पहले हमें इन नेताओ की चाल को समझना होगा |जो अपने स्वार्थ के लिए जनता को बहलाने का काम करते हैं और सत्ता-सीन होकर इन बीमारी को बढ़ावा देते है |

हमें इन दल -दल को ख़त्म करना होगा जो स्व-स्वार्थ के लिए जब मन हो एक नया दल बना लेते है और वादे पे वादे करते है अतः हमारे देश के नेता अगर निःस्वार्थ भाव से काम करें और लोकतंत्र की परिभाषा (जनता का जनता के लिए और जनता के द्वारा की गई शासन प्रणाली ) को फॉलो करें तो हमारा देश फिर से सोने की चिड़ियाँ और विश्व गुरु कहलाने लगेगी |

 

जय हिन्द

दिल्ली : बुराड़ी में परिवहन की बड़ी समस्या है। यहां सुबह-शाम बसों में भीड़ के कारण लोगों का बुरा हाल रहता है। क्षेत्र के लोग नौकरी और काम के लिए दूसरे क्षेत्रों में जाते हैं। उनकी परेशानी को खत्म करने और परिवहन की समस्या को दूर करने के लिए योजना तैयार कर रहे हैं। इसमें नए रूट का चयन कर उन पर नई बसों को चलाया जाएगा। यह बात बुराड़ी के विधायक संजीव झा ने कही।

उन्होंने बताया कि बुराड़ी में परिवहन की समस्या को दूर करना हमारी प्राथमिकता है। इससे पहले सड़क एक बड़ी समस्या थी। सड़क निर्माण के बाद अब ट्रांसपोर्ट की समस्या को दूर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें भलस्वा के लिए स्वरूप नगर होते हुए बस सेवा, केशवपुरम से इब्राहिमपुर तक बसों की संख्या बढ़ाना और कादीपुर तक बस सेवा शुरू करना प्राथमिकता में है। साथ ही झड़ौदा और बाबा कॉलोनी तक भी बसों की पहुंच बनाने पर काम किया जा रहा है। अभी जगतपुर से विश्वविद्यालय के लिए मेट्रो फीडर शुरू हो चुकी है। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को दूर करना हमारी प्राथमिकता है।

 

दुनिया में एक अजीब सा ट्रेंड शुरू हो चुका है, जो ना सिर्फ आने वाली पीढ़ी पर असर डाल रहा है, बल्कि हमारे इतिहास में शामिल लोगों के अस्तित्व पर भी सवाल उठा रहा है। दुनिया के जो भी फ्रीडम फाइटर्स हैं, चाहे वो भारत के महात्मा गांधी हों या फिर सोवियत यूनियन के जोसेफ स्टालिन, सभी के अस्तित्व पर, उनके फैसलों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इस फेहरिस्त में चीन के जनक माओ ज़ेदोंग भी शामिल हैं।

आज लोग इनके फैसले और मानसिकता पर सवाल उठा रहे हैं लेकिन क्या ये ज़रूरी नहीं कि इनके फैसलों पर राय बनाने से पहले उस दौर के हालात को भी समझने की कोशिश की जाए। क्यों ना ये समझने की कोशिश की जाए कि क्यों इनकी प्रतिमाएं लगाई गईं, इनके नाम से दिवस मनाए गए और क्यों इन धुरंधरों को इतिहास में ये दर्जा दिया गया। दरअसल इन तमाम कवायदों का एकमात्र मकसद आज की और आगे आने वाली पीढियों तक इन शख्सियतों की विचारधारा को पहुंचाना है, दुनिया को उनके योगदान से रूबरू कराना है।

इंसान के व्यक्तित्व में उसकी जड़ें काफी अहमियत रखती हैं, उसका इतिहास और अनुभव ही मिलकर उसका आने वाला भविष्य तय करता है। इतिहास के अनुभव आपके भविष्य के फैसलों को संवार सकते हैं। ऐसे में ऐसी शख्सियतों के योगदान पर सवाल उठाना इतिहास से बेइमानी करने जैसा है। दुनियाभर के फासिस्ट की सोच मिली-जुली सी ही है, माओ को मानने वाले जोसेफ स्टालिन का विरोध कर सकते हैं। अंबेडकर को जो मानते हैं, वो गांधी पर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन सोच पर सवाल उठाने से समस्या का समाधान मिलना मुश्किल है। आप व्यवस्था को तो हटा सकते हैं लेकिन विकल्प क्या है ? सवाल उठाना आसान होता है लेकिन समाधान देना नहीं, और इन्हीं सवालों की वजह से आजतक मिडिल ईस्ट आग में झुलस रहा है।

