नई दिल्ली(2 अगस्त): डोकलाम विवाद पर भारत और चीन के बीच तनाव अपने चरम पर है। भारत के खिलाफ चीन की किसी भी तरह की साजिश को नकार नहीं दिया जा सकता। ऐसे में चीन के पास एक ऐसा हथ‌ियार है ज‌िसे वह भारत के ख‌िलाफ इस्तेमाल कर सकता है।

- बता दें क‌ि, बीती 25 जुलाई को उत्तराखंड में चीनी सैन‌िकों ने घुसपैठ की थी।

- इधर वाड़‌िया इंस्टीट्यूट के वैज्ञान‌िकों का कहना है क‌ि चीन के पास एक खतरनाक हथ‌ियार है। ऐसे में भारत को इससे सावधान रहने की जरूरत है।

- वैज्ञानिकों का कहना है कि चीन के पास पानी की इतनी शक्ति है कि अगर भारत ने उसपर नजर नहीं रखी तो बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।  हाल ही में एक रिसर्च के मुताब‌िक वैज्ञानिक संतोष राय का कहना है कि अगर चीन घाघरा, गंडक और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों का पानी रोक कर अचानक छोड़ता है तो भारत के लिए हालात बेहद खतरनाक हो जाएंगे।

- वैज्ञानिकों का मानना है क‌ि चीन भारत से काफी ऊंचाई पर है और उसके यहां से आ रही विशाल नदियां पानी का जबरदस्त वेग लेकर आती हैं। सीमा पर जिस तरह से विवाद चल रहा है उसके बाद हमारी सरकार और हमें चौकन्ना रहने की जरूरत है क्योंकि अगर चीन ये हरकत करता है तो हमारे लिए हालात बेहद खतरनाक हो जाएंगे।

नई दिल्ली(2 अगस्त): एनजीटी ने उत्तर प्रदेश सरकार को ताजमहल के आसपास से अवैध निर्माण हटाने को कहा है। एऩजीटी के आदेश के मुताबिक यूपी सरकार को ताजमहल के पास बने अवैध रेस्टोरेंट को ध्वस्त करना होगा। साथ एनजीटी ने सरकार से ताजमहल के आसपास हरियाली बढाने को कहा है।

नई दिल्ली(1 अगस्त): लश्कर कमांडर अबु दुजाना पुलवामा में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया है। पता चला है कि अबु दुजाना को जिस घर में घेरा गया है वो उसकी पत्नी का था। 

-अबु दुजाना ने कुछ दिन पहले लोकल कश्मीरी लड़की से शादी की थी। वो लश्कर से सात लाख रुपए मांग रहा था जिससे वो अपनी पत्नी को भारत के बाहर शिफ्ट करना चाहता था।

- बता दें जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के काकापोरा में सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों के साथ मुठभेड़ में आतंकी संगठन के कश्मीर कमांडर अबु दुजाना को मार गिराया है। 

- जानकारी के मुताबिक सुरक्षाबलों को इस इलाके में लश्कर के कमांडर अबु दुजाना सहित 3 आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी। 

- बता दें कि अबु दुजाना के सिर पर लाखों रुपये का इनाम था।

-मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरक्षाबलों ने उस घर को विस्फोटक से उड़ा दिया जिसमें आतंकियों के छिपे होने की आशंका थी। खबरों के मुताबिक सुरक्षाबलों ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए 2 आतंकियों को मार गिराया है और अभी भी तीसरे आतंकी की तलाश जारी है। 

भारत हर साल 15 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है।

यह दिन जहां हमारे आजाद होने की खुशी लेकर आता है वहीं इसमें भारत के खण्ड खण्ड होने का दर्द भी छिपा होता है।

वक्त के गुजरे पन्नों में भारत से ज्यादा गौरवशाली इतिहास किसी भी देश का नहीं हुआ।

लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप से ज्यादा सांस्कृतिक राजनैतिक सामरिक और आर्थिक हमले भी इतिहास में शायद किसी देश पर नहीं हुए।

