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सूक्ष्म वित्त के ऋणदाता और कर्जगृहिता का नियमन और सूक्ष्म वित्त प्रणाली में नियमन और समावेशी भागीदारी को सुनिश्चित करते हुए उसे स्थायित्व प्रदान करना।

सूक्ष्म वित्त संस्थाओं (एमएफआई) और छोटे व्यापारियों, रिटेलर्स, स्वसहायता समूहों और व्यक्तियों को उधार देने वाली एजेंसियों को वित्त एवं उधार गतिविधियों में सहयोग देना।

सभी एमएफआई को रजिस्टर करना और पहली बार प्रदर्शन के स्तर (परफॉर्मंस रेटिंग) और अधिमान्यता की प्रणाली शुरू करना।

इससे कर्ज लेने से पहले आकलन और उस एमएफआई तक पहुंचने में मदद मिलेगी, जो उनकी जरूरतों को पूरी करते हो और जिसका पुराना रिकॉर्ड सबसे ज्यादा संतोषजनक है।

इससे एमएफआई में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। इसका फायदा कर्ज लेने वालों को मिलेगा।

कर्ज लेने वालों को ढांचागत दिशानिर्देश उपलब्ध कराना, जिन पर अमल करते हुए व्यापार में नाकामी से बचा जा सके या समय पर उचित कदम उठाए जा सके।

डिफॉल्ट के केस में बकाया पैसे की वसूली के लिए किस स्वीकार्य प्रक्रिया या दिशानिर्देशों का पालन करना है, उसे बनाने में मुद्रा मदद करेगा।

मानकीकृत नियम-पत्र तैयार करना, जो भविष्य में सूक्ष्म व्यवसाय की रीढ़ बनेगा।

सूक्ष्य व्यवसायों को दिए जाने वाले कर्ज के लिए गारंटी देने के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम बनाएगा।

वितरित की गई पूंजी की निगरानी, कर्ज लेने और देने की प्रक्रिया में मदद के लिए उचित तकनीक मुहैया कराएगा।

छोटे और सूक्ष्म व्यवसायों को प्रभावी ढंग से छोटे कर्ज मुहैया कराने की प्रभावी प्रणाली विकसित करने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत उपयुक्त ढांचा तैयार करना।

मुद्रा बैंक ने कर्ज लेने वालों को तीन हिस्सों में बांटा हैः व्यवसाय शुरू करने वाले, मध्यम स्थिति में कर्ज तलाशने वाले और विकास के अगले स्तर पर जाने की चाहत रखने वाले।

इन तीन हिस्सों की जरूरतों को पूरा करने के लिए मुद्रा बैंक ने तीन कर्ज उपकरणों की शुरुआत की हैः

शिशुः इसके दायरे में 50 हजार रुपए तक के कर्ज आते हैं।

किशोरः इसके दायरे में 50 हजार से 5 लाख रुपए तक के कर्ज आते हैं।

तरुणः इसके दायरे में 5 से 10 लाख रुपए तक के कर्ज आते हैं।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और फ्लैगशिप सामाजिक सुरक्षा योजना शुरू की हैः

प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाय): यह एक दुर्घटना मृत्यु और विकलांगता बीमा योजना है।

भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण इलाकों में रहता है और उनमें से ज्यादातर किसी भी सामाजिक सुरक्षा योजना के दायरे में नहीं आते।

इस आबादी के एक बड़े तबके को तो अब तक बैंकिंग प्रणाली का भी लाभ नहीं मिला है।

ज्यादातर को अब भी समय-समय पर शुरू की गई कई सरकारी योजनाओं की जानकारी नहीं मिली है।

साधारण और गरीब लोगों की जिंदगी में शामिल इस गंभीर असंगति को ठीक करने के लिए भारत के प्रधान मंत्री ने 9 मई 2015 को कोलकाता में पीएमएसबीवाय योजना शुरू की।

इसके साथ ही दो अन्य बीमा और पेंशन योजनाएं भी शुरू की गई।

इन योजनाओं को लेकर सरकार की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है।

कि इनकी सफलता के लिए वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों को राज्यों की राजधानियों और बड़े नगरों में भेजा गया। ताकि एक साथ कई जगहों से इन योजनाओं का शुभारंभ हो सके।

साथ ही सफल क्रियान्वयन भी सुनिश्चित हो सके।

पूर्ववर्ती सरकारों की ओर से शुरू की गई अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से यह योजना किस तरह अलग है?