जो डेमोक्रेटिक सोच रखते हैं, co-existence में विश्वास रखते है, वो विकल्प की तलाश करते हैं। सवाल सम्राट अशोक और अकबर पर भी उठ चुके हैं, जो तलवार के बूते देश नहीं बल्कि अपने बूते दिल जीतने का माद्दा रखते थे, ऐसे में सिर्फ सवाल उठाना कहां तक लाजिमी है। दरअसल इतिहास की गवाही ही लक्ष्य तक पहुंचने की कुंजी बन सकती है, अगर इतिहास से सबक नहीं लिया गया तो लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। चाहे वो एक इंसान का व्यक्तित्व हो या फिर देश का भविष्य।

(लेखक ज़ी मीडिया समूह के न्यूज चैनल इंडिया 24x7 के संपादक हैं)  

पेशावर: पाकिस्तान के  पेशावर में चूहे के काटने से एक शिशु की मौत के बाद.

प्रशासन ने चूहों का आतंक खत्म करने के लिए एक चूहे को मारने पर 25 रूपए का इनाम देने की घोषणा की.

सरकार ने तय किया है कि इस समस्या से निजात पाने के लिए आम लोगों को शामिल किया जाए.

 और हर चूहे को मारने पर प्रोत्साहन के तौर पर 25 रूपए दिए जाएं.

शहर का पानी एवं सफाई सेवा विभाग चार कस्बों में कुछ ऐसे केंद्र स्थापित करेगा जहां मारे गए.

 चूहे इकट्ठा किये जाएंगे और उन्हें मारने वालों को इनाम दिया जाएगा.

चूहे मारने वालों को उनकी इनाम राशि देने में मदद पहुंचाने के लिए मोबाइल सेवाएं भी शुरू की जाएंगी.

घर घर चूहों को मारने वाली दवा वितरित की जाएगी.

पेशावर के जिला नाजिम मुहम्मद आसिम ने बड़े चूहों के आतंक से निबटने के उपायों.

पर चर्चा करने के लिए एक बैठक बुलायी थी. ये बड़े चूहे न केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा करते हैं बल्कि.  लोगों पर हमला कर और उन्हें काटकर नुकसान पहुंचाते हैं. ये बड़े चूहे 22-30 सेंटीमीटर तक के हैं.

दिल्ली: बुराड़ी गांव की वर्तमान समस्याओं पर धूल की मोटी परत जमा हो गई है। यही वजह है कि गांव के लोगों को शिक्षा, चिकित्सा, सड़क, गंदगी व जलभराव जैसी बुनियादी समस्याओं से वर्षो से जूझना पड़ रहा है। समस्याओं का समाधान न होने पर लोगों ने गत नगर निगम चुनाव में जनप्रतिनिधि भी बदल डाले। इसके बावजूद हालत नहीं बदले हैं।

जलभराव है सबसे बड़ी समस्या

जलभराव यहां की सबसे बड़ी समस्या है। हल्की बारिश में भी बुराड़ी मुख्य मार्ग पर कौशिक एंक्लेव के पास इतना पानी जमा हो जाता है कि वाहनों का चलना मुश्किल हो जाता है। यह सड़क पहले नगर निगम के अधीन थी, अब लोक निर्माण विभाग के जिम्मे है। हाल में ही सड़क के किनारे बड़े नाले का निर्माण भी कराया गया है, लेकिन नाला जाम होने से जलभराव की समस्या पैदा हो जाती है। केवल मुख्य सड़क पर ही नहीं, निगम के अधीन गांव की भीतर की सड़कों पर भी जलभराव की समस्या रहती है। गांव में जल निकासी का प्रबंध वर्षो से नहीं है।

भूत बंगला बना बारात घर

बुराड़ी में पांच साल पूर्व सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण विभाग ने बारात घर का निर्माण कराया था, लेकिन अब तक इसका इस्तेमाल नहीं हो सका है। सामाजिक समारोहों के आयोजन के लिए बारात घर की बुकिंग के लिए किस विभाग या अधिकारी के पास अर्जी लगाएं, यहां के लोगों को यह भी पता नहीं है। दरअसल, निर्माण होने के बाद अब तक बारात घर की देखरेख की जिम्मेवारी किसी विभाग को नहीं सौंपी गई है। यही कारण है कि यह बारात घर भूत बंगला में तब्दील हो चुका है। इसके हॉल, कमरों व शौचालयों में गंदगी के अंबार देखे जा सकते हैं तो चोर लोहे के बने दरवाजे व खिड़की तक उखाड़ ले गए हैं। इसमें अब आवारा जानवर डेरा जमाए रहते हैं।