और कदाचित किसी देश के इतिहास के साथ इतना अन्याय भी कहीं नहीं हुआ।

वो देश जिसे इतिहास में 'विश्व गुरु' के नाम से जाना जाता हो, उस देश के प्रधानमंत्री को आज  "मेक इन इंडिया" की शुरूआत करनी पड़रही है।

'सोने की चिड़िया' जैसे नाम जिस देश को कभी दिया गया हो, उसका स्थान आज विश्व के विकासशील देशों में है।

शायद हमारा वैभव और हमारी  समृद्धि की कीर्ति ही हमारे पतन का कारण भी बनी।

भारत के ज्ञान और सम्पदा के चुम्बकीय आकर्षण से विदेशी आक्रमणता लूट के इरादे से इस ओर आकर्षित हुए।

वे आते गए और हमें लूटते गए।

हर आक्रमण के साथ चेहरे बदलते गए लेकिन उनके इरादे वो ही रहे

वो मुठ्ठी भर होते हुए भी हम पर हावी होते गए

हम वीर होते हुए भी पराजित होते गए

क्योंकि हम युद्ध कौशल से जीतने की कोशिश करते रहे

और वे जयचंदों के छल से हम पर विजय प्राप्त करते रहे

हम युद्ध भी ईमानदारी से लड़ते थे और वे किसी भी नियम को नहीं मानते थे

इतिहास गवाह है, हम दुशमनों से ज्यादा अपनों से हारे हैं शायद इसीलिए किसी ने कहा है,

" हमें तो अपनों ने लूटा , ग़ैरों में कहाँ दम था,

हमारी कश्ती वहाँ डूबी जहाँ पानी कम था  "

जो देश अपने खुद की गलतियों से नहीं सीखा पाता वो स्वयं इतिहास बन जाता है

हमें भी शायद अपनी इसी भूल की सज़ा मिली जो हमारी वृहद सीमाएं आज इतिहास बन चुकी हैं।

वो देश जिसकी सीमाएं उत्तर में हिमालय दक्षिण में हिन्द महासागर पूर्व में इंडोनेशिया और पश्चिम में ईरान तक फैली थीं ,आज  सिमट कर रह गईं और इस खंडित भारत को हम आजाद भारत कहने के लिए विवश हैं।

अखंड भारत का स्वप्न सर्वप्रथम आचार्य चाणक्य ने देखा था और काफी हद तक चन्द्रगुप्त के साथ मिलकर इसे यथार्थ में बदला भी था। तब से लेकर लगभग 700 ईसवी तक भारत ने इतिहास का स्वर्णिम काल अपने नाम किया था।

लेकिन 712 ईस्वी में सिंध पर पहला अरब आक्रमण हुआ फिर 1001 ईस्वी से महमूद गजनी , चंगेज खान ,अलाउद्दीन खिलजी ,मुहम्मद तुगलक ,तैमूरलंग , बाबर और उसके वंशजों द्वारा भारत पर लगातार हमले और अत्याचार हुए।

1612 ईस्वी में जहाँगीर ने अंग्रेजों को भारत में व्यापार करने की इजाज़त दी।

यहाँ इतिहास ने एक करवट ली और व्यापार के बहाने अंग्रेजों ने पूरे भारत पर अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया।

लेकिन इतने विशाल देश पर नियंत्रण रखना इतना आसान भी नहीं था यह बात उन्हें समझ में आई 1857 की क्रांति से ।

इसलिए उन्होंने "फूट डालो और राज करो" की नीति अपनाते हुए धीरे धीरे भारत को तोड़ना शुरू किया।

1857 से 1947 के बीच अंग्रेजों ने भारत को सात बार तोड़ा ।

1876 में अफगानिस्तान

1904 में नेपाल

1906 में भूटान

1914 में तिब्बत

1935 में श्रीलंका

1937 में म्यांमार

1947 में बांग्लादेश और पाकिस्तान

लेकिन हम भारतवासी अंग्रेजों की इस कुटिलता को नहीं समझ पाए कि उन्होंने हमारे देश की भौगोलिक सीमाओं को ही नहीं तोड़ा, बल्कि हमारे समाज, हमारी भारतीयता, इस देश की आत्मा को भी खण्डित कर गए।