पीएमएसबीवाय के दो प्रमुख पहलू है, इससे इसके पेष करने का नजरिया अलग हो जाता है।

पहला, समावेशन का शुद्ध आकार और गहराई, इस योजना का फायदा अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना, जो इसे बहुत महत्वाकांक्षी और चुनौतीपूर्ण बनाता है।

आज, यदि किसी परिवार का कमाऊ सदस्य दुर्घटना में स्थायी रूप से विकलांग हो जाता है या उसकी मृत्यु हो जाती है।

तो उसके परिवार को गरीबी और मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

सहयोग या संरक्षण के लिए कोई संस्था या समूह आगे नहीं आता।

पीएमएसबीवाय योजना में शामिल होकर और सिर्फ 12 रुपए प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष प्रीमियम चुकाकर वह बीमा कवर हासिल कर लेगा।

दुर्घटना में मौत या स्थायी तौर पर विकलांगता पर दो लाख रुपए या आंशिक लेकिन स्थायी विकलांगता होने पर एक लाख रुपए का बीमा मिलेगा।

यह योजना एक साल के लिए वैध रहेगी। इसका हर साल नवीनीकरण किया जा सकता है।

बहुत-सी सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को घर के पास वित्तीय प्रणाली अधोसंरचना की कमी की वजह से लोगों से अच्छा प्रतिसाद नहीं मिला।

इतना ही नहीं, खाते खोलने या दावे करने में जो कागजी कार्यवाही करनी पड़ती थी, वह बहुत ज्यादा थी।

यहां तक कि प्रणाली में लीकेज (भ्रष्टाचार) की वजह से भी बड़ा तबका इन योजनाओं का फायदा उठाने से दूर ही रहा। इन समस्याओं को मौजूदा सरकार ने दूर करने की कोशिश की है।

सामाजिक योजनाओं के निष्पादन और तंत्र की निगरानी के लिए टेक्नोलॉजी का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है।

सभी भुगतान हितग्राही के अकाउंट में सीधे होंगे, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी नहीं रहेगी।

पीएमएसबीवाय के तहत कौन पात्र है?

18 और 70 वर्ष आयु समूह के बीच का कोई भी व्यक्ति, जिसका बचत बैंक खाता और आधार कार्ड हो, वह इस योजना से जुड़ सकता है।

एक आसान फॉर्म भरना होगा, नॉमिनी का नाम लिखना होगा और आधार कार्ड को बैंक खाते से लिंक करना होगा।

व्यक्ति को हर साल एक जून से पहले इस योजना में बने रहने के लिए फॉर्म जमा करना होगा। इससे खाता आसानी से सक्रिय किया जा सकता है और पूरा प्रीमियम उसके खाते से खुद-ब-खुद काट लिया जाएगा।

अन्य शब्दों में, व्यक्ति को सिर्फ बैंक खाता खोलना होगा और फिर सुनिश्चित करना होगा कि हर साल 1 जून से पहले कम से कम 12 रुपए खाते में उपलब्ध रहे।

ताकि योजना का नवीनीकरण हो जाए।यदि किसी व्यक्ति को इस योजना का लाभ लंबी अवधि के लिए चाहिए तो उसके पास यह विकल्प भी होगा।

कि वह बैंक को निर्देश देकर योजना के खुद-ब-खुद नवीनीकरण की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

पीएमएसबीवायकौन क्रियान्वित करेगा?

सभी सरकार-प्रायोजित सामान्य बीमा कंपनियां यह योजना पेश करेंगी।

जबकि अन्य बीमा कंपनियों के पास विकल्प होगा कि वह बैंकों के साथ अनुबंध कर इन योजनाओं के तहत प्रोग्राम डिलीवरी में शामिल हो जाए।

क्या मुझे स्कीम में शामिल होने से किसी तरह का टैक्स लाभ होगा?