सफाई व्यवस्था लचर

गांव की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से लचर है। सफाईकर्मियों की बड़ी संख्या होने के बाद भी गांव की गलियों की नियमित रूप से सफाई नहीं होती है। ऐसे में जगह-जगह कूड़ों के ढेर देखे जा सकते हैं।

बुराड़ी का सुन्दर विहार इलाका कुछ समय पहले बिहारी कॉलोनी के नाम से जाना जाता था। कुछ सक्रीय लोगों के कारण आज इस बिहारी कॉलोनी में न सिर्फ एक सक्रीय RWA है बल्कि इसका नाम भी सुन्दर विहार के नाम से दर्ज है।

अधिकांश डीटीसी बसों के आखिरी स्टॉप नत्थूपुरा से करीब पांच किमी की दूरी पर स्थित सुन्दर विहार में न कोई ऑटो चलता है न फटफटिया न ही कोई ग्रामीण सेवा है। यहां आने के लिए अपने निजी वाहन की सख्त जरूरत होती है नहीं तो पैदल ही 5 से 7 किमी का सफर तय करना पड़ता है। यहां के निवासी मुखयतः छतीसगढ़, झारखण्ड आदि राज्यों से आए हुए हैं। वैसे तो इन्हें आए हुए 15 साल से ज़्यादा हो गए हैं लेकिन इनके पहचान पत्र अभी कुछ समय पहले बनकर तैयार हुए हैं।

यहां अधिकांश लोग बुराड़ी गांव के स्थानीय लोगों की ज़मीनों पर काम करके अपनी गुजर बसर करते हैं। यहां फूलों की खेती की जाती है। सुन्दर विहार के अधिकांश हिस्से में अभी भी खाली खेती योग्य ज़मीन है। यहां के निवासी बताते हैं कि वह लोग खेती के लिए ही दिल्ली आए थे। यहां कुल मिलाकर 35 से 40 परिवार रहते हैं जिन्होंने आपस में मिलकर एक आरडब्ल्यूए का गठन किया हुआ है।

इस आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष सुरेन्द्र गुंसाई बताते हैं, "शिक्षा के अभाव में दिल्ली में होते हुए भी यह क्षेत्र पिछड़ता जा रहा है। इसे संभालने के लिए ही हम लोग सक्रिय कदम उठा रहे हैं। नेता वोट मांगने तो इस क्षेत्र में पहुंच जाते हैं लेकिन विकास कार्य यहां अभी तक नहीं हुए। आज भी यहां के लोग खेती में प्रयोग होने वाले बोरिंग के पानी पीने को मजबूर हैं।"

सुरेन्द्र आगे बताते हैं, "यहां के बच्चे पहले स्कूल जाने से घबराते थे क्योंकि नज़दीकी प्राइमरी स्कूल यहां से 5 किमी की दूरी पर है और आने जाने के लिए कोई साधन नहीं हैं। छोटे-छोटे पांच साल से 10 साल तक के बच्चों के लिए 5 किमी चलकर जाना एक मुश्किल काम है। अब क्षेत्र के कुछ पढ़े लिखे नौजवान यहां के बच्चों को पढ़ाने के लिए आगे आए हैं।"

यहां की मुख्य समस्या ट्रांसपोर्ट है, साथ ही शिक्षा, बेसिक चीजों का आभाव जैसी बहुत सी चीजों के लिए यहां के लोग समय-समय पर अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं।

लोगों का कहना है कि यहां पानी की समस्या के बारे में स्थानीय नेताओं से जिक्र किया था तो एक दिन के लिए दिल्ली जल बोर्ड का टैंकर भी यहां लाया गया था लेकिन अब दोबारा वही हाल है।

सुरेन्द्र गुंसाई बताते हैं, "आरडब्ल्यूए का मकसद इस कॉलोनी को दिल्ली की अन्य कॉलोनियों की तरह बनाना है। यहां भी नजदीक में कम से कम ऑटो स्टॉप होना चाहिए जहां ग्रामीण सेवा, आरटीवी या इलेक्ट्रिक रिक्शा चलता हो। बाकी बुराड़ी के अन्य क्षेत्रों की तरह यहां भी मेडिकल पुरानी समस्या है। आसपास में सिर्फ एक पाली क्लीनिक है जिसके लिए भी करीब 15 किमी जाना पड़ता है।"

जैसलमेर: जैसलमेर जिले में एक थाना ऐसा भी है जहां 23 वर्ष में महज 55 मुकदमे दर्ज हुए हैं.