जाते जाते वे इस बात के बीज बो गए कि भविष्य में भी भारत कभी एक न रह पाए।बहुत ही चालाकी से वे हिन्दू समाज को जाती क्षेत्र और दल के आधार पर जड़मूल तक विभाजित कर गए।

जरा सोचिए कि क्यों जब हमसे आज हमारा परिचय पूछा जाता है तो हमारा परिचय ब्राह्मण बनिया ठाकुर मराठी कायस्थ दलित कुछ भी हो सकता है लेकिन भारतीय नहीं होता ?

अंग्रेजों के इस बीज को खाद और पानी दिया हमारे नेताओं ने जो देश के विकास की नहीं वोट बैंक की राजनीति करते आ रहे हैं।

जब  इक्कीसवीं सदी के इस ऊपर से, एक किन्तु भीतर ही भीतर विभाजित भारत की यह तस्वीर अंग्रेज देखते होंगे तो मन ही मन अपनी विजय पर गर्व महसूस करते होंगे।

हम भारत के लोग 15 अगस्त को किस बात का जश्न मनाते हैं?

आजादी का?

लेकिन सोचो कि हम आजाद कहाँ हैं?

हमारी सोच आज भी गुलाम है !

हम गुलाम हैं अंग्रेजी सभ्यता के जिसका अन्धानुकरण हमारी युवा पीढ़ी कर रही है।

हम गुलाम हैं उन जातियों के जिन्होंने हमें आपस में बाँटा हुआ है और हमें एक नहीं होने देती ।

हम गुलाम हैं अपनी सरकार की उन नीतियों की जो इस देश के नागरिक को उसके धर्म और जाति के आधार पर आंकती हैं उसकी योग्यता के आधार पर नहीं

हम गुलाम हैं उस तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के जिसने हमें बाँटा हुआ है धर्म के नाम पर

हम गुलाम हैं हर उस सोच के जो हमारे समाज को तोड़ती है और हमें एक नहीं होने देती।

हम आज भी गुलाम हैं अपने निज स्वार्थों के जो देश हित से पहले आते हैं।

अगर हमें वाकई में आजादी चाहिए तो सबसे पहले अपनी उस सोच अपने अहम से हमें आजाद होना होगा जो हमें अपनी पहचान "केवल भारतीय" होने से रोक देती है।

हमें आजाद होना पड़ेगा उन स्वार्थों से जो देश हित में रुकावट बनती हैं।

अब वक्त आ गया है कि हम अपनी आजादी को भौगोलिक अथवा राजनैतिक दृष्टि तक सीमित न रखें।

हम अपनी आज़ादी अपनी सोच में लाएँ । जो सोच और जो भौगोलिक सीमाएं हमें अंग्रेज दे गए हैं उनसे बाहर निकलें।

विश्व इतिहास से सीखें कि जब जर्मनी का एकीकरण हो सकता है, जब बर्लिन की दीवार गिराई जा सकती है, जब इटली का एकीकरण हो सकता है, तो भारत का क्यों नहीं?

चन्द्रशेखर आजाद भगतसिंह सुखदेव महारानी लक्ष्मीबाई मंगल पांडे रामप्रसाद बिस्मिल सुभाष चंद्र बोस अश्फाकउल्लाह खान ने अपनी जान अखंड भारत के लिए न्योछावर की थी खण्डित भारत के लिए नहीं।

लखनऊ(1 अगस्त): उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार गरीब लड़कियों को शादी में स्मार्टफोन का उपहार देगी। इसके अलावा पहले की तरह 20 हजार रुपये भी मिलता रहेगा।