हितग्राहियों के बैंक खाते से काटी जाने वाली पूरी प्रीमियम धारा 80सी के तहत करमुक्त होगी।

इतना ही नहीं, इस योजना के तहत मिलने वाली एक लाख रुपए तक की राशि धारा 10(10डी) के तहत कर मुक्त होगी।

एक लाख रुपए से ज्यादा राशि होने पर 2 प्रतिशत की दर से टीडीएस काट लिया जाएगा। यदि फॉर्म 15एच या फॉर्म 15जी बीमा एजेंसी में जमा किया तो यह टैक्स नहीं कटेगा।

मौजूदा सरकार को एक ही बार में तीन बड़े सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम शुरू करने की जरूरत क्यों पड़ी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार का एक साल का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है।

यह महसूस किया गया कि उनके प्रदर्शन का बारीकी से विश्लेषण किया जाएगा। एक साल सत्ता में रहने के बाद भी चुनावी वादों और वास्तविकताओं में बहुत बड़ा अंतर है।

सरकार इस बात को लेकर आलोचनाओं से घिर गई कि सरकार खर्च करने में गति नहीं बढ़ा पा रही है।

खासकर बुनियादी ढांचे और विनिर्माण के क्षेत्र में, जहां इसकी बहुत ज्यादा जरूरत है। संसद में कई विधेयक लंबित हैं, जिनसे इन क्षेत्रों को काफी उम्मीदें हैं।

इनमें गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) और प्रमुख जमीन अधिग्रहण विधेयक शामिल है।

सरकार इस वजह से न केवल इन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की घोषणाओं को लेकर उत्सुक थी, बल्कि विभिन्न तबकों में पर्याप्त प्रचार-प्रसार भी चाहती थी।

खासकर उन लोगों के बीच जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

मोनाको: ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव वा ने ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को ‘गेंदबाजी का ब्रैडमैन’ करार दिया है और कहा कि भारत के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज में ऑस्ट्रेलियाई टीम को उनसे निपटने की जरूरत है। ऑस्ट्रेलिया को पुणे में 23 फरवरी से भारत के खिलाफ 4 टेस्ट की सीरीज खेलनी है और वा का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया को दबाव में धैर्य कायम रखना होगा और अश्विन की गेंदबाजी से निपटने का तरीका ढूंढना होगा।

वा ने यहां बातचीत के दौरान संवाददाताओं से कहा, ‘अश्विन गेंदबाजी के ब्रैडमैन हैं। वह जो कर रहा है वह शानदार है। मुझे लगता है कि वह ऐसा खिलाड़ी है जिससे हमें निपटना होगा। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को अश्विन की गेंदबाजी से निपटने के तरीके ढूंढने होंगे। अगर ऑस्ट्रेलिया ऐसा कर पाया तो हमारे पास मौका होगा। खिलाड़ियों को दबाव में धैर्य कायम रखना होगा।’ भारतीय ऑफ स्पिनर की तारीफ करते हुए वा ने कहा, ‘वह अभी जिस तरह खेल रहा है, वह कई रिकॉर्ड तोड़ने वाला है। अश्विन के आंकड़े बेहतरीन है।’ वा ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के लिए यह सीरीज मुश्किल होगी क्योंकि भारतीय टीम संयोजित है और विराट कोहली की कप्तानी शानदार है।

उन्होंने कहा, ‘भारत अभी काफी अच्छा खेल रहा है और उनकी टीम अच्छी तरह से संयोजित है। सभी अपनी भूमिका में काफी सहज हैं। साथ ही वे स्वदेश में काफी खेल रहे हैं। घरेलू मैदान पर उनको हराना काफी मुश्किल है और पिछले कुछ वषरें में यह साबित हुआ है।’

मेरी मुलाकात हाल ही में एक एलैक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार से हुई। ईमानदार पत्रकार ने मीडिया कुछ कर गुजरने के लिये ज्वाइन किया था लेकिन कम्पनी के अधिकार दूसरी कम्पनी को बेच दिया जाने के बाद चैनल में घोर अव्यव्स्था फैल गई। यहां नाम लेना जरूरी नहीं है कि वो कौन सा चैनल है। जरूरी है यह बताना जो उस पत्रकार ने बयान किया।