 और जहां पुलिस कर्मियों के पास कोई काम ही नहीं है. कई बार पूरे साल में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं होता.

इस थाने को 23 साल तक हेड कांस्टेबल ही संभालता रहा और अब जा कर इस थाने को थानेदार मिला है.

शाहगढ़ का यह थाना जैसलमेर में पाकिस्तान सीमा से सटा है, जहां 23 वर्ष में महज 55 मुकदमे दर्ज हुए हैं.

 और सबसे बड़ी बात ये है कि इसमें एक भी मुकदमा रेप का नहीं है.

ये खूबी इस थाने को दूसरे थानों से अलग करता है.

थाना वीरान मरुस्थल क्षेत्र में है, जहां आसपास कोई आदमी मुश्किल से ही नजर आता है.

पुलिसकर्मियों का कहना है कि जब वह गश्त पर निकलते हैं, तब इक्का-दुक्का लोग मिलते हैं.

 अब पहली बार थाने की कमान सब इंस्पेक्टर को सौंपी गई है.

पुलिस सूत्रों के अनुसार, साल 1993 में सीमा पार से तस्करी रोकने के लिए शाहगढ़ थाना खोला गया था.

 तारबंदी के बाद तस्करी पर लगाम भी लगी. सीमावर्ती क्षेत्र के इस थाने पर 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का जिम्मा है.

 इस थाने के अन्तर्गत दो पंचायतों की 10 हजार की आबादी आती है.

वर्ष 2016 में अब तक कोई मामला नहीं दर्ज हुआ. 2015 में सिर्फ दो मामले दर्ज हुए, वे भी सड़क दुर्घटना के.

वर्ष 2014 में तीन मामले दर्ज हुए, एक मारपीट का, दूसरा चोरी का और तीसरा सड़क दुर्घटना का.

राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कपिल गर्ग ने बताया .

कि थाने में बिजली सौर ऊर्जा से मिलती है और पानी बाहर से लाया जाता है.

उन्होंने बताया कि कभी साल भर मुकदमा दर्ज न हो लेकिन अंत में अगर एक मुकदमा दर्ज हो जाए.

 और उसका निस्तारण न हो तो भी वर्ष के अंत में पेंडेंसी का प्रतिशत 100 आता है.

पुलिस उपाधीक्षक नरेन्द्र कुमार दवे ने थाने में 23 साल बाद नियुक्ति होने पर कहा,

‘एएसआई स्तर का अधिकारी थाने का प्रभारी रहा है. थाने में दर्ज होने वाले मामले,

इन्स्पेक्टर स्तर के अधिकारी की उपलब्धता और कार्य सम्पादन के आधार पर इन्स्पेक्टर की नियुक्ति की जाती है.’

बुराड़ी :रेप पीड़िता की पहचान सार्वजनिक, स्वाती मालीवाल के खिलाफ FIR दर्जबुराड़ी रेप पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने के मामले में मालीवाल के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर ली है। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालीवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बुराड़ी रेप पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने के मामले में मालीवाल के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर ली है।

 

बुराड़ी की रहने वाली 14 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता ने रविवार को शालीमार बाग स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में दम तोड़ दिया। लगातार हालत बिगड़ने पर दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के निर्देश पर 1 जुलाई को उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

 

पड़ोस वाली महिला बोली छत पर तुम्हारी बहन के साथ हो रहा है रेप...और फिर

इस घटना से क्षुब्ध डीसीडब्ल्यू प्रमुख ने केंद्र और दिल्ली पुलिस पर महिला सुरक्षा के मुद्दे पर जमकर भड़ास निकाली। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने ट्विटर पर लिखा, 'दिल्ली को और कितने निर्भया की जरूरत है? हम अगले निर्भया के मरने का इंतजार करते रहते हैं।' उन्होंने कहा, 'लड़की को जबरन जहरीला पदार्थ खिलाया गया जिससे उसके अंदरूनी अंग पूरी तरह खराब हो गए और उसकी काफी दर्दनाक स्थिति में मौत हो गई।' उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा डीसीपी (उत्तर) को नोटिस जारी करने के बाद खुलेआम घूम रहे आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