- गरीब लड़कियों की शादी में राज्य सरकार सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आयोजन करेगी। इस तरह के आयोजनों में सांसद और विधायक के अलावा समाज के प्रतिष्ठित लोगों को भी बुलाया जाएगा।

- मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के पहले चरण में 71400 लड़कियों की शादी कराएगी। पांच से अधिक विवाह होने पर यह समारोह क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत, नगर निगम और नगरपालिका परिषद के स्तर पर आयोजित किया जाएगा। जिलाधिकारी एक विवाह कार्यक्रम समिति का गठन करेंगे।

- समिति ही टेंट, विवाह संस्कार, पेयजल आदि की व्यवस्था कराएगी। पहले जहां इस योजना के तहत लाभार्थी को 20 हजार रुपये का अनुदान दिया जाता था, वहीं अब सरकार 35 हजार रुपये खर्च करेगी। इसमें बीस हजार कन्या के खाते में, दस हजार से कपड़े, बिछिया, पायल, सात बर्तन, एक जोड़ी वस्त्र और स्मार्ट फोन खरीदा जाएगा। पांच हजार रुपये पंडाल आदि आदि के लिए अधिकृत निकायों को दिया जाएगा।

नई दिल्ली (1अगस्त): अभिनेता सलमान खान ने कहा है कि अगर वह 2-3 सालों में या भविष्य में पिता बनेंगे तो सिर्फ इसलिए क्योंकि वह चाहते हैं कि उनके माता-पिता उनका बच्चा देखें। उन्होंने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि समय निकल रहा है... लेकिन शायद जब मैं 70 वर्ष का हो जाऊंगा और मेरे बच्चे 20 वर्ष के होंगे, तब मुझे महसूस होगा।''

श्रीनगर(1 अगस्त): लश्कर कमांडर अबु दुजाना और उसके साथी के मारे जाने के बाद घाटी में तनाव का माहौल है।घाटी से झड़प की खबरें आ रही है। बता दें जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के काकापोरा में सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों के साथ मुठभेड़ में आतंकी संगठन के कश्मीर कमांडर अबु दुजाना को मार गिराया है।

- जानकारी के मुताबिक सुरक्षाबलों को इस इलाके में लश्कर के कमांडर अबु दुजाना सहित 3 आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी। बता दें कि अबु दुजाना के सिर पर लाखों रुपये का इनाम था।

-मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरक्षाबलों ने उस घर को विस्फोटक से उड़ा दिया जिसमें आतंकियों के छिपे होने की आशंका थी। खबरों के मुताबिक सुरक्षाबलों ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए 2 आतंकियों को मार गिराया है और अभी भी तीसरे आतंकी की तलाश जारी है।

नई दिल्ली(1 अगस्त): टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री ने अपने दूसरे कार्यकाल में खिलाड़ियों की तैयारी के स्टाइल में थोड़ा बदलाव किया है। शास्त्री के इस नए स्टाइल की भले ही अभी शुरुआत है, लेकिन इसका तुरंत प्रभाव देखा जा सकता है। शास्त्री ने जो कुछ अहम चीजें लागू की हैं, उसमें यह बात महत्वपूर्ण है कि कैसे बल्लेबाज अब मध्यक्रम में बल्लेबाजी के लिए तुरंत तैयार रहते हैं। बल्लेबाजी क्रम से इसका कुछ लेना देना नहीं है, बल्कि मध्यक्रम में बल्लेबाजी के लिए उतरने से पहले 'वार्मिंग अप' में नयापन लाया गया है।

- गॉल में ही यह साफ हो गया जब शिखर धवन और अभिनव मुकुंद की भारतीय जोड़ी पहले टेस्ट में टीम के अन्य सदस्यों से पहले मैदान पर पहुंची। इसका मकसद यही था कि नेट पर पहुंचो और गेंद हिट करना शुरू करो क्योंकि भारत पहले बल्लेबाजी भी कर सकता है। इस मैच में कोहली ने टॉस जीता और अच्छा वार्म अप करने वाले धवन ने पहली पारी में 168 गेंद में 190 रन बनाए।