 पत्रकार ने बताया कि जब वो कवरेज करने जाते थे तो एक कम प्रसार (लघु) वाले अखबार के ब्योरो चीफ को प्रेस कॉंफ्रेंस के बाद दिये जाने वाले भोज और गिफ्ट परम्परा में खाने की लाइन में लगे और गिफ्ट के लिये ललचाते देखते।

उन्हे बहुत गुस्सा आता कि आखिर ये पत्रकारिता क्यों कर रहे हैं कहीं कमीशन एजेंट काम क्यों नहीं कर लेते।

लेकिन हकीकत जब सामने आई तो बहुत दहला देने वाली थी। ये ब्योरो चीफ 1500 रूपये मासिक पर रखे गये थे वो वेतन भी 3 महीने से नहीं मिला था। घर में बच्चे परिवार सब..... मुझे नहीं लगता कि अब आगे कुछ कहने की जरूरत है।

आखिर रीजनल मीडिया दुर्दशा का शिकार है। एक और उदाहरण देना चाहती हूं फेसबुक पर एक सीनिइयर रिपोर्टर ने शेयर किया, “सुबह होते ही एडिटर ने एसाइनमेंट पकड़ाया जाओ शुगर मिल में हो रही हड़ताल को कवर करो और वेतन के लिये भूख हड़ताल कर रहे मजदूरों पर शाम तक एक ऐसी मार्मिक स्टोरी लिखो जो लोगों को हिला कर रख दे।“ रिपोर्टर चल दिये और अपना काम पूरा किया। शाम को घर लौटते हुए सुबह पत्नी का दिया पर्चा याद आ गया। उसमे लिखे काम को पूरा करने के लिये उनके पास पैसे नहीं थे। पर्चे में बच्चों की स्कूल नोटबुक, घर के लिये राशन और बीमार मां की दवाइयां थी। दवाइयों के अलावा वो कुछ नहीं खरीद सके क्योंकि उनका अपना वेतन खुद 3 महीनों से नहीं मिला था।

ये दोनो घटनाएं कहानी नहीं है भारतीय मीडिया की कड़वी हकीकत हैं। ये समस्याये अगर आपको किसी और प्रोफेशन में आती हैं तो आप उसे छोड़ कर दूसरा तीसरा प्रोफेशन अपना सकते हैं। क्योंकि वहां आपका लक्ष्य यानि परिवार का “भरण पोषण” पूरा हो ही जायेगा। लेकिन पत्रकारिता को अपनाने वाले जूनूनी लोगों को कहां चैन मिलेगा......!

 

क्रमश:......

Saturday, 21 March 2015 09:00

सबको सम्मति दे भगवान

Written by

यह सही है कि लफ्जों में इतनी ताकत होती है कि किसी पुरानी डायरी के पन्नों पर कुछ समय पहले चली हुई कलम आज कोई तूफान लाने की क्षमता रखती है लेकिन किसी डायरी के खाली पन्ने भी आँधियाँ ला सकते हैं ऐसा शायद पहली बार हो रहा है।

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के 2017 के वो कैलेंडर और डायरी आज देश भर में चर्चा में हैं जिनके बारे में तो अधिकतर भारतीयों को शायद इससे पहले पता भी न हो। 

कारण है गाँधी जी की जगह मोदी की तस्वीर।

पूरा देश गाँधी प्रेम में उबल रहा है कि गाँधी की जगह कोई नहीं ले सकता,केवल चरखे के पीछे बैठकर फोटो खिंचाने से कोई गाँधी नहीं बन सकता आदि आदि।

सही भी है आखिर गाँधी जी इस देश के राष्ट्रपिता हैं और पूरा देश उनसे बहुत प्यार करता है और उनकी इज्जत करता है।

लेकिन गाँधी जी को सही मायनों में हममें से कितनों ने समझा है?

गाँधी जी कहते थे कि सबसे महत्वपूर्ण लड़ाई भय और असुरक्षा जैसे तत्वों पर विजय पाना है।

आज जो लोग गाँधी जी के नाम को रो रहे हैं इनमें से कितनों ने अपने भय या असुरक्षा की भावना पर विजय हासिल की है?