मालीवाल ने ट्वीट कर कहा, '14-वर्षीय पीड़ित के अभिभावकों के साथ हूं जो काफी गरीब और शोकाकुल हैं। दिल्ली और कितने निर्भया चाहती है? हम सब अगली निर्भया की मौत का इंतजार करते रहते हैं।' उन्होंने कहा, 'गृह मंत्रालय ने महिला सुरक्षा विशेष कार्यबल को दिल्ली में भंग कर जख्म पर और नमक छिड़क दिया।'

 

सौतेले पिता ने कहा मुंबई में है बेटी, लेकिन सच कुछ और ही था

 

किशोरी को पिलाया गया तेजाब

 किशोरी के परिजनों ने आरोपी शिव शंकर (21) पर शीतल पेय में तेजाब या अन्य घातक रसायन मिलाकर पिलाने का आरोप लगाया है। पीड़ित किशोरी बुराड़ी में माता-पिता व छोटे भाई के साथ रहती थी। उसके पड़ोस में दुष्कर्म का आरोपी शिव शंकर भी रहता है जिससे उसकी दोस्ती हो गई थी।

 पिछले साल 21 दिसंबर को वह शिव शंकर के साथ घर से गायब हो गई थी। 2 दिन तक दोनों साथ रहे थे। उसी दौरान शिव शंकर ने उसके साथ दुष्कर्म किया। 24 दिसंबर को घर लौटने पर पिता ने जब किशोरी से पूछताछ की तो उसने बताया कि जब वह घर आने के लिए स्कूल से निकली थी तभी वहां शिव शंकर आ गया। उसने कहा कि तुम्हारे पिता का एक्सीडेंट हो गया है, जल्दी अस्पताल चलो। रास्ते में उसने रुमाल सुंघाया जिससे वह बेहोश हो गई। जब होश आया तो उसने खुद को किसी कमरे में बंद पाया। इसके बाद परिजनों ने बुराड़ी थाने में शिव शंकर के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज करवा दिया।

 

केंद्र से DCW अध्यक्ष का तीखा सवाल, 'आपको और कितने निर्भया कांड चाहिए?

 27 दिसंबर को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, लेकिन पुलिस ने जब तीस हजारी कोर्ट में किशोरी का बयान कराया तो वह अपने पुराने बयान से पलट गई। उसने कहा कि उसके साथ कोई गलत काम नहीं हुआ है और वह अपनी मर्जी से शिव शंकर के साथ गई थी।

 किशोरी के बयान के बाद आरोपी को जमानत मिल गई थी। हालांकि पुलिस ने तीन महीने बाद इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी। पुलिस का कहना है कि गत 16 मई को मामले में आरोप तय होना था, लेकिन इससे एक दिन पहले किशोरी फिर शिव शंकर के साथ घर से भाग गई। 10 दिन बाद जब वह घर लौटी तब परिजनों ने उसे घर ले जाने से इन्कार कर दिया। किशोरी ने भी घर जाने से मना कर दिया तब पुलिस ने उसे निर्मल छाया में रखवा दिया था।

 

नई दिल्ली(16 फरवरी):आमतौर पर लोग यही मानते हैं कि आईआईटी के छात्र पढने के अलावा और कुछ काम नहीं करते। लेकिन आपकी इस सोच को आईआईटी रुड़की के 4 छात्र कुछ हद तक बदल सकते हैं। 

आईआईटी रुड़की के 4 लड़कों का डांस वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है,

जिसे देखकर उनके बारे में आप भी अपनी सोच बदल देंगे।

वैलेंटाइन डे पर अपलोड किए गए इस वीडियो में 4 लड़के हॉलीवुड सिंगर एड शीरन के लेटेस्ट सॉग 'शेप ऑफ यू' पर डांस कर लड़की को इंप्रेस करने की कोशिश कर रहे हैं। इस गाने को लड़कों ने खुद ही कोरियोग्रॉफ करके डांस किया है। चारों लड़के सिंगल हैं और अपने लिए लड़की को इंप्रेस करने की कोशिश कर रहे हैं।

चारों लड़के एक ही लड़की को इंप्रेस करना चाहते हैं। इस डांस वीडियो को अंकुश राउत डायरेक्ट किया है। 13 फरवरी को इस वीडियो को यूट्यूब म्यूजिक चैनल Cinesec IITR के अकाउंट से अपलोड किया गया है, जिसके बाद अब तक 76000 ने अधिक लोग इसे देख चुके हैं।

 

 

Page 13 of 17
Top
We use cookies to improve our website. By continuing to use this website, you are giving consent to cookies being used. More details…