- जब तक सलामी बल्लेबाज पविलियन पहुंचे, चेतेश्वर पुजारा ने यह बदला हुआ अपना रुटीन पूरा कर लिया, जबकि विराट कोहली नेट पर थे। यह निश्चित रूप से पिछली बार से अलग तरह का प्रयोग था और टीम का इसमें स्वागत किया गया। कोच शास्त्री ने यह नई प्रक्रिया इसलिए शुरू की कि टीम को मैदान पर भी अपना नंबर एक का दर्जा दिखाना चाहिए। शास्त्री से पहले टीम इंडिया के कोच रहे अनिल कुंबले के कार्यकाल में टीम इंडिया टेस्ट रैंकिंग में नंबर 1 के पायदान पर काबिज हुई थी। आज भी टीम नंबर 1 है और शास्त्री चाहते हैं कि टीम इस स्थान पर अपने आप को और मजबूत करे।

- अपने पहले दौरे की शुरुआत से पहले नवनियुक्त कोच रवि शास्त्री को टीम इंडिया के साथ समय बिताने का ज्यादा मौका नहीं मिला था। थोड़े से समय में शास्त्री ने खिलाड़ियों के साथ जो संवाद किया, खिलाड़ी उसके पक्ष में दिखाई दिए। बतौर कोच टीम के साथ हुई अपनी पहली बातचीत में शास्त्री ने कहा कि खिलाड़ियों को कुछ और सोचने से ज्यादा अपने खेल को इंजॉय करने के बारे में सोचना चाहिए। यही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली(15 जुलाई): विश्व हिंदू परिषद ने अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले की निंदा करते हुए कहा कि घटना से पता चलता है कि सरकार कश्मीर मुद्दे से सख्ती से नहीं निपट रही है। वीएचपी ने साथ ही कहा कि सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए जल्द ही वह एवं बजरंग दल के 10,000 से अधिक कार्यकर्ता कश्मीर के आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों में जमा होंगे।

- वीएचपी की कोंकण क्षेत्र इकाई के प्रमुख शंकरराव गैकर ने कहा कि चरमपंथियों एवं जेहादियों ने हमारे देश को एक युद्धक्षेत्र बना दिया है और रोजाना हमले कर रहे हैं। समय आ गया है कि देश कश्मीर में पूर्ण रूप से एक आतंकरोधी अभियान शुरू करे और कायराना हमलों में निर्दोष लोगों की जान लेने वाले जेहादियों का सफाया करे।

- उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल साफ है कि सरकार कश्मीर मुद्दे से सख्ती से नहीं निपट रही। हमारा कोई पूर्णकालिक रक्षा मंत्री नहीं है। गृह मंत्री (राजनाथ सिंह) ने हाल में कहा कि सेना को आतंकियों के सफाये के लिए खुली छूट दी गयी है। लेकिन मैं पूछता हूं कि अब तक सेना के हाथ बंधे क्यों थे?

-उन्होंने कहा कि सरकार को जम्मू-कश्मीर के पुलिस विभाग एवं भारत के सशस्त्र बलों में कश्मीरी मुसलमालों की भर्ती तत्काल रोक देनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो वहां हमारे जवानों का अपमान कर रहे पथराव करने वाले लोग आने वाले सालों में सशस्त्र बलों में शामिल होकर हमारे ही देश के खिलाफ काम कर सकते हैं।

- गैकर ने कहा कि भाजपा सरकार को हिंदुत्व की ‘मूल नीति’ का पालन करना चाहिए और देश की ‘बेहतरी’ के लिए संविधान से अनुच्छेद 370 हटा देना चाहिए।

- उन्होंने कहा कि सेना के जवानों का मनोबल बढ़ाने के लिए जल्द ही वीएचपी और बजरंग दल के 10,000 से अधिक कार्यकर्ता कश्मीर घाटी के आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों में जमा होंगे।

 

 

 

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