यह असुरक्षा की भावना नहीं तो क्या है कि एक तरफ आप चिल्ला रहे हैं कि गांधी की जगह कोई नहीं ले सकता और दूसरी तरफ इसे बेमतलब मुद्दा भी बना रहे हैं! क्योंकि आप केवल इन शब्दों को 'कह' रहे हैं, इनके सहारे जनमानस को बहकाने की असफल कोशिश कर रहे हैं। अगर आप अपने कहे शब्दों को 'समझते' तो इस बात को मुद्दा नहीं बनाते क्योंकि यह तो अटल सत्य है ही कि गाँधी जी की जगह कोई नहीं ले सकता।

गाँधी जी ही हमारे गाँधी हैं और रहेंगे ।

लेकिन जो असली भावना आपको डरा रही है वो यह है कि आप ही की गलतियों के कारण आज मोदी भी उस मुकाम पर पँहुच गए हैं कि कोई उनकी जगह भी नहीं ले सकता।विपक्ष तो क्या सरकार या फिर खुद उनकी ही पार्टी में भी उनकी जगह लेने वाला कोई नहीं है कम से कम आज तो नहीं।

गाँधी जी को आज जो रो रहे हैं और कह रहे हैं कि गाँधी को खादी से और खादी को गाँधी से कोई अलग नहीं कर सकता उन्होंने इतने साल गाँधी के लिए या फिर खादी के लिए क्या किया।

दरअसल वो गाँधी को नहीं उस नाम को रो रहे हैं जिस नाम को उन्होंने अपने कापी राइट से अधिक कभी कुछ नहीं समझा।

इतने सालों गाँधी जी के लिए कुछ किया गया तो यह कि देश भर में लगभग 64 सरकारी स्कीमें उनके नाम पर खोली गईं , 24 खेलों के टूर्नामेंट और ट्रोफी उनके नाम पर रखे गये,15 स्कालरशिप उनके नाम पर दी गई,

19 स्टेडियम उनके नाम पर खोले गए,39 अस्पतालों का नाम उनके नाम पर रखा गया,74 बिल्डिंग और सड़कों के नाम उनके नाम पर रखे गए,5 एयरपोर्ट का नाम उनके नाम पर रखा गया आदि आदि लिस्ट बहुत लम्बी है।

इसके अलावा 2 अक्तूबर को बापू की समाधि पर फूल चढ़ाकर उनके प्रिय भजनों का आयोजन और दूरदर्शन पर 'गाँधी' फ़िल्म का प्रसारण। बस कर लिया बापू को याद!

क्या यहीं तक सीमित है हमारा 'बापू प्रेम '?

हमारे राष्ट्र पिता के प्रति इतनी ही है हमारी भक्ति ?

यही सच्ची श्रद्धा है जिसके हकदार हैं हमारे बापू ?

तो फिर वो क्या है जब देश का प्रधानमंत्री जिसके नाम के साथ गाँधी तो नहीं लगा लेकिन आजादी के 70 साल बाद जब देश की बागडोर अपने हाथों में लेता है तो गाँधी जी के सपने को यथार्थ में बदलने के उद्देश्य से 'स्वच्छ भारत ' अभियान की शुरुआत करता है और उसका प्रतीक चिह्न गाँधी जी के चश्मे को रखता है?

वो क्या है जब यही प्रधानमंत्री गाँधी जी की 150 वीं जयन्ति के अवसर पर 2019 तक पूरे देश को खुले में शौच से मुक्त करने का बीड़ा उठाता है?

यहाँ इस प्रश्न पर तो बात ही नहीं की जा रही कि इतने सालों जिस 'गाँधीवादी' पार्टी का शासन था उसने इस दिशा में क्या कदम उठाए या फिर आजादी के इतने सालों बाद भी किसी  प्रधानमंत्री को इस मूलभूत स्तर पर काम क्यों करना पड़ रहा है।वो क्या है जब प्रधानमंत्री 'मन की बात ' में देशवासियों से 'गाँधी की खादी' अपनाने का आह्वान करते हैं तो खादी की बिक्री में 125% की बढोत्तरी दर्ज होती है (इंडिया टुडे की रिपोर्ट) ।

वो क्या है जब मोदी नारा देते हैं  "खादी फार नेशन , खादी फार फैशन " ?

वो क्या है जब प्रधानमंत्री खादी के उन्नयन के लिए पंजाब में 500 महिलाओं को चरखा बाँटने वाले आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बनते हैं?

गाँधी जी अपने बाथरूम की सफाई खुद ही करते थे तो आज जो गाँधी के नाम पर विलाप कर रहे हैं उनमें से कितने उनका अनुसरण करते हैं?

और वो क्या है जब इस देश का प्रधानमंत्री उनका अनुसरण करते हुए न सिर्फ खुद हाथ में झाड़ू पकड़ कर सफाई अभियान की शुरुआत करते हैं बल्कि पूरे देश को प्रेरित करते हैं?

लेकिन यह अजीब सी बात है कि जब प्रधानमंत्री के हाथों में झाड़ू होता है तो कोई सवाल नहीं करता लेकिन उन्हीं हाथों में चरखा आ जाता है तो मुद्दा बन जाता है?

आपको इस तथ्य से कोई फर्क नहीं पड़ता कि खादी की बिक्री जो कि कांग्रेस के शासन काल के 50 सालों में 2 से 7% थी   पिछले दो वर्षों में बढ़कर 34% तक पहुँच गई।

आपको इस बात से भी फर्क नहीं पड़ता कि इससे पहले भी 6 बार जब बापू इस कैलेंडर में नहीं थे वो भी आप ही के शासन काल में 

1996,2002,2005,2011,2012,2013, में तब आपने इसे मुद्दा नहीं बनाया था तो आपके लिए गाँधी जी की ही प्रिय प्रार्थना 'आप सबको सम्मति दे भगवान ' 

गाँधी जी केवल चरखा और खादी तक सीमित नहीं हैं वो एक विचारधारा हैं जीवन जीने की शैली हैं नैतिकता सच्चाई दृढ़ संकल्प और अदम्य साहस के साथ साथ अहिंसा के प्रतीक हैं। वे व्यक्ति नहीं अपने आप में एक संस्था हैं।

इससे बड़ी बात क्या होगी कि वे केवल भारत में नहीं अपितु पूरे विश्व में अहिंसा के पुजारी के रूप में पूजे जाते हैं। जब भारत के गाँधी पर अमेरिका के जान ब्रिले  फिल्म लिखते हैं और रिचर्ड एटनबोरो निर्देशित करते हैं तो वे गाँधी को हमसे छीनते नहीं हैं बल्कि सम्पूर्ण विश्व को उनके व्यक्तित्व एवं विचारधारा से अवगत कराते हैं, उनकी सीमाएं भारत को लाँघ जाती हैं। 

तो जो लोग आज कैलेंडर की तस्वीर पर बवाल मचा रहे हैं वे अपनी असुरक्षा की भावना से बाहर निकल कर समझें कि गाँधी जी इतने छोटे नहीं कि किसी तस्वीर के पीछे छिपाए जांए।

डॉ नीलम महेंद्र

 

इस्लामाबाद: जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद ने पाकिस्तान सरकार से कहा है कि उसका नाम उस सूची से तत्काल हटाया जाए जो देश से बाहर जाने को लेकर उस पर प्रतिबंध लगाती है। उसने दावा किया कि उससे न तो सुरक्षा को कोई खतरा है और न ही उसका संगठन आतंकवादी गतिविधियों में कभी शामिल रहा है।

वर्ष 2008 में हुए मुंबई आतंकवादी हमले के मास्टरमाइंड ने गृहमंत्री चौधरी निसार अली खान को लिखे पत्र में कहा, ‘‘38 लोगों को सूची में डालने वाले 30 जनवरी 2017 को जारी ज्ञापन पत्र को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।’’ मुंबई में हुए आतंकवादी हमले में 166 लोगों की मौत हो गई थी।

सरकार ने सईद एवं जमात उद दावा के 37 अन्य नेताओं और उसकी फलाह ए इंसानियत चैरिटी को पिछले महीने ‘एग्जिट कंट्रोल लिस्ट’ में डाल दिया था।

शांति एवं सुरक्षा के लिए ‘हानिकारक’ गतिविधियों में शामिल होने के संबंध में सईद और संगठन के चार अन्य नेताओं को 90 दिनों के लिए ‘नजरबंद’ कर दिया गया है। इसके अलावा गृह मंत्रालय ने जमात उद दावा और एफआईएफ को छह महीने के लिए ‘‘निगरानी-सूची’’ में डाल दिया था।

लेकिन सईद ने सरकार के निर्णय का विरोध करते हुए कहा, ‘‘जमात उद दावा संगठन पाकिस्तान में किसी आतंकवादी गतिविधि में कभी शामिल नहीं रहा और संगठन पर आतंकवाद या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने संबंधी किसी घटना का कभी आरोप नहीं लगा।’’ उसने तर्क दिया कि संघीय या प्रांतीय सरकारों ने किसी अदालत में उसके खिलाफ कभी कोई सामग्री पेश नहीं की।

उसने वर्ष 2009 में उसके खिलाफ एक मामले में लाहौर उच्च न्यायालय की एक पूर्ण पीठ की टिप्पणी का हवाला दिया ।अदालत ने कहा था, ‘‘मौजूदा मामले में सरकार के पास इस बात का कोई सबूत नहीं है कि याचिकाकर्ता से पाकिस्तान की सुरक्षा को कोई खतरा है और केवल संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के आधार पर किसी की स्वतंत्रता में अवरोध पैदा नहीं किया जा सकता।

वाशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जानते हैं कि रूस के साथ ‘बेहतर संबंध’ अमेरिका के हित में है और इसलिए वह पूर्ववर्ती प्रशासन से इतर रूस के साथ मित्रवत संबंध चाहते हैं जबकि ओबामा प्रशासन इस तरह के प्रयास में नाकाम रहा था।

व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव सीन स्पाइसर ने कल संवाददाताओं से कहा, ‘मुझे लगता है राष्ट्रपति की उस इच्छा में थोड़ा अंतर है कि वह यह समझते हैं कि रूस के साथ बेहतर संबंध समूची दुनिया में आईएसआईएस और आतंकवाद के खात्मे में हमारी मदद कर सकता है। ओबामा प्रशासन ने रूस के साथ संबंध सुधारने की कोशिश तो की, लेकिन वो नाकाम रहे।’स्पाइसर ने कहा, ‘उन्होंने रूस को बताने की कोशिश की कि क्रीमिया पर आक्रमण नहीं करें, लेकिन नाकाम रहे। मौजूदा राष्ट्रपति यह समझते हैं कि सहज संबंध अमेरिका के राष्ट्रीय और आर्थिक हित में है। अगर पुतिन और रूस के साथ उनके बेहतर रिश्ते हैं तो यह अच्छा है और अगर ऐसा नहीं होता है तो वह इस दिशा में आगे बढ़ेंगे।’ उन्होंने कहा कि लेकिन वह सिर्फ ये बात मानने को तैयार नहीं हैं कि अतीत में ऐसा होना संभव नहीं था।

स्पाइसर ने दृढ़ता से इस बात का खंडन किया कि ट्रम्प रूस को लेकर नरम हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने यह स्पष्ट किया है कि उन्हें उम्मीद है कि रूस सरकार यूक्रेन में हिंसा कम करेगी और क्रीमिया को वापस लौटायेगी। उन्होंने कहा, ‘दूसरी ओर उन्हें इस बात की भी पूरी उम्मीद है और वह पूर्ववर्ती प्रशासन के विपरीत रूस के साथ बेहतर संबंध चाहते हैं ताकि आईएसआईएस और आतंकवाद जैसी दुनिया की ऐसी कई समस्याओं का मिलकर समाधान किया जा सके।’ बहरहाल, विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने रूस पर कथित रूप से नरम रवैये को लेकर ट्रम्प की आलोचना की है।

बीजिंग: चीन के पश्चिमी शिनजियांग क्षेत्र में तीन संदिग्ध उईगुर आतंकवादियों ने पांच लोगों की चाकू घोंपकर हत्या कर दी और बाद में पुलिस ने इन हमलावरों को मार गिराया। इस मुस्लिम बहुल अशांत प्रांत में हुआ यह सबसे ताजा ‘आतंकी हमला’ है।

यह हमला बीती शाम पिशान प्रांत में हुआ था। हमले में 10 लोग जख्मी हो गये थे जिनमें से पांच को अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया। हांगकांग स्थित ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ ने खबर दी है कि पुलिस ने तीनों हमलावरों को गोली मार दी। अधिकारियों ने इस घटना को ‘आतंकी हमला’ करार दिया। इस हमले के बाद देश में उच्चतम स्तर का सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया। सरकार ने संदिग्धों और पीड़ितों की पहचान नहीं बताई है, लेकिन कुछ निवासियों ने कहा कि हमलावर उईगुर थे। चीन में सड़कों पर 10 से 20 मीटर की दूरी पर सशस्त्र पुलिस बल गश्त लगा रहे हैं।

पाकिस्तान के कब्जे वाला पाकिस्तान (पीओके) और अफगानिस्तान की सीमा से लगता शिनजियांग कई वर्ष से उईगुर प्रदर्शनों के चलते अशांत रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों से बड़े पैमाने पर हान चीनीयों की बस्तियों के खिलाफ उईगुर प्रदर्शन होते रहे हैं। क्षेत्र में होने वाले हमलों के लिये चीन ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ईटीआईएम) से उईगुर अलगाववादियों पर आरोप लगाता है। क्षेत्र में तुर्क मूल के उईगुर मुस्लिमों की एक करोड़ से अधिक की आबादी है। बीते दिसंबर में चार चाकूधारी व्यक्तियों ने दक्षिण शिनजियांग के होतान प्रांत स्थित कम्युनिस्ट पार्टी कार्यालय पर विस्फोट कर हमला किया था। हमले में चार हमलावर भी मारे गये थे।

पेशावर: पाकिस्तान के अशांत उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में हुए दो आत्मघाती हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए।

पहला हमला मोहमंद कबायली क्षेत्र में हुआ जहां दो आत्मघाती हमलावरों ने एक सरकारी परिसर को निशाना बनाया। इस हमले में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई जिनमें चार सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने कहा कि आत्मघाती हमलावरों ने गालनाई में सरकारी परिवार को निशाना बनाया। एक ने खुद को उड़ा लिया और दूसरे को सुरक्षा बलों ने मार गिराया। मीडिया की खबरों के अनुसार पाकिस्तानी तालिबान के धड़े जमात-उल-अहरार ने हमले की जिम्मेदारी ली है।

दूसरा हमला पेशावर के हयाताबाद इलाके में हुआ जहां मोटरसाइकिल सवार आत्मघाती हमलावर ने सरकारी वाहन में टक्कर मार दी। आत्मघाती हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई। यह विस्फोट ऐसे समय में हुआ जब प्रतिष्ठित अखबार ‘डॉन’ की खबर के मुताबिक हायताबाद चिकित्सा परिसर में बाह्य रोगी विभाग के उद्घाटन के लिए प्रांतीय सरकार के अधिकारियों को हिस्सा लेना था। इस कार्यक्रम में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के अध्यक्ष इमरान खान और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के हिस्सा लेने की संभावना थी।

वॉशिंगटन: अमेरिका के एक वरिष्ठ सीनेटर ने उम्मीद जताई है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप H1B वीजा योजना को कमजोर नहीं करेंगे। इस वीजा योजना से सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम करने वाले भारतीयों के हित जुड़े हुए हैं।

सीनेट की वित्त समिति के प्रमुख सीनेटर ओरियन हैच ने कहा कि ट्रंप के साथ कई मुलाकातों में उन्होंने  H1B वीजा कार्यक्रम को जारी रखने और इसका विस्तार करने के आर्थिक फायदों के बारे में चर्चा की। हैच ने मीडिया टेक्नोलॉजी कंपनी ‘मॉर्निंग कंसल्ट’ से कहा कि ट्रंप के साथ मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति ने उनको आश्वस्त किया कि वह H1B वीजा को लेकर व्यावहारिक रूख अपनाएंगे।

उन्होंने कहा, ‘इससे नौकरियां पैदा होती हैं, अर्थव्यवस्था आगे की ओर बढ़ती है। मेरा मानना है कि राष्ट्रपति राजनीतिक भावनाओं को अलग रख सकते हैं।’

 